डिमांड से अधिक किसानों के लिए उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड 834.64 लाख टन उर्वरक
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Jan 17, 2026, 11:32 AM IST
Record Fertilizer Supply: सरकार ने शुक्रवार को बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में देश में उर्वरकों की अनुमानित जरूरत 152.50 करोड़ बोरी (722.04 लाख टन) थी, जबकि किसानों की मांग को समय पर पूरा करने के लिए करीब 176.79 करोड़ बोरी (834.64 लाख टन) उर्वरक उपलब्ध कराए गए। सरकार के अनुसार, यह 2024-25 में उर्वरकों की रिकॉर्ड उपलब्धता रही।
वित्त वर्ष 2024-25 में उर्वरकों की रिकॉर्ड उपलब्धता (तस्वीर-istock)
Record Fertilizer Supply : सरकार ने बताया है कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान देश में उर्वरकों की जरूरत से कहीं अधिक आपूर्ति की गई। जहां इस साल उर्वरकों की अनुमानित जरूरत करीब 152.50 करोड़ बोरी (722.04 लाख टन) आंकी गई थी, वहीं सरकार ने किसानों के लिए लगभग 176.79 करोड़ बोरी (834.64 लाख टन) उर्वरक उपलब्ध कराए। यह अब तक की रिकॉर्ड उपलब्धता मानी जा रही है। सरकार का कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को खेती के दौरान किसी भी तरह की परेशानी से बचाना और समय पर खाद उपलब्ध कराना था।
किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर की गई तैयारी
आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने स्पष्ट किया कि खेती के हर मौसम में किसानों को उर्वरकों की जरूरत समय पर पूरी हो, इसके लिए पहले से ही व्यापक तैयारियां की गई थीं। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, अतिरिक्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की किसानों के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि बुवाई और फसल उत्पादन के दौरान कहीं भी खाद की कमी न हो और खेती का काम बिना रुकावट चलता रहे।
रेलवे और बंदरगाहों की अहम भूमिका
सरकार के मुताबिक, इस सफलता के पीछे कई विभागों का आपसी तालमेल रहा। भारतीय रेलवे ने उर्वरकों की ढुलाई को प्राथमिकता दी, जिससे खाद को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा सका। इससे राज्यों और जिलों में उर्वरकों की समय पर आपूर्ति संभव हो पाई। इसके साथ ही बंदरगाह प्राधिकरणों ने भी अहम भूमिका निभाई। आयात किए गए उर्वरकों को बंदरगाहों पर जल्दी उतारा गया और उन्हें तुरंत आगे भेजने की व्यवस्था की गई। इससे भंडारण और वितरण की प्रक्रिया तेज हुई और किसानों तक खाद समय पर पहुंच सकी।
भंडारण और वितरण व्यवस्था को किया गया मजबूत
सरकार ने उर्वरकों के भंडारण और वितरण ढांचे को भी मजबूत किया। राज्यों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया गया कि गोदामों में पर्याप्त स्टॉक रहे और जरूरत पड़ने पर तुरंत उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके। इसके अलावा, सरकार ने उर्वरक कंपनियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें कीं। इन बैठकों में मांग और आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। जहां कहीं भी कमी या समस्या सामने आई, उसे तुरंत दूर किया गया। इन सभी प्रयासों की वजह से देश के किसी भी हिस्से में उर्वरकों की कमी नहीं हुई।
रबी फसलों की बुवाई में बढ़ोतरी
इसी बीच कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि मौजूदा सर्दी के मौसम में रबी फसलों की बुवाई में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस साल रबी फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र बढ़कर 644.29 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल इसी समय यह 626.64 लाख हेक्टेयर था। इस तरह रबी फसलों की बुवाई में 17.65 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है, जो किसानों के बढ़ते भरोसे और बेहतर संसाधनों का संकेत देती है।
दलहन और चना की खेती को बढ़ावा
आंकड़ों के अनुसार, दलहनी फसलों के क्षेत्रफल में भी बढ़ोतरी हुई है। दलहन फसलों का रकबा 3.74 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। खास तौर पर चना की बुवाई में 4.66 लाख हेक्टेयर की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी पोषण सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उत्पादन और महंगाई पर पड़ेगा सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि बुवाई क्षेत्र बढ़ने से फसल उत्पादन में भी इजाफा होगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ने से बाजार में आपूर्ति बेहतर रहेगी, जिससे खाद्य महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, उर्वरकों की रिकॉर्ड उपलब्धता और रबी फसलों की बढ़ती बुवाई यह दिखाती है कि सरकार की योजनाएं जमीनी स्तर पर असर डाल रही हैं और देश की कृषि व्यवस्था को मजबूती मिल रही है।