कृषि

रबी सत्र 2025-26: गेहूं की बुवाई ने पिछले साल का तोड़ा रिकॉर्ड, जानें चावल, दलहन, तिलहन का हाल

Wheat Sowing: चालू रबी सत्र 2025-26 में गेहूं की बुवाई पिछले साल के स्तर को पार कर गई है और अब तक 3.34 करोड़ हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पूरे रबी सत्र 2024-25 में गेहूं 3.28 करोड़ हेक्टेयर में बोया गया था, जिससे इस साल बुवाई में वृद्धि का संकेत मिलता है।

Image

किसानों की मेहनत रंग लाई, गेहूं और तिलहन की बुवाई में उछाल (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Wheat Sowing : चालू रबी सत्र 2025-26 में गेहूं की बुवाई पिछले साल के मुकाबले ज्यादा हो गई है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक देश में 3.34 करोड़ हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हो चुकी है। जबकि पूरे रबी सत्र 2024-25 में गेहूं की बुवाई 3.28 करोड़ हेक्टेयर में हुई थी। इससे साफ है कि इस साल किसानों ने गेहूं की खेती में ज्यादा रुचि दिखाई है। गेहूं देश की प्रमुख रबी फसल है और इसका सीधा असर खाद्य सुरक्षा और बाजार पर पड़ता है।

रबी फसलों की बुवाई का समय और स्थिति

रबी फसलों की बुवाई आमतौर पर अक्टूबर महीने से शुरू होती है और इनकी कटाई मार्च से शुरू होती है। गेहूं के अलावा चना, सरसों, जौ और दूसरी रबी फसलें भी इसी मौसम में बोई जाती हैं। इस साल अधिकतर इलाकों में रबी फसलों की बुवाई करीब पूरी हो चुकी है। कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में अभी भी बुवाई का काम चल रहा है, जो 15 जनवरी तक पूरा हो जाएगा।

सरकारी बयान: बुवाई का रुझान सकारात्मक

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने कहा कि इस रबी सत्र में फसलों की बुवाई अच्छी रही है। उन्होंने बताया कि गेहूं के रकबे में साफ तौर पर सुधार हुआ है। साथ ही दलहन और तिलहन फसलों का रकबा भी पिछले साल की तुलना में थोड़ा बेहतर है। इससे यह संकेत मिलता है कि किसान विविध फसलों की खेती की ओर भी ध्यान दे रहे हैं, जो खेती के लिए अच्छा संकेत है।

चावल और दलहन की स्थिति

आंकड़ों के अनुसार, रबी सत्र 2025-26 में दो जनवरी तक चावल की बुवाई 17.5 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इसी समय यह 14.9 लाख हेक्टेयर थी। हालांकि, पूरे रबी सत्र 2024-25 में चावल की बुवाई 44.7 लाख हेक्टेयर में हुई थी। दलहन फसलों की बात करें तो इस रबी सत्र में अब तक 1 करोड़ 34 लाख हेक्टेयर में दलहन की खेती हो चुकी है, जो पिछले साल के पूरे रबी सत्र के बराबर या उससे थोड़ी ज्यादा है। चने की बुवाई 95.8 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि काले चने की बुवाई अभी इससे पीछे है।

मोटे अनाज और तिलहन का बढ़ता रकबा

इस रबी सत्र में मोटे अनाजों का रकबा भी 51.7 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इसमें मक्का 23.3 लाख हेक्टेयर और ज्वार 20.7 लाख हेक्टेयर में बोया गया है। तिलहन फसलों की बुवाई में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस साल अब तक तिलहन का कुल रकबा 96.3 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल से ज्यादा है। इसमें सबसे ज्यादा हिस्सा रेपसीड-सरसों का है, जिसकी बुवाई 89.3 लाख हेक्टेयर में हुई है।

कुल रबी बुवाई में भी बढ़ोतरी

वर्ष 2025-26 के रबी सत्र में दो जनवरी तक सभी रबी फसलों की कुल बुवाई 6 करोड़ 34.1 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। जबकि एक साल पहले इसी समय यह आंकड़ा 6 करोड़ 17.7 लाख हेक्टेयर था। कुल मिलाकर देखा जाए तो इस साल रबी फसलों की बुवाई में अच्छी बढ़ोतरी हुई है, जो आने वाले समय में बेहतर उत्पादन और किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद जगाती है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article