2014 के बाद से भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास हुआ है। रिकॉर्ड स्पीड में रोड, रेल, इंटरने और बिजली जैसी तमाम परियोजनाओं के साथ ही इस दौरान कई ऐसे मेगा प्रोजेक्ट्स भी पूरे हुए हैं, जो कई दशकों से अटके पड़े थे। कहीं, कानूनी अड़चनें थीं, तो कहीं इंजीनियरिंग और बजट की मुश्किलें थीं। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल में चेनाब ब्रिज से अटल टनल, अटल सेतु, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और बोगीबील ब्रिज और जोजिला टनल जैसे कई ऐसे मेगा-प्रोजेक्ट्स पूरे हुए हैं, जिन्हें देखकर दुनिया हैरान रह गई।
भारत में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के अतीत में झांककर देखें, तो अक्सर इस तस्वीर में भारत के इंजीनियरिंग गौरव और सत्ता के संकल्प से ज्यादा लेटलतीफी, लागत वृद्धि और कानूनी पचड़ों के छींटें ज्यादा नजर आते हैं। कई परियोजनाएं ऐसी रही हैं, जिन्हें कभी तकनीकी, तो कभी भौगोलिक और राजनीतिक चुनौतियों के चलते पूरा कर पाना असंभव माना जाने लगा था। लेकिन, PM Modi के कार्यकाल में पिछले एक दशक में देश ने कुछ ऐसे इंजीनियरिंग चमत्कार देखे, जिन्होंने न केवल भारत की निर्माण क्षमता को वैश्विक पहचान दिलाई बल्कि रणनीतिक, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी बड़ा बदलाव किया। इसके साथ ही भारत के पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर बनी लेटलतीफी वाली पहचान को भी बदला।
10 साल में कैसे बदली पूरी पहचान
2014 से 2026 के दौरान 12 वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर को देश के विकास का इंजन बनाया है। इसके लिए PM गति शक्ति जैसी इंटीग्रेटेड डवलपमेंट योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसकी वजह से पहले जिन योजनाओं को अलग-अलग मंत्रालयों की मंजूरी मिलने में कई साल लग जाते थे अब प्रगति मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिये रियल टाइम में ट्रैक करते हुए तेजी से पूरा किया जा रहा है। नतीजतन रेलवे, सड़क, विमानन और शहरी परिवहन जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम पूरे हुए हैं। इस दौरान देश का मेट्रो नेटवर्क 4 गुना से बढ़ा है। रेलवे ट्रैक का 99.6 फीसदी इलेक्ट्रिफिकेशन हो चुका है। देश में हवाई अड्डों की संख्या भी दोगुनी हो गई।
चेनाब ब्रिज : हिमालय की छाती पर संकल्प का हस्ताक्षर
जम्मू-कश्मीर में बना चेनाब ब्रिज दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है। नदी तल से इसकी ऊंचाई करीब 359 मीटर है, जो एफिल टॉवर से भी ज्यादा है। यह पुल कई मायनों में हिमालय की छाती पर संकल्प का इस्ताक्षर है, जिसे इंजीनियरिंग कौशल की स्याही से उकेरा गया है। इसे 266 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं और 8.0 तीव्रता तक के भूकंपों को झेलने के लिए डिजाइन किया गया है। यह कश्मीर घाटी को भारतीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
अटल टनल : पहाड़ों के भीतर इंजीनियरिंग का करिश्मा
हिमाचल प्रदेश की अटल टनल आज रणनीतिक और आर्थिक नजरिये से बेहद अहम रास्ता है। 9.02 किलोमीटर लंबी यह सुरंग असल में रोहतांग दर्रे के नीचे से गुजरती हुए मनाली से लेह के बीच दूरी को इतनी कम कर देती है कि पहले बेहद मुश्किल लगने वाली यह यात्रा अब शहर में घूमने जैसी आसान हो गई है। जब यह सुरंग बन रही थी, तो इंजीनियरों को सेरी नाला फॉल्ट जोन जैसी चुनौती का सामना करना पड़ा, जहां पानी और कीचड़ का रिसाव शुरू हो गया था। लेकिन, आखिर में इसे पूरा किया गया।
अटल सेतु : समंदर पर लिखी इबारत
मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक, जिसे अटल सेतु भी कहा जाता है। यह भारत का सबसे लंबा समुद्री पुल है। करीब 22 किलोमीटर लंबा यह पुल देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के दो छोरों को समंदर को चीरकर जोड़ता है। इसकी वजह से मुंबई और नवी मुंबई के बीच पहले लगने वाला घंटों का समय अब महज कुछ मिनटों में पूरा हो जाता है। अटल सेतु पिछले कई दशकों से अटका रहा। लेकिन, आखिर में मोदी सरकार ने इसे पूरा करने का संकल्प दिखाया।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ने दी नई पहचान
गुजरात में स्थित 182 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित यह स्मारक केवल एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग का उदाहरण भी है। इसके डिजाइन की सबसे बड़ी चुनौती इसकी ऊंचाई और पतले आधार का संतुलन था। इंजीनियरों ने विशाल कंक्रीट कोर और विशेष संरचनात्मक तकनीकों के जरिए इसे मजबूत बनाया। हालांकि परियोजना आदिवासी भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर विवादों में भी रही। इसके बावजूद यह भारत के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल हो चुकी है और करोड़ों पर्यटकों को आकर्षित कर चुकी है।
बोगीबील ब्रिज : पूर्वोत्तर को जोड़ने वाला रणनीतिक सेतु
असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बना बोगीबील ब्रिज भारत का सबसे लंबा रेल-सह-सड़क पुल है। इसकी परिकल्पना 1980 के दशक में हुई थी, लेकिन वित्तीय और प्रशासनिक कारणों से परियोजना लंबे समय तक लटकी रही। करीब दो दशक की देरी के बाद यह पुल तैयार हुआ। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह भारत का पहला पूर्ण रूप से वेल्डेड स्टील ट्रस ब्रिज है। इसने असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच दूरी और यात्रा समय को काफी कम किया है। साथ ही चीन सीमा के पास सैन्य लॉजिस्टिक्स को भी मजबूत बनाया है।
जोजिला टनल ने रचा इतिहास
हाल में ही जोजिला टनल भी बनकर तैयार हुई है। यह दुनिया की सबसे लंबी बाय-डायरेक्शनल सिंगल ट्यूब टनल है। इसकी मदद से 2 घंटे में होने वाला सफर करीब 30 मिनट में पूरा हो जाएगा। इसके अलावा इसकी वजह से कश्मीर और लद्दाख के बीच अब 12 महीने आसानी से आवाजाही हो पाएगी।
