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एथेनॉल पेट्रोल को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, सरकार ने कहा- ब्लेंडिंग प्रोग्राम वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि देश में लागू किया गया एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम पूरी तरह वैज्ञानिक परीक्षणों और तकनीकी मानकों पर आधारित है। मंत्रालय के अनुसार इस कार्यक्रम की नियमित रूप से निगरानी की जाती है।

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सरकार ने सोशल मीडिया के भ्रामक दावों पर भरोसा न करने की अपील की है।

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol-EBP) को लेकर प्रसारित किए जा रहे भ्रामक और निराधार दावों पर चिंता जताई है। सरकार का कहना है कि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से लोगों में भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए पुराने फोटो और वीडियो दोबारा शेयर किए जा रहे हैं, ताकि सनसनी फैलाकर अधिक से अधिक लोगों का ध्यान आकर्षित किया जा सके और एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर अनावश्यक आशंकाएं पैदा की जा सकें।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि देश में लागू किया गया एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम पूरी तरह वैज्ञानिक परीक्षणों और तकनीकी मानकों पर आधारित है। मंत्रालय के अनुसार इस कार्यक्रम की नियमित रूप से निगरानी की जाती है और इसके क्रियान्वयन की समीक्षा विभिन्न संबंधित पक्षों के साथ लगातार की जाती है।

2003 में शुरू हुई थी एथेनॉल ब्लेंडिंग

मंत्रालय ने बताया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम की शुरुआत वर्ष 2003 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। सरकार के अनुसार इस कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया, जिसमें तकनीकी तैयारियों और सभी हितधारकों से परामर्श को प्राथमिकता दी गई।

सरकार ने कहा कि वर्ष 2023 से देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) की शुरुआत की गई है। मंत्रालय का दावा है कि इस स्तर तक पहुंचने से पहले आवश्यक परीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और विभिन्न एजेंसियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

सरकार की नागरिकों से अपील

मंत्रालय के अनुसार एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के प्रभावी संचालन और निगरानी के लिए तेल विपणन कंपनियों (Oil Marketing Companies), ऑटोमोबाइल निर्माताओं, ईंधन परीक्षण एजेंसियों तथा अन्य संबंधित हितधारकों के साथ नियमित समन्वय किया जाता है। सरकार का कहना है कि कार्यक्रम के प्रत्येक चरण की समीक्षा वैज्ञानिक और तकनीकी मानकों के आधार पर की जाती है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले भ्रामक दावों, पुराने वीडियो और अपुष्ट जानकारियों पर भरोसा करने के बजाय केवल आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही विश्वास करें।

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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