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₹3 लाख 5 साल के लिए: FD या RD, जानें दोनों में कौन है सही विकल्प?

अगर आप सुरक्षित और फिक्स्ड रिटर्न वाले निवेश विकल्प ढूंढ रहे हैं, तो FD और RD दोनों अच्छे विकल्प माने जाते हैं। लेकिन सवाल ये है कि 3 लाख रुपये को 5 साल के लिए कहां लगाएं एकमुश्त FD में या हर महीने RD में? दोनों स्कीमें सुरक्षित हैं, लेकिन रिटर्न में फर्क होता है। आइए जानते हैं कहां आपको बेहतर रिटर्न मिलेगा?

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FD Vs RD

अगर आप भी निवेश के लिए बेहतर विकल्प तलाश रहे हैं जिसमे आपको फिक्स्ड और सुरक्षित रिटर्न मिले तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। वैसे तो आमतौर पर बैंक में पैसा सुरक्षित तरीके से बढ़ाने के लिए लोग अक्सर FD और RD में से चुनते हैं। दोनों ही स्कीमें भरोसेमंद मानी जाती हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका और रिटर्न में फर्क होता है। खासकर जब बात 5 साल के लिए निवेश करने की हो, तो आइए आपको बताते हैं अगर आपको 3 लाख रुपए 5 साल के लिए निवेश करने हैं तो कौन सा तरीका आपके लिए सही रहेगा?

FD कैसे करती है काम?

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में आप पूरी राशि एक साथ बैंक में जमा करते हैं। इसके बाद यह रकम पूरे समय तक ब्याज कमाती रहती है। इसलिए FD में ब्याज की कमाई ज्यादा होती है क्योंकि पूरा पैसा शुरुआत से ही काम करता है।

RD से कैसे होती है कमाई?

रेकरिंग डिपॉजिट (RD) में आप हर महीने एक निश्चित रकम जमा करते हैं। यानी ₹3 लाख को RD में लगाने का मतलब है 5 साल यानी 60 महीनों तक किस्तों में जमा करना। यहां हर किस्त अलग-अलग समय से ब्याज कमाना शुरू करती है, इसलिए कुल रिटर्न FD के मुकाबले थोड़ा कम आता है। RD उनके लिए बेहतर है जो एक बार में बड़ी रकम नहीं लगा सकते और हर महीने बचत की आदत रखना चाहते हैं।

दोनों का कैलकुलेशन समझें

सबसे पहले बात करते हैं FD की। इसमें आप पूरा पैसा एक बार में जमा कर देते हैं और बैंक उस रकम पर पूरे समय के लिए ब्याज देता है। जैसे अगर आप ₹3 लाख को 5 साल के लिए 7% ब्याज दर पर FD कराते हैं, तो मैच्योरिटी पर आपको लगभग ₹4,25,288 मिलेंगे। यानी कुल करीब ₹1,25,288 का ब्याज। चूंकि पूरा पैसा शुरू से ही बैंक में रहता है, इसलिए ब्याज ज्यादा मिलता है।

अब बात करते हैं RD की। इसमें हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा किया जाता है, जैसे ₹5,000 हर महीने 60 महीनों तक। इसी हिसाब से कुल ₹3 लाख जमा होंगे। लेकिन चूंकि हर किस्त अलग-अलग समय तक बैंक में रहती है, इसलिए ब्याज FD के मुकाबले कम बनता है। 7% दर पर RD करने पर पांच साल बाद मैच्योरिटी राशि होगी करीब ₹3,60,053। यानी कुल ब्याज करीब ₹60,053।

दोनों पर कैसे लगेगा टैक्स?

टैक्स के मामले में भी दोनों पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है। अगर ब्याज अंक तय लिमिट से ज्यादा हो जाता है, तो बैंक TDS भी काट सकता है। यानी अधिक ब्याज का मतलब टैक्स की देनदारी भी थोड़ी बढ़ सकती है।

सीधा सा निष्कर्ष यह है अगर आपके पास पहले से ₹3 लाख मौजूद हैं, तो FD बेहतर विकल्प साबित होगा क्योंकि इससे ज्यादा ब्याज मिलेगा। लेकिन अगर आप हर महीने बचत करके फंड बनाना चाहते हैं, तो RD चुनें। दोनों ही स्कीमें सुरक्षित हैं, बस आपके निवेश करने के तरीके के अनुसार इनका फायदा तय होता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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