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Zero Depreciation नाम देखकर न खरीदें Car Insurance Policy, इन 5 बातों का रखें खास ध्यान

नई कार खरीद रहे हैं तो उसका इंश्योरेंस करवाना भी जरूरी है। हालांकि, आमतौर पर लोग कॉम्प्रिहेंशन कार इंश्योरेंस ले तो लेते हैं लेकिन इसके साथ मिलने वाले अलग-अलग ऐड-ऑन कवर को लेकर कंफ्यूज रहते हैं।

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Zero Depreciation नाम देखकर न खरीदें Car Insurance (Photo: iStock)

नई कार खरीदने के बाद उसका इंश्योरेंस करवाना बेहद जरूरी है। आमतौर पर लोग कॉम्प्रिहेंशन कार इंश्योरेंस (Comprehensive Car Insurance) लेते हैं, लेकिन इसके साथ मिलने वाले अलग-अलग ऐड-ऑन कवर (Add-on Cover) को लेकर अक्सर कन्फ्यूजन बना रहता है। इन्हीं में से एक Zero Depreciation Cover है। यह कवर दुर्घटना के बाद कार के पार्ट्स बदलने पर लगने वाली डेप्रिसिएशन कटौती को कम करने में मदद करता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दुर्घटना के बाद आपका पूरा खर्च इंश्योरेंस कंपनी उठाएगी। Zero Depreciation Cover को लेकर आपको कुछ जरूरी बातें ध्यान में रखनी चाहिए-

जीरो डेप्रिसिएशन कवर किसके लिए फायदेमंद

अगर किसी दुर्घटना के बाद बीमा के तहत आने वाले किसी पार्ट को बदलना पड़ता है, तो क्लेम सेटल करते समय बीमा कंपनी उस पार्ट की कीमत पर डेप्रिसिएशन नहीं काटती। अगर आपके पास यह ऐड-ऑन कवर नहीं है, तो नए पार्ट को बदलने की लागत का कुछ हिस्सा आपको अपनी जेब से देना पड़ सकता है। अगर दुर्घटना में एक साथ कई पार्ट्स खराब हो जाएं या कार में महंगे कंपोनेंट्स लगे हों, तो यह अंतर काफी बड़ा हो सकता है। खासकर नई कार खरीदने वालों के लिए जीरो डेप्रिसिएशन कवर काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

Zero Dep मुफ्त सुविधा नहीं

Zero Dep कोई मुफ्त सुविधा नहीं है। इसे Comprehensive Insurance के साथ Add-on के तौर पर लेना पड़ता है, जिसके लिए अतिरिक्त प्रीमियम देना होता है। इसलिए पॉलिसी खरीदते समय यह जरूर देखें कि अतिरिक्त प्रीमियम के मुकाबले आपको कितना फायदा मिल सकता है।

जितनी बार चाहे उतनी बार नहीं मिलेगा फायदा

यह मान लेना सही नहीं है कि Zero Dep Cover लेने के बाद आप पूरे साल जितनी बार चाहें इसका फायदा उठा सकते हैं। कुछ बीमा कंपनियां इस कवर के तहत क्लेम की संख्या पर सीमा रख सकती हैं। इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले क्लेम लिमिट और किन पार्ट्स पर कवर लागू है, यह जरूर जांचें।

नई और पुरानी कार का समझें अंतर

Zero Depreciation Cover आमतौर पर नई कारों के लिए ज्यादा बेहतर माना जाता है। कई बीमा कंपनियां गाड़ी की लाइफ के आधार पर इस Add-on को देने से मना कर सकती हैं। कार पुरानी होने पर अतिरिक्त प्रीमियम और बचत के बीच तुलना करना जरूरी है।

कवर के बाद भी हर खर्च नहीं होगा खत्म

सबसे जरूरी बात यह है कि Zero Dep Cover लेने के बाद भी हर खर्च खत्म नहीं हो जाता। Compulsory या Voluntary Deductible आपको देना पड़ सकता है। पॉलिसी में शामिल न होने वाले खर्च भी कवर नहीं होंगे। सामान्य Wear and Tear या Mechanical Problem को भी यह Add-on कवर नहीं करता। इसलिए केवल Zero Depreciation नाम देखकर पॉलिसी न खरीदें। प्रीमियम, क्लेम लिमिट, Deductible, वाहन की उम्र और Exclusions को ध्यान से पढ़कर ही फैसला करें।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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