क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल आज के दौर में बहुत आम हो गया है, लेकिन इसके बिलिंग साइकिल (Billing Cycle) और पेनल्टी के नियमों को समझना आज भी कई लोगों के लिए एक पहेली है। अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर ₹20,000 का बिल आया है और उन्होंने ₹19,500 चुका दिए हैं, तो मात्र ₹500 की छोटी सी रकम पर बहुत कम ब्याज लगेगा। लेकिन असलियत इसके बिल्कुल उलट है। क्रेडिट कार्ड की दुनिया में ₹1 की भी चूक आपको भारी नुकसान पहुंचा सकती है। आरबीआई (RBI) के कड़े नियमों के बावजूद, बैंकों के कैलकुलेशन का तरीका ऐसा होता है कि एक छोटी सी गलती आपके बजट को बिगाड़ सकती है। आइए समझते हैं कि अगर आप पूरा बिल नहीं चुकाते, तो बैंक आपसे किस तरह से पैसे वसूलते हैं।
केवल ₹500 पर नहीं, पूरी राशि पर लगता है चार्ज
सबसे बड़ी गलतफहमी जो कार्ड धारकों को होती है, वह यह है कि ब्याज केवल बची हुई राशि यानी ₹500 पर लगेगा। लेकिन हकीकत यह है कि जैसे ही आप बिल का भुगतान 'पूर्ण' (Full Payment) के बजाय 'आंशिक' (Partial Payment) करते हैं, आपका इंटरेस्ट-फ्री पीरियड (Grace Period) खत्म हो जाता है। इसका मतलब है कि अब बैंक आपसे उस पूरे ₹20,000 पर ब्याज वसूलेगा, जो आपने खर्च किए थे, और वह भी उस दिन से जब आपने ट्रांजैक्शन किया था। क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दरें आमतौर पर 3% से 4% प्रति माह (सालाना 36% से 48%) तक होती हैं। यानी ₹500 बचाने के चक्कर में आप हजारों रुपये का ब्याज अनजाने में ही दे बैठते हैं।
लेट फीस का नया आरबीआई नियम
आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बैंक लेट फीस तभी वसूल सकते हैं जब बिल की नियत तारीख (Due Date) के बाद भी भुगतान न किया गया हो। हालांकि, यदि आपने 'मिनिमम अमाउंट ड्यू' (Minimum Amount Due) चुका दिया है, तो बैंक आप पर लेट पेमेंट फीस नहीं लगा सकते, लेकिन ब्याज (Interest) फिर भी लागू रहेगा। हमारे उदाहरण में, अगर ₹20,000 के बिल पर ₹19,500 चुकाए गए हैं, तो यह मिनिमम अमाउंट से काफी ज्यादा है, इसलिए 'लेट फीस' से तो आप बच जाएंगे, लेकिन ब्याज की मीटर शुरू हो जाएगी। लेट फीस की राशि आमतौर पर बकाया राशि के स्लैब पर निर्भर करती है, जो ₹100 से लेकर ₹1300 तक हो सकती है।
नए ट्रांजैक्शन पर भी पड़ता है असर
एक और महत्वपूर्ण बात जो लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, वह यह है कि यदि आपका पिछला ₹500 का भी बकाया है, तो आप अगले महीने जो भी नया खर्च करेंगे, उस पर पहले दिन से ही ब्याज लगना शुरू हो जाएगा। सामान्य तौर पर, हमें 45 से 50 दिनों का ब्याज मुक्त समय मिलता है, लेकिन बकाया राशि रहने पर यह सुविधा छीन ली जाती है। यानी ₹500 की वह छोटी सी उधारी आपके अगले महीने के पूरे खर्च को महंगा बना देती है। इसके अलावा, बिल पूरी तरह न चुकाने का सीधा असर आपके सिबिल स्कोर (CIBIL Score) पर भी पड़ता है, जिससे भविष्य में लोन मिलना मुश्किल हो सकता है।
