बिजनेस

होर्मुज से आता है 20% तेल, तो बाकी 80% कहां से आता है?

ईरान में जंग भड़कने के बाद होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है और इसका असर दुनियाभर में पड़ रहा है। ऐसे में जानते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट के अलावा और कौन-कौन से समुद्री रास्ते हैं जहां से कच्चे तेल की सप्लाई होती है।

Image

iran crude oil

जब भी मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ता है, तो पूरी दुनिया की नजरें 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) पर टिक जाती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल (Crude Oil) इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। लेकिन इसका मतलब यह भी है कि दुनिया का बाकी 80% तेल अन्य रास्तों और माध्यमों से अपनी मंजिल तक पहुंचता है। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा केवल एक रास्ते पर टिकी नहीं है, बल्कि यह कई महत्वपूर्ण समुद्री चोक पॉइंट्स (Choke Points), पाइपलाइनों और जमीनी रास्तों का एक जटिल जाल है। ऐसे में आइए आपको बताते हैं वो रास्ते जो दुनिया की लाइफलाइन हैं.

25% से 30% कच्चा तेल यहां से आता है

हॉर्मुज के बाद दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त समुद्री रास्ता मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) है। हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाला यह रास्ता इंडोनेशिया और मलेशिया के बीच स्थित है। दुनिया का लगभग 25% से 30% कच्चा तेल यहीं से गुजरता है। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े तेल उपभोक्ता अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से मलक्का पर निर्भर हैं। अगर हॉर्मुज तेल के उत्पादन का द्वार है, तो मलक्का एशियाई इकॉनमी के लिए खपत का मुख्य द्वार है। इसके बिना पूर्वी एशिया के कारखाने और परिवहन व्यवस्था ठप हो सकती है।

10% हिस्सा यहां से आता है

इसके बाद नंबर आता है स्वेज नहर (Suez Canal) और सुमेड पाइपलाइन (Sumed Pipeline) का। मिस्र में स्थित यह रास्ता लाल सागर को भूमध्य सागर से जोड़ता है। वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 10% हिस्सा यहीं से गुजरता है। यह रास्ता खाड़ी देशों से यूरोप और उत्तरी अमेरिका तक तेल पहुँचाने का सबसे छोटा मार्ग है। इसके साथ ही, पास में स्थित बाब-अल-मंडेब (Bab-el-Mandeb) एक और महत्वपूर्ण चोक पॉइंट है, जो अदन की खाड़ी और लाल सागर के बीच स्थित है। हाल के समय में हूतियों के हमलों के कारण यह रास्ता काफी चर्चा में रहा है। इन रास्तों के बाधित होने का मतलब है कि जहाजों को पूरे अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाकर 'केप ऑफ गुड होप' से जाना होगा, जिससे तेल की कीमत और समय दोनों बढ़ जाते हैं।

द्रुझबा पाइपलाइन भी है लाइफलाइन

समुद्री रास्तों के अलावा, एक बड़ा हिस्सा पाइपलाइनों के जरिए भी सप्लाई होता है। रूस, जो दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक है, अपनी अधिकांश सप्लाई विशाल पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए यूरोप और चीन को करता है। 'द्रुझबा पाइपलाइन' (Druzhba Pipeline) दुनिया की सबसे लंबी पाइपलाइनों में से एक है, जो रूस के तेल को पूर्वी और मध्य यूरोप तक पहुंचाती है। इसी तरह, मध्य एशिया के देश (जैसे कजाकिस्तान और अज़रबैजान) भी कैस्पियन सागर के रास्ते पाइपलाइनों के जरिए तुर्की और यूरोप को तेल भेजते हैं। अमेरिका और कनाडा के बीच भी हजारों मील लंबी पाइपलाइनें तेल और गैस का निरंतर प्रवाह सुनिश्चित करती हैं।

पश्चिमी गोलार्ध की बात करें तो पनामा नहर (Panama Canal) एक और महत्वपूर्ण कड़ी है, हालांकि यहां से तेल के मुकाबले एलएनजी (LNG) और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों का व्यापार अधिक होता है। इसके साथ ही, कुछ तेल की सप्लाई सीधे रेल और ट्रकों के जरिए भी होती है, विशेषकर उत्तरी अमेरिका के भीतर। लेकिन बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए जहाज (Tankers) ही सबसे बड़ा माध्यम हैं। यही कारण है कि दुनिया के 80% तेल के प्रवाह को बनाए रखने के लिए इन सभी रास्तों का सुरक्षित होना अनिवार्य है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article