कृषि

रबी फसलों की बुआई में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, बढ़ेगी किसानों की आय, सस्ती होंगी खाने-पीने की चीजें!

Agricultural production: रबी फसलों की बुआई का कुल क्षेत्रफल 652.33 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल की 631.45 लाख हेक्टेयर से 20.88 लाख हेक्टेयर अधिक है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, बुआई क्षेत्र बढ़ने से उत्पादन में वृद्धि होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और खाने-पीने की चीजों की महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

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किसानों की आमदनी और उत्पादन में जोरदार उछाल की उम्मीद (तस्वीर-istock)

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Agricultural production : देश में रबी फसलों की बुआई का रकबा इस साल तेजी से बढ़ा है। 16 जनवरी तक रबी फसलों के तहत कुल बुआई क्षेत्रफल बढ़कर 652.33 लाख हेक्टेयर हो गया है। यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि के 631.45 लाख हेक्टेयर से करीब 20.88 लाख हेक्टेयर अधिक है। यह जानकारी केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने सोमवार को जारी आंकड़ों में दी।

उत्पादन बढ़ने से महंगाई पर लगाम की उम्मीद

कृषि मंत्रालय के अनुसार, बुआई क्षेत्रफल में बढ़ोतरी से रबी फसलों का उत्पादन बढ़ने की संभावना है। इससे न केवल किसानों की आय में इजाफा होगा, बल्कि खाने-पीने की चीजों की कीमतों को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि अधिक उत्पादन से बाजार में आपूर्ति बेहतर होगी, जिससे महंगाई पर दबाव कम पड़ेगा।

गेहूं की खेती में भी बढ़ा रकबा

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, गेहूं की खेती का क्षेत्रफल भी इस साल बढ़ा है। पिछले साल इसी समय गेहूं की बुआई 328.04 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जो इस साल बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर हो गई है। यानी गेहूं के रकबे में 6.13 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

दालों की खेती को मिला बढ़ावा

आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक उड़द, मसूर, चना और मूंग जैसी दालों की खेती का क्षेत्रफल भी बढ़ा है। पिछले साल इसी अवधि में दालों की बुआई 133.18 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जबकि इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 137 लाख हेक्टेयर हो गया है। यानी दालों के क्षेत्रफल में 3.82 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है, जो देश में दालों की उपलब्धता बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है।

मोटे अनाज की खेती में भी इजाफा

ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मोटे अनाज (श्रीअन्न) की खेती का रकबा भी इस सीजन में बढ़ा है। पिछले साल इसी समय इन फसलों का क्षेत्रफल 55.93 लाख हेक्टेयर था, जो इस साल बढ़कर 58.72 लाख हेक्टेयर हो गया है। यानी मोटे अनाज के क्षेत्रफल में 2.79 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

तिलहन फसलों का क्षेत्रफल भी बढ़ा

सरसों और राई जैसी तिलहन फसलों की खेती में भी अच्छा इजाफा देखने को मिला है। पिछले साल इसी अवधि में तिलहन फसलों का क्षेत्रफल 93.33 लाख हेक्टेयर था, जो इस साल बढ़कर 96.86 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसमें 3.53 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है।

अच्छी मानसूनी बारिश बनी मुख्य वजह

इस सीजन में खेती का क्षेत्रफल बढ़ने की सबसे बड़ी वजह मानसून में अच्छी बारिश मानी जा रही है। अच्छी वर्षा के कारण उन इलाकों में भी बुआई संभव हो पाई, जहां पहले कम बारिश के चलते खेती प्रभावित होती थी। इससे किसानों का भरोसा बढ़ा और उन्होंने ज्यादा क्षेत्र में फसल बोई।

एमएसपी बढ़ने से किसानों को मिला भरोसा

इसके अलावा, सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में की गई बढ़ोतरी ने भी किसानों को प्रोत्साहित किया है। कैबिनेट कमिटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने 1 अक्टूबर को 2026-27 मार्केटिंग सीजन के लिए रबी फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी।

किन फसलों में कितनी बढ़ोतरी

एमएसपी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम के लिए 600 रुपये प्रति क्विंटल की गई है। इसके बाद मसूर के लिए 300 रुपये, रेपसीड-सरसों के लिए 250 रुपये, चना के लिए 225 रुपये, जौ के लिए 170 रुपये और गेहूं के लिए 160 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

सरकार के अनुसार, एमएसपी तय करते समय केंद्रीय बजट 2018-19 की उस घोषणा का ध्यान रखा गया है, जिसमें कहा गया था कि एमएसपी को उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना पर तय किया जाएगा। इससे किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिलने की उम्मीद है और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

रामानुज सिंह
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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