भारत में चीनी उत्पादन में तेज बढ़ोतरी, लेकिन मिलों की ये है चिंता
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Jan 21, 2026, 07:40 AM IST
Sugar Production: गन्ने की भरपूर उपलब्धता और बेहतर पैदावार के कारण भारत में चीनी उत्पादन में तेजी आई है। उद्योग संगठन इस्मा के अनुसार, 2025-26 सत्र में 15 जनवरी तक चीनी उत्पादन सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़कर 1.59 करोड़ टन हो गया। पिछले साल इसी अवधि में उत्पादन 1.3 करोड़ टन था।
चीनी उत्पादन में 22 प्रतिशत की बढ़त (तस्वीर-istock)
Sugar Production: गन्ने की अधिक उपलब्धता और बेहतर पैदावार के कारण भारत में चीनी उत्पादन में इस साल अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। उद्योग संगठन भारतीय चीनी एवं बायो-ऊर्जा विनिर्माता संघ (ISMA) के अनुसार, 2025-26 के चीनी सत्र में 15 जनवरी तक देश का चीनी उत्पादन सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़कर 1.59 करोड़ टन हो गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह उत्पादन करीब 1.3 करोड़ टन था। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से गन्ने की भरपूर आपूर्ति और मिलों के सुचारू संचालन की वजह से हुई है।
ज्यादा संख्या में चीनी मिलें चालू
इस्मा ने बताया कि इस साल 15 जनवरी तक देशभर में लगभग 518 चीनी मिलें चालू थीं, जबकि पिछले साल इसी समय यह संख्या 500 थी। इससे साफ है कि इस सत्र में ज्यादा मिलों ने समय पर पेराई शुरू की। भारत में चीनी का सत्र हर साल अक्टूबर से सितंबर तक चलता है। मिलों की संख्या बढ़ने से उत्पादन क्षमता में भी इजाफा हुआ है, जिसका सीधा असर कुल चीनी उत्पादन पर पड़ा है।
प्रमुख राज्यों में उत्पादन की स्थिति
देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में उत्पादन में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां चीनी उत्पादन 42.7 लाख टन से बढ़कर 64.5 लाख टन हो गया, यानी लगभग 51 प्रतिशत की वृद्धि। उत्तर प्रदेश, जो दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, वहां उत्पादन 42.8 लाख टन से बढ़कर 46 लाख टन हो गया। कर्नाटक में भी उत्पादन में इजाफा हुआ है और यह 27.5 लाख टन से बढ़कर 31 लाख टन तक पहुंच गया है। इन तीनों राज्यों में बेहतर मौसम, गन्ने की अच्छी फसल और मिलों के बेहतर संचालन ने उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
बेहतर पैदावार से स्थिर प्रगति
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक इस्मा का कहना है कि गन्ने की पर्याप्त उपलब्धता, बेहतर पैदावार और प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मिलों के सुचारू कामकाज के चलते 2025-26 के सत्र में अब तक चीनी उद्योग की प्रगति संतोषजनक रही है। किसानों द्वारा उगाए गए गन्ने की गुणवत्ता अच्छी रही, जिससे चीनी की रिकवरी भी बेहतर हुई और उत्पादन बढ़ा।
मिलों की वित्तीय हालत पर दबाव
हालांकि, उत्पादन बढ़ने के बावजूद चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता बढ़ रही है। इस्मा ने चेतावनी दी है कि गन्ने की बढ़ती कीमतों और बाजार में चीनी की कीमतों में गिरावट के कारण मिलों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इससे किसानों को गन्ने का भुगतान करने में देरी की स्थिति बन रही है।
चीनी की कीमतें लागत से नीचे
इस्मा के अनुसार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में मिलों से निकलने वाली चीनी की कीमतें गिरकर करीब 3,550 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गई हैं। यह कीमत चीनी के उत्पादन की लागत से काफी कम है। जब बाजार में कीमतें कम होती हैं, तो मिलों की आय घट जाती है और उनके लिए किसानों को समय पर भुगतान करना मुश्किल हो जाता है।
बढ़ता चीनी भंडार और बकाया भुगतान
उद्योग संगठन ने यह भी बताया कि देश में चीनी का भंडार लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही संकेत मिल रहे हैं कि गन्ने के भुगतान का बकाया फिर से बढ़ने लगा है। अगर मौजूदा हालात बने रहे, तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर हो सकती है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ेगा।
न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांग
इन समस्याओं को देखते हुए इस्मा ने सरकार से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में जल्द संशोधन करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि एमएसपी बढ़ाने से मिलों की वित्तीय स्थिरता बहाल होगी और किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे चीनी उद्योग और किसानों दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है।