वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत संभावित कर चोरी का पता लगाने के लिए अब कृत्रिम मेधा (एआई), मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन तकनीकों की मदद से कर चोरी पर नजर रखने के साथ-साथ ईमानदार करदाताओं के लिए नियमों का पालन करना भी आसान बनाया जा रहा है।
मंत्रालय के मुताबिक, जीएसटी लागू होने के बाद से करदाताओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2017 में जहां जीएसटी के तहत 66.5 लाख करदाता पंजीकृत थे, वहीं मई 2026 तक यह संख्या बढ़कर 1.65 करोड़ हो गई है। मंत्रालय का कहना है कि यह देश की अर्थव्यवस्था के तेजी से औपचारिक होने का संकेत है।
जीएसटी से मिलने वाले राजस्व में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2017-18 में सकल जीएसटी संग्रह करीब 7.4 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, पिछले पांच वर्षों में यह आंकड़ा 2021-22 के 13.76 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 22.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल और मई महीने में जीएसटी संग्रह 4.37 लाख करोड़ रुपये रहा।
2017 में लागू किया गया था GST
गौरतलब है कि जीएसटी एक जुलाई 2017 को पूरे देश में लागू किया गया था। इसके लागू होने के बाद केंद्र और राज्यों के 17 अलग-अलग करों और 13 उपकरों को समाप्त कर एकीकृत अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू की गई। इसका उद्देश्य 'एक राष्ट्र, एक कर' की अवधारणा के तहत पूरे देश में एक समान राष्ट्रीय बाजार तैयार करना था।
मंत्रालय ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में जीएसटी व्यवस्था तकनीक आधारित और डेटा आधारित कर प्रशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ी है। अब एआई, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स के जरिए जोखिम वाले मामलों की पहचान की जाती है। इन तकनीकों से आंकड़ों का विश्लेषण कर संभावित कर चोरी का समय रहते पता लगाया जा रहा है, जिससे कर प्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन रही है।
(इनपुट-भाषा)
