Doctor assault case: उन्हें कुछ समय और अंदर ही रहने दीजिए," बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को यह टिप्पणी करते हुए शिवसेना कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे की जमानत पर लगी रोक को बरकरार रखा। म्हात्रे पर डोंबिवली के एक नगर पालिका अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ के साथ मारपीट करने का आरोप है। इसके साथ ही कोर्ट ने 6 जुलाई को हुई इस घटना और गिरफ्तारी के बाद अस्पताल में म्हात्रे के रहने के दौरान की सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।
म्हात्रे ने हाई कोर्ट में 73 साल उम्र का दिया हवाला
जमानत पर रोक लगने के बाद रविवार को आत्मसमर्पण करने वाले म्हात्रे ने हाई कोर्ट में दलील दी थी कि वह 73 वर्ष के बुजुर्ग हैं, कई बीमारियों से पीड़ित हैं और पुलिस को उनकी हिरासत की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम आंखड़ की पीठ ने कहा कि कथित मारपीट के वीडियो में म्हात्रे 25 साल के युवक की तरह व्यवहार करते दिख रहे हैं। मजिस्ट्रेट कोर्ट के जमानत आदेश पर रोक जारी रखते हुए हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई तय की है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के नेता म्हात्रे को मजिस्ट्रेट कोर्ट से जमानत मिल गई थी, जिसके बाद पिछले हफ्ते हाई कोर्ट ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जमानत आदेश पर रोक लगा दी थी।
"73 साल के बुजुर्ग, लेकिन हरकतें 25 साल के युवक जैसी"
बचाव पक्ष की दलील: बुधवार को आरोपी के वकील सना खान ने दलील दी कि कॉर्पोरेटर 73 साल के हैं और उनकी केवल एक ही किडनी काम कर रही है। उन्होंने कहा, उनकी हिरासत की जरूरत नहीं है। अस्पताल में स्थिति काफी भावुक करने वाली थी, मरीज की जान जा सकती थी और म्हात्रे वहां सिर्फ मदद के इरादे से गए थे।
कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि घटना के वीडियो में वह 25 साल के युवक की तरह डॉक्टरों को पीट रहे हैं। म्हात्रे खुद को सोशल वर्कर बताते हैं, तो उन्हें लोगों को पीटने के बजाय उनकी मदद करनी चाहिए। कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा, उन्हें कुछ समय और अंदर ही रहने दीजिए।
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश
पीठ ने ठाणे जिले के डोंबिवली स्थित नगर पालिका के शास्त्री नगर अस्पताल को निर्देश दिया कि वे कथित मारपीट की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखें ताकि कोर्ट उसे देख सके। इसके अलावा, गिरफ्तारी के तुरंत बाद 'सीने में दर्द' की शिकायत के चलते म्हात्रे को ठाणे के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, कोर्ट ने वहां की सीसीटीवी फुटेज को भी सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की मांग
अदालत ने डॉक्टरों के समर्थन में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की याचिका पर भी सुनवाई की। आईएमए की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एस. यू. कामदार ने कहा कि डॉक्टरों या अस्पताल स्टाफ पर हमले के मामलों में 6 घंटे के भीतर संस्थागत प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए, जबकि इस मामले में म्हात्रे के खिलाफ अगले दिन एफआईआर दर्ज की गई। पीठ ने अस्पताल का संचालन करने वाले कल्याण डोंबिवली नगर निगम (KDMC) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
पुलिस के रवैये पर कोर्ट की नाराजगी
हाई कोर्ट ने पुलिस के उस फैसले पर भी कड़ी नाराजगी जताई, जिसमें अस्पताल में भर्ती होने के कारण म्हात्रे को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की अनुमति मांगी गई थी। अदालत ने कहा, हम जानना चाहते हैं कि वह कौन सा पुलिस अधिकारी था जिसने वीसी के जरिए पेश करने की इजाजत मांगी? उस अधिकारी ने आरोपी की पेशी के लिए अपना ही अलग तरीका निकाल लिया है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर संबंधित पुलिस कमिश्नर को भी तलब किया जा सकता है।
वीआईपी ट्रीटमेंट बिल्कुल न दें
हालांकि, एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने स्पष्ट किया कि अधिकारी ने अनुमति इसलिए मांगी थी क्योंकि म्हात्रे पुलिस स्टेशन में गिर पड़े थे और हाई ब्लड प्रेशर के कारण अस्पताल में भर्ती थे। लेकिन मजिस्ट्रेट ने इसकी अनुमति नहीं दी, इसलिए उन्हें शारीरिक रूप से कोर्ट में पेश किया गया। इस पर जजों ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि कोर्ट में तो उनका खुद का ब्लड प्रेशर हमेशा हाई रहता है। एक्टिंग चीफ जस्टिस घुगे ने सख्त लहजे में कहा, हम पुलिस से लोगों और कानून का पालन करने वाले नागरिकों की रक्षा करने की उम्मीद करते हैं। हम ऐसी स्थिति नहीं चाहते जहां पुलिस आरोपियों को वीआईपी ट्रीटमेंट दे।
क्या है पूरा मामला?
बीते 6 जुलाई को शास्त्री नगर अस्पताल में एक नवजात बच्चे को दूसरे अस्पताल में रेफर करने की सलाह दिए जाने के बाद, म्हात्रे और उनके सहयोगियों ने कथित तौर पर एक पुरुष डॉक्टर के साथ मारपीट की थी। उन्होंने एक महिला डॉक्टर के हाथ पर भी चोट पहुंचाई थी। इस मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भारी आक्रोश फैल गया था। अदालत ने बीते शनिवार को इस मामले के चार अन्य सह-आरोपियों की जमानत भी रद्द कर दी थी।
