कृषि

मल्टी लेयर फार्मिंग क्या है? कम जमीन में ज्यादा कमाई का नया तरीका

Multi Layer Farming: मल्टी लेयर फार्मिंग आधुनिक खेती तकनीक है, जिसमें एक ही खेत में चार स्तरों पर अलग-अलग फसलें उगाकर किसान कम लागत में ज्यादा उत्पादन और दोगुनी कमाई हासिल कर सकते हैं।

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मल्टी लेयर फार्मिंग क्या है? एक ही खेत में किसान कर सकते हैं डबल कमाई (तस्वीर-istock)

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Multi Layer Farming : आज के आधुनिक दौर में खेती (Modern Farming Technique) का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब किसान केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि कम जमीन में ज्यादा उत्पादन और अधिक मुनाफा देने वाली तकनीकों को अपना रहे हैं। ऐसी ही एक आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक है मल्टी लेयर फार्मिंग। यह खेती का ऐसा तरीका है, जिसमें किसान एक ही खेत में एक साथ कई तरह की फसलें उगाकर अपनी इनकम बढ़ा सकते हैं। खास बात यह है कि इस तकनीक से खेती की लागत कम होती है और उत्पादन कई गुना तक बढ़ जाता है।

क्या है मल्टी लेयर फार्मिंग

मल्टी लेयर फार्मिंग का मतलब है एक ही खेत में अलग-अलग ऊंचाई और अलग बढ़ने वाली फसलों को एक साथ लगाना। इसमें खेत की जमीन, पानी और सूरज की रोशनी का पूरा उपयोग किया जाता है। फसलों को इस तरह लगाया जाता है कि कोई भी संसाधन बेकार न जाए। यही वजह है कि यह तकनीक छोटे और सीमांत किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है। इस खेती में फसलों को चार अलग-अलग लेयर यानी स्तरों में बांटा जाता है। हर लेयर में ऐसी फसल लगाई जाती है, जो दूसरी फसल को नुकसान पहुंचाए बिना आसानी से बढ़ सके। इससे खेत का हर हिस्सा उपयोग में आता है और किसान एक साथ कई फसलों से कमाई कर पाते हैं।

पहली लेयर में होती हैं जड़ वाली फसलें

मल्टी लेयर फार्मिंग की सबसे पहली लेयर जमीन के अंदर काम करती है। इसमें ऐसी फसलें लगाई जाती हैं, जिनका मुख्य हिस्सा मिट्टी के भीतर तैयार होता है। किसान इस लेयर में अदरक, हल्दी, आलू, गाजर और मूली जैसी फसलें उगा सकते हैं। इन फसलों की खासियत यह है कि इन्हें ज्यादा जगह की जरुरत नहीं होती और बाजार में इनकी मांग हमेशा बनी रहती है। इससे किसानों को शुरुआती स्तर पर ही अच्छी आमदनी मिलने लगती है।

दूसरी लेयर में उगाई जाती हैं पत्तेदार सब्जियां

जमीन की सतह पर दूसरी लेयर तैयार की जाती है। इसमें छोटी और तेजी से बढ़ने वाली पत्तेदार सब्जियां लगाई जाती हैं। किसान इस स्तर पर पालक, मेथी, धनिया और गोभी जैसी फसलें आसानी से उगा सकते हैं। इन सब्जियों की फसल जल्दी तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को कम समय में अच्छा मुनाफा मिल जाता है। साथ ही बाजार में इनकी लगातार मांग रहने से बिक्री की भी परेशानी नहीं होती।

तीसरी लेयर में लगते हैं मध्यम ऊंचाई वाले पौधे

तीसरी लेयर में ऐसे पौधे लगाए जाते हैं, जो थोड़ी ऊंचाई तक बढ़ते हैं और जिन्हें सीमित जगह की जरूरत होती है। इस स्तर पर टमाटर, मिर्च और बैंगन जैसी फसलें सबसे ज्यादा फायदेमंद मानी जाती हैं। ये फसलें लंबे समय तक उत्पादन देती रहती हैं। किसान कई महीनों तक इनकी तुड़ाई कर बाजार में बेच सकते हैं। इससे लगातार आय बनी रहती है और खेत की उत्पादकता भी बढ़ती है।

चौथी लेयर में मचान पर होती है बेल वाली खेती

मल्टी लेयर फार्मिंग की सबसे ऊपरी लेयर में मचान तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें बांस और तारों की मदद से मजबूत ढांचा तैयार किया जाता है, जिस पर बेल वाली फसलें चढ़ाई जाती हैं। इस लेयर में किसान लौकी, करेला, नेनुआ और सेम जैसी सब्जियां उगा सकते हैं। ऊपर खुली हवा और पर्याप्त धूप मिलने से इन फसलों की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादन भी अच्छा मिलता है।

किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है यह तकनीक

मल्टी लेयर फार्मिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान एक ही खेत से कई फसलों का उत्पादन ले सकते हैं। इसमें पानी, खाद और मेहनत का उपयोग एक बार होता है, लेकिन फायदा कई गुना मिलता है। इसके अलावा अगर किसी कारण एक फसल खराब हो जाए, तो बाकी फसलें किसानों को आर्थिक नुकसान से बचा लेती हैं। इस तकनीक से खेती का जोखिम कम होता है और आय में स्थिरता बनी रहती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बदलते समय में मल्टी लेयर फार्मिंग किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकती है। कम जमीन वाले किसान भी इस तकनीक को अपनाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं और खेती को ज्यादा लाभकारी बना सकते हैं।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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