कमजोर मानसून के चलते देश में खरीफ फसलों की बुआई में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इतना ही नहीं, देश के 166 प्रमुख जलाशयों में सिर्फ 26% पानी बचा हुआ है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की निगरानी वाले 166 प्रमुख जलाशयों में 25 जून तक कुल 48.405 अरब घन मीटर (बीसीएम) जल उपलब्ध था, जो उनकी पूर्ण भंडारण क्षमता (एफआरएल) का 26.37 प्रतिशत है। पर्याप्त बारिश न होने के कारण बांधों और जलाशयों का जल भंडारण (Water Storage) तेजी से नीचे गिरा है। वर्तमान में दक्षिण और पूर्वी भारत के कई राज्यों में पानी का स्तर चिंताजनक रूप से न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। अगर जुलाई की शुरुआत में मानसूनी हवाएं मजबूत नहीं होती हैं, तो न सिर्फ खरीफ फसलों (जैसे धान, सोयाबीन, दालें) की बुवाई का चक्र गंभीर रूप से पिछड़ जाएगा, बल्कि आने वाले दिनों में कृषि क्षेत्र की लागत बढ़ने और शहरों में पीने के पानी की किल्लत का एक नया संकट खड़ा हो सकता है।
खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ी
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जून के अंत तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई 182.72 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 236.46 लाख हेक्टेयर की तुलना में 23 प्रतिशत कम है। केवल धान ही नहीं, बल्कि दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और कपास की बुवाई भी पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम रही है। आमतौर पर खरीफ फसलों की बुवाई जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ शुरू होती है।
धान का रकबा 25% घटा
आंकड़ों के अनुसार, खरीफ की प्रमुख फसल धान का रकबा 25 जून तक 25.17 प्रतिशत घटकर 25.75 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 34.41 लाख हेक्टेयर था। दलहनों की बुवाई 30.47 प्रतिशत घटकर 14.92 लाख हेक्टेयर रह गई, जो एक वर्ष पहले 21.46 लाख हेक्टेयर थी। वहीं, तिलहनों का रकबा 53.33 प्रतिशत घटकर 16.99 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि पिछले वर्ष यह 36.41 लाख हेक्टेयर था।
दलहनों में तूर/अरहर की बुवाई 3.56 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले वर्ष यह 8.45 लाख हेक्टेयर थी। तिलहनों में मूंगफली का रकबा 15.29 लाख हेक्टेयर से घटकर 8.87 लाख हेक्टेयर और सोयाबीन का रकबा 19.97 लाख हेक्टेयर से घटकर 6.92 लाख हेक्टेयर रह गया। मोटे अनाज का रकबा भी 36.07 लाख हेक्टेयर से घटकर 31.84 लाख हेक्टेयर रह गया। कपास की बुवाई 34.61 प्रतिशत घटकर 29.66 लाख हेक्टेयर रह गई, जबकि पिछले वर्ष यह 45.36 लाख हेक्टेयर थी। हालांकि, गन्ने का रकबा मामूली बढ़कर 57.31 लाख हेक्टेयर हो गया, जो पिछले वर्ष 56.64 लाख हेक्टेयर था। वहीं, पटसन और मेस्ता का रकबा भी बढ़कर 6.25 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 6.13 लाख हेक्टेयर था।
अल नीनो के कारण कम बारिश
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, खरीफ बुवाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दक्षिण-पश्चिम मानसून 24 जून तक सामान्य से 42 प्रतिशत कम रहा। मध्य भारत में 59 प्रतिशत, पूर्व एवं पूर्वोत्तर भारत में 41 प्रतिशत, दक्षिण प्रायद्वीप में 28 प्रतिशत तथा उत्तर-पश्चिम भारत में 22 प्रतिशत कम बारिश हुई। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनी हुई है और जून से सितंबर के मानसून मौसम के दौरान इसके और मजबूत होने की संभावना है।
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