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Gensol-BluSmart Scam: सेबी के बाद अब सरकार की नजर, क्या Gensol घोटाले में होगी गिरफ्तारी? धोनी-दीपिका सहित इन सेलिब्रेटी का निवेश दांव पर

Gensol BluSmart scam: SEBI की कार्रवाई के बाद अब Gensol Engineering और BluSmart की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। 262 करोड़ रुपये के फंड डायवर्जन की आशंका पर कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय जांच की तैयारी कर रहा है। सरकारी लोन से खरीदी जाने वाली EVs में गड़बड़ी सामने आई है।

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जांच के घेरे में EV कंपनी! Gensol पर है फंड चोरी और फर्जीवाड़े का आरोप

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल
KEY HIGHLIGHTS
  • Gensol को ₹663 करोड़ EV खरीद के लिए मिले, पर खरीदी सिर्फ 4,704 गाड़ियाँ
  • ₹262 करोड़ की राशि का हिसाब नहीं — ब्लू स्मार्ट को लीज पर दी गई थीं गाड़ियाँ
  • SEBI ने प्रमोटर्स को बैन किया, अब मंत्रालय जांच के लिए जुटा सबूत

SEBI action on Gensol: Gensol Engineering और इससे जुड़ी ब्लू स्मार्ट (BluSmart) कंपनी के खिलाफ कॉर्पोरेट गवर्नेंस उल्लंघनों की आशंका को लेकर कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) जल्द जांच शुरू कर सकता है। मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि मंत्रालय सार्वजनिक डोमेन में मौजूद सामग्री और मिली कुछ गोपनीय जानकारी की प्रारंभिक समीक्षा कर रहा है। हाल ही में SEBI ने कंपनी के प्रमोटर्स अनमोल और पुनीत जग्गी को स्टॉक मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया था। उन पर फंड डायवर्जन और दस्तावेजों की फर्जीवाड़ा का आरोप लगा है। इसके तुरंत बाद ब्लू स्मार्ट ने भारत में अपने EV राइड-हेलिंग ऑपरेशन बंद करने शुरू कर दिए।

मंत्रालय क्या जांचेगा?

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय यह जांच करेगा कि क्या प्रमोटर्स ने टर्म लोन का उपयोग अपने निजी खर्चों (जैसे लग्ज़री अपार्टमेंट, रिश्तेदारों को ट्रांसफर, या निजी संस्थानों में निवेश) में किया है।

क्या है पूरा मामला?

Gensol ने Indian Renewable Energy Development Agency (IREDA) और Power Finance Corporation (PFC) से कुल ₹977.75 करोड़ के टर्म लोन लिए थे। इनमें से ₹663.89 करोड़ 6,400 इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की खरीद के लिए था, जिन्हें ब्लू स्मार्ट को लीज पर देना था।

लेकिन अब सामने आया है कि Gensol ने अभी तक केवल 4,704 EVs ही खरीदे हैं, जिसकी पुष्टि EV सप्लायर Go-Auto ने की है। इस आधार पर करीब ₹262.13 करोड़ का हिसाब नहीं मिल पा रहा, जो अब जांच के घेरे में है।

कॉर्पोरेट गवर्नेंस उल्लंघनों की जांच के लिए मंत्रालय को Companies Act 2013 के तहत अधिकार है। अगर गड़बड़ी बड़ी पाई जाती है, तो मामला Serious Fraud Investigation Office (SFIO) को सौंपा जा सकता है।

इस मामले में अगले 15 दिनों में मंत्रालय की ओर से जांच का आदेश आ सकता है। अगर फंड डायवर्जन की पुष्टि होती है, तो यह मामला एक बड़े कॉर्पोरेट घोटाले का रूप ले सकता है।

मीडिया की कई रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दीपिका पादुकोण, संजीव बजाज, महेंद्र सिंह धोनी और अशनीर ग्रोवर समेत कई दिग्गजों ने ब्लूस्मार्ट में पैसा लगाया है।

Ashish Kushwaha
आशीष कुशवाहाauthor

<p>आशीष कुमार कुशवाहा Timesnowhindi.com में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। वह 2023 से Timesnowhindi.com के साथ जुड़े हैं। वह यहां शेयर बाजार, स्टॉक्स, IPO, पर्सनल फाइनेंस, बिजनेस न्यूज, कंपनी डेवलपमेंट, सक्सेस स्टोरी, यूटिलिटी, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और गैजेट से जुड़ी स्टोरी पर काम करते हैं। उनके पास पिछले 3 साल के भारतीय बजट को भी कवर करने का एक्सपीरियंस है। उनके पास ऑटो एक्सपो 2023 को कवर करने का अनुभव है। इसके अलावा ग्राउंड की स्टोरी और रिसर्च बेस्ड स्टोरी करने में विशेष रुचि रखते हैं। उनके पास डिजिटल मीडिया में कुल 3 साल से ज्यादा का एक्सपीरियंस है। इससे पहले इन्होंने वन इंडिया, दैनिक भास्कर डिजिटल में काम किया है। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वहीं ग्रेजुएशन की पढ़ाई रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से मास कम्यूनिकेशन में की है। उन्हें शुरू से ही डिबेट करने, सामाजिक मुद्दों पर बात करने और शेयर बाजार में रुचि थी। उन्हें बचपन से ही अखबार के संपादकीय पेज और न्यूज पढ़ने का सौख था। स्कूल के समय उन्होंने कई क्विज कंपटीशन में भी हिस्सा लिया और प्राइज जीते हैं।</p>

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