अगर आप आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कार (Electric Car) खरीदने की योजना बना रहे हैं तो यह आपके लिए अच्छी खबर हो सकती है। केंद्र सरकार ने 8 जुलाई 2026 को जारी कस्टम्स नोटिफिकेशन के जरिए ऑटोमोबाइल डिस्प्ले और वायरलेस चार्जिंग से जुड़े कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) में छूट देने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम से वाहन निर्माताओं की लागत घट सकती है, जिसका फायदा भविष्य में इलेक्ट्रिक कार खरीदने वाले ग्राहकों को भी मिल सकता है।
किन कंपोनेंट्स पर मिली है छूट?
सरकार ने ऑटोमोटिव डिस्प्ले असेंबली के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई अहम पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी को जीरो (Nil) कर दिया है। इनमें सेल (Cell), फ्लेक्सिबल प्रिंटेड सर्किट असेंबली (FPCA), बैकलाइट यूनिट, फ्रेम और एनिसोट्रॉपिक कंडक्टिव फिल्म (ACF) जैसे कंपोनेंट्स शामिल हैं। इसके अलावा, वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स जैसे NC (Nano-Crystalline) Assembly, E-Shield, PET Liner, PC Shim, Main Stranded Coil, NFC Coil और NdFeB Magnets पर भी कस्टम ड्यूटी में राहत दी गई है। यह छूट फिलहाल 31 मार्च 2029 तक लागू रहेगी।
इलेक्ट्रिक कारों पर कैसे पड़ेगा असर?
अब समझते हैं कि EV पर इसका असर कैसे पड़ेगा। दरअसल, आज की आधुनिक इलेक्ट्रिक कारें केवल बैटरी से नहीं, बल्कि बड़े टचस्क्रीन डिस्प्ले, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, वायरलेस स्मार्टफोन चार्जिंग, कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम जैसे फीचर्स से भी लैस होती हैं। इन सभी फीचर्स के लिए कई हाई-टेक कंपोनेंट्स विदेशों से आयात किए जाते हैं। अब इन कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी कम होने से वाहन कंपनियों की उत्पादन लागत में कमी आ सकती है। अगर निर्माता इस लागत में हुई बचत का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, तो आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कारों की कीमतें अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकती हैं।
'मेक इन इंडिया' को भी मिलेगा बढ़ावा
सरकार का उद्देश्य केवल आयात सस्ता करना नहीं है, बल्कि भारत में एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स के स्थानीय निर्माण को बढ़ावा देना भी है। कम लागत पर जरूरी पार्ट्स उपलब्ध होने से देश में मैन्युफैक्चरिंग को गति मिल सकती है। इससे कंपनियों की आयात पर निर्भरता घटेगी और लंबी अवधि में सप्लाई चेन भी मजबूत होगी।
क्या तुरंत सस्ती हो जाएंगी EV?
हालांकि, इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि इलेक्ट्रिक कारों की कीमतें अगले ही दिन कम हो जाएंगी। वाहन निर्माता पहले नई लागत का आकलन करेंगे और फिर अपनी प्राइसिंग रणनीति तय करेंगे। इसके अलावा बैटरी, स्टील, एल्युमीनियम और अन्य कच्चे माल की कीमतें भी किसी वाहन की अंतिम कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि, अगर इनपुट कॉस्ट में लगातार कमी आती है और कंपनियां इसका लाभ ग्राहकों तक पहुंचाती हैं, तो भविष्य में इलेक्ट्रिक कारें पहले की तुलना में अधिक किफायती हो सकती हैं।
