Adani US Case : अमेरिकी कोर्ट से क्रिमिनल केस खारिज होने के बाद Adani Group के चेयरमैन गौतम अडानी ने फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मुश्किल दौर में उनका और उनके परिवार का सत्य, निष्पक्षता और कानून के राज पर भरोसा कायम रहा। अमेरिकी जिला जज निकोलस गराफिस ने 10 अगस्त को गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ चल रहे क्रिमिनल केस को खारिज करने की मंजूरी दी है।
गौतम अडानी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह अमेरिकी कोर्ट के फैसले का विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वागत करते हैं। उन्होंने उन लोगों का भी आभार जताया, जिन्होंने इस मुश्किल समय में उन पर, व्यवस्था पर और भारत की न्याय व्यवस्था की क्षमता पर भरोसा बनाए रखा। अडानी ने कहा कि उनका फोकस आगे भी देश के लिए निर्माण करने, वैल्यू तैयार करने और अपने उद्देश्य के लिए प्रतिबद्ध रहने पर रहेगा।
यह मामला नवंबर 2024 में अमेरिकी अभियोजकों की ओर से लगाए गए आरोपों से जुड़ा था। अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए कथित रिश्वत के आरोप लगाए और कहा कि इससे जुड़े तथ्यों को अमेरिकी निवेशकों से छिपाया गया। अडानी समूह और संबंधित लोगों ने इन आरोपों का खंडन किया था। बाद में अमेरिकी न्याय विभाग ने इस केस को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया।
अडानी ने क्या कहा?
गौतम अडानी ने अपने संदेश में कहा कि वह अमेरिकी कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति उनका सम्मान कायम है। उन्होंने कहा कि मुश्किल दौर के दौरान सत्य, निष्पक्षता और कानून के राज में उनका भरोसा कभी नहीं डगमगाया। उन्होंने उन लोगों के प्रति आभार जताया जिन्होंने उन पर भरोसा बनाए रखा। अडानी ने यह भी कहा कि आगे उनका ध्यान देश के लिए निर्माण करने, ऐसी वैल्यू तैयार करने जो लंबे समय तक कायम रहे और अपने उद्देश्य से जुड़े रहने पर होगा।
US कोर्ट में क्या हुआ?
10 अगस्त को अमेरिकी जिला जज निकोलस गराफिस ने न्याय विभाग को केस खारिज करने की अनुमति दी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जज ने यह भी कहा कि अमेरिकी न्याय विभाग के फैसले में अडानी समूह की अमेरिका में प्रस्तावित निवेश योजना की भूमिका नहीं थी। हालांकि, जज ने न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारी आर. ट्रेंट मैकॉट्टर की केस वापस लेने की प्रक्रिया को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की। रिपोर्ट के मुताबिक, जज ने इस प्रक्रिया में जांचकर्ताओं और अभियोजकों की राय को पर्याप्त महत्व नहीं दिए जाने पर सवाल उठाए। इसका मतलब यह है कि क्रिमिनल आरोप अब खारिज हो गए हैं, लेकिन कोर्ट के आदेश में न्याय विभाग के फैसले की प्रक्रिया पर सवाल भी मौजूद हैं।
DOJ ने क्या कहा?
4 जुलाई को अमेरिकी न्याय विभाग ने कोर्ट में विस्तृत जवाब दाखिल किया था। इसमें DOJ ने कहा था कि यह केस मुख्य रूप से भारत से जुड़ा था और अमेरिका में इसे चलाने की कानूनी जरूरत और व्यावहारिक आधार कमजोर था। DOJ का तर्क था कि कथित गतिविधियां भारत में हुईं, कथित रिश्वत भारतीय अधिकारियों से जुड़ी थी और कॉन्ट्रैक्ट भी भारत में बिजली से संबंधित थे।
विभाग ने यह भी कहा कि ऐसे मामले में अमेरिका की ओर से दखल देना कूटनीतिक तनाव पैदा कर सकता है और अमेरिकी संसाधनों का इस्तेमाल ऐसे मामले में हो सकता है जिसे भारत बेहतर तरीके से संभाल सकता है। DOJ ने सिक्योरिटीज फ्रॉड से जुड़े आरोपों के कानूनी आधार पर भी सवाल उठाए और कहा कि ये आरोप अमेरिकी कानून के तहत पर्याप्त मजबूत आधार पर नहीं टिकते।
Adani Group के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
अमेरिकी क्रिमिनल केस ने समूह की ग्लोबल कॉरपोरेट छवि और निवेशकों के सेंटीमेंट पर काफी असर डाला था। अब क्रिमिनल केस के खारिज होने से उस मोर्चे पर कानूनी अनिश्चितता कम हुई है। हालांकि, निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अमेरिकी कोर्ट के फैसले में DOJ की प्रक्रिया को लेकर टिप्पणियां हैं और इससे जुड़े अलग सिविल मामले की स्थिति अलग है। इसलिए बाजार के नजरिए से सबसे बड़ा सवाल अब यह होगा कि इस फैसले का Adani Group की कंपनियों के शेयरों, ग्लोबल फंडिंग और अमेरिका में समूह की विस्तार योजनाओं पर कितना असर पड़ता है।
