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7 ऐसी सरकारी स्कीम्स जिनका पैसा लेना भूल जाते हैं करोड़ों भारतीय! क्या आपने भी छोड़ दिया अपना 'फ्री' हक?

भारत सरकार नागरिकों के हित के लिए कई तरह की योजनाएं लाती रहती है लेकिन कई बार लोग जानकारी न होने के कारण अपने हक़ को भूल जाते हैं। अगर आप भी सरकार की उन स्कीमों से अनजान हैं जो आपको फ्री में फायदा दे रही हैं तो आइए जानते हैं उनके बारे में।

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7 Free Government Benefits

भारत एक ऐसा देश है, जहां सरकार आम आदमी के जीवन को सुगम बनाने और उसकी जेब का बोझ कम करने के लिए हर साल अरबों रुपये खर्च करती है। लेकिन विडंबना यह है कि जागरूकता के अभाव में करोड़ों लोग इन बड़े फायदों से वंचित रह जाते हैं। जहां कुछ लोग इसे 'पेचीदा सरकारी कागजी कार्रवाई' मानकर टाल देते हैं, वहीं कइयों को तो यह भी नहीं पता होता कि वे इन योजनाओं के असली हकदार हैं। इसीलिए, आज हम आपको उन 7 बेहतरीन सरकारी स्कीमों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो न केवल आपके घर का बजट संभाल सकती हैं, बल्कि आपके बच्चों के भविष्य की तस्वीर भी बदल सकती हैं।

यही नहीं ये सभी 7 सरकारी स्कीमें फ्री में आपको फायदा देती हैं यानी इसके लिए सरकार आपसे एक फूटी कौड़ी नहीं लेती है फिर भी करोड़ों भारतीय अपने इस हक़ को भूल जाते हैं.

7 फ्री वाली सरकारी स्कीमें

आयुष्मान भारत योजना

सबसे पहले बात करते हैं आयुष्मान भारत (PM-JAY) योजना की। यह दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है, जो प्रति परिवार ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज प्रदान करती है। चौंकाने वाली बात यह है कि देश की एक बड़ी आबादी आज भी निजी अस्पतालों में कर्जा लेकर इलाज करा रही है, जबकि उनका 'आयुष्मान कार्ड' बन सकता है।

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना

इसी तरह, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) जैसी स्कीम्स महज ₹436 और ₹20 के सालाना प्रीमियम पर लाखों का जीवन और दुर्घटना बीमा देती हैं। अक्सर लोग बैंक में इनके फॉर्म तो भर देते हैं, लेकिन क्लेम की प्रक्रिया न जानने की वजह से मुसीबत के समय इनका लाभ नहीं उठा पाते।

अटल पेंशन योजना

तीसरी महत्वपूर्ण कड़ी है अटल पेंशन योजना (APY) और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों, रेहड़ी-पटरी वालों और घरेलू सहायकों के लिए ये योजनाएं बुढ़ापे की लाठी हैं। इसमें थोड़े से निवेश पर सरकार 60 साल की उम्र के बाद ₹1,000 से ₹5,000 तक की गारंटीड पेंशन देती है। वहीं, महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना एक वरदान की तरह है, जिसमें पहली बार मां बनने पर सरकार पोषण के लिए ₹5,000 की आर्थिक सहायता देती है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कई महिलाएं जानकारी के अभाव में इस मदद से वंचित रह जाती हैं।

उज्ज्वला योजना

उज्ज्वला योजना के तहत न केवल मुफ्त गैस कनेक्शन मिलता है, बल्कि समय-समय पर सब्सिडी का लाभ भी दिया जाता है।

पीएम स्वनिधि

वहीं, 'पीएम स्वनिधि' छोटे दुकानदारों को बिना किसी गारंटी के ₹10,000 से लेकर ₹50,000 तक का लोन देती है। कई छोटे व्यापारी साहूकारों के चक्कर में फंसकर भारी ब्याज देते हैं, जबकि सरकार उन्हें डिजिटल लेनदेन पर कैशबैक और ब्याज में छूट के साथ यह पैसा दे रही है।

प्रधानमंत्री आवास योजना

प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) और सुकन्या समृद्धि योजना का जिक्र करना जरूरी है। आवास योजना के तहत घर बनाने या खरीदने पर मिलने वाली लाखों रुपये की सब्सिडी आज भी कई मध्यमवर्गीय परिवारों की पहुंच से बाहर है क्योंकि वे सही आवेदन प्रक्रिया नहीं जानते। वहीं, बेटियों के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना बैंक एफडी (FD) से कहीं बेहतर रिटर्न और टैक्स छूट देती है। अगर आप भी इन 7 योजनाओं की चेकलिस्ट में पीछे हैं, तो आज ही अपनी पात्रता जांचें। याद रखें, ये कोई 'खैरात' नहीं, बल्कि एक नागरिक के तौर पर आपका 'हक' है, जिसे सरकार ने आपकी सुरक्षा के लिए बनाया है।

NSP

हजारों छात्र केवल पैसे की कमी के कारण पढ़ाई छोड़ देते हैं, जबकि NSP पोर्टल पर 100 से ज्यादा छात्रवृत्तियां उपलब्ध हैं. स्कूल से लेकर पीएचडी तक के छात्र, खासकर अल्पसंख्यक, दलित और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्र यहां से सालाना लाखों रुपये की मदद पा सकते हैं. हालांकि बस आपको समय पर ऑनलाइन अप्लाई करना होता है.

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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