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मुसीबत के समय काम आएगा 3-6-9 का जादुई फॉर्मूला! जानें कैसे तैयार करें अपना इमरजेंसी फंड

3-6-9 Emergency Fund Rule: फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हर व्यक्ति के पास मुसीबत के समय के लिए एक इमरजेंसी फंड होना चाहिए। हालांकि, अक्सर लोग इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि उन्हें कितनी बचत करनी चाहिए।

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Emergency Fund Rule (Photo: istock)

3-6-9 Emergency Fund Rule: आज के समय में नौकरी की अनिश्चितता, बढ़ते मेडिकल खर्च और महंगाई के बीच Emergency Fund की अहमियत काफी बढ़ गई है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हर व्यक्ति के पास ऐसा अलग फंड होना चाहिए, जो अचानक आने वाले खर्चों या आय बंद होने की स्थिति में मदद कर सके। इमरजेंसी फंड को लेकर ही 3-6-9 नियम काम आता है। यह नियम बताता है कि किसी व्यक्ति को अपनी जरूरत और जोखिम के हिसाब से कितने महीनों के खर्च जितनी बचत रखनी चाहिए।

क्या है 3-6-9 नियम

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति की नौकरी स्थिर है, वह अकेला है और उस पर ज्यादा जिम्मेदारियां नहीं हैं, तो उसके लिए कम से कम 3 महीने के जरूरी खर्च जितना इमरजेंसी फंड रखना सही माना जाता है। यह बेसिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और अचानक नौकरी जाने या मेडिकल खर्च आने पर मदद कर सकता है।

वहीं जिन लोगों पर परिवार की जिम्मेदारी है, EMI चल रही है या बच्चों की पढ़ाई जैसे खर्च हैं, उनके लिए 6 महीने के खर्च जितना इमरजेंसी फंड बेहतर माना जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह ज्यादातर कामकाजी परिवारों के लिए सही संतुलन होता है। इससे नौकरी जाने या कुछ महीनों तक आय प्रभावित होने पर भी जरूरी खर्च आसानी से पूरे किए जा सकते हैं।

फ्रीलांसर, बिजनेस करने वाले या अनियमित आय वाले लोगों के लिए 9 से 12 महीने तक के खर्च जितनी बचत रखने की सलाह दी जाती है। ऐसे लोगों की आय हर महीने तय नहीं होती, इसलिए उन्हें ज्यादा मजबूत सुरक्षा फंड की जरूरत पड़ सकती है। खासतौर पर अगर परिवार पूरी तरह एक ही व्यक्ति की आय पर निर्भर हो, तो बड़ा Emergency Fund काफी जरूरी माना जाता है।

इस फंड का उद्देश्य ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं

इसके अलावा, Emergency Fund बनाते समय केवल जरूरी खर्चों को ही शामिल करना चाहिए। इसमें घर का किराया या EMI, राशन, बिजली-पानी का बिल, मेडिकल खर्च, इंश्योरेंस प्रीमियम और बच्चों की फीस जैसी जरूरी चीजें शामिल होती हैं। इसमें छुट्टियां, शॉपिंग या लग्जरी खर्च नहीं जोड़ने चाहिए। इमरजेंसी फंड को ऐसी जगह रखना चाहिए, जहां जरूरत पड़ने पर जल्दी पैसा निकाला जा सके। हाई-इंटरेस्ट सेविंग अकाउंट, स्वीप-इन FD या लिक्विड म्यूचुअल फंड इसके लिए अच्छे विकल्प माने जाते हैं। Emergency Fund का उद्देश्य ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं, बल्कि जरूरत के समय तुरंत पैसा उपलब्ध होना है।

कैसे तैयार करें Emergency Fund

फाइनेंशियल प्लानर्स सलाह देते हैं कि Emergency Fund एक दिन में नहीं बनता। इसके लिए हर महीने छोटी-छोटी बचत शुरू करनी चाहिए। सैलरी आने के बाद ऑटोमैटिक ट्रांसफर सेट कर धीरे-धीरे बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। बोनस या टैक्स रिफंड जैसी अतिरिक्त आय का इस्तेमाल भी इसमें किया जा सकता है। समय-समय पर अपने Emergency Fund की समीक्षा किया जाना भी जरूरी। अगर खर्च बढ़ते हैं, नई जिम्मेदारियां आती हैं या EMI बढ़ती है, तो फंड को भी उसी हिसाब से बढ़ाना चाहिए। सही Emergency Fund न केवल आर्थिक सुरक्षा देता है, बल्कि मुश्किल समय में मानसिक तनाव भी कम करता है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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