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कोई भी बना सकता है अपने लिए अलग देश? जानिए क्या कहते हैं नियम

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Mar 3, 2023, 11:20 AM IST

Kailasa News: लोगों का मानना है कि 'कैलासा' नाम का कोई देश वास्तविकता में नहीं है बल्कि यह वर्चुअल या आभासी है। नित्यानंद अपने इस कथित देश और अपनी सरकार के बारे में जानकारी वेबसाइट और अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पर देता आया है। बताया जाता है कि दक्षिण अमेरिका में ऐसे कई छोटे द्वीप हैं जिन्हें खरीदा जा सकता है।

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'कैलासा' को अपना देश होने का दावा करता है नित्यानंद।

Kailasa : रेप केस में फरार चल रहे आध्यत्मिक गुरु नित्यानंद का कथित देश 'कैलासा' इन दिनों सुर्खियों में है। हालांकि, यह 'कैलासा' कहां है, इसके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। रिपोर्टों में बताया जाता है कि नित्यानंद का यह 'कैलासा' दक्षिण अमेरिका में इक्वाडोर के कहीं आस-पास है। किसी व्यक्ति के पास एक देश का होना हैरान करने वाली बात लग सकती है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आप चाहें तो आपके पास भी एक देश हो सकता है। इसके लिए आपको ढेर सारे पैसे खर्च करने होंगे और आपको दक्षिण अमेरिका में कोई द्वीप खरीदना होगा।

काल्पनिक है 'कैलासा'?

लोगों का मानना है कि 'कैलासा' नाम का कोई देश वास्तविकता में नहीं है बल्कि यह वर्चुअल या आभासी है। नित्यानंद अपने इस कथित देश और अपनी सरकार के बारे में जानकारी वेबसाइट और अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पर देता आया है। बताया जाता है कि दक्षिण अमेरिका में ऐसे कई छोटे द्वीप हैं जिन्हें खरीदा जा सकता है। चर्चा है कि अपना अलग 'देश' बनाने के लिए नित्यानंद ने इसी रास्ते को चुना। दुनिया के अमीर लोग भी अपने शौक को पूरा करने के लिए इसी तरह के छोटे-छोटे द्वीप खरीदते हैं और अपनी इच्छाओं के अनुरूप उन्हें एक शक्ल देते हैं।

कोई भी खरीद सकता है द्वीप

खरीदा जाने वाला द्वीप कहां पर स्थित हैं, इस आधार पर उसकी कीमत तय होती है। रिपोर्टों के अनुसार कैरेबियन द्वीपों के मुकाबले मध्य अमेरिका के द्वीप सस्ते होते हैं। बहामास के आस-पास के द्वीप और भी महंगे बताए जाते हैं। एक बार आप कोई द्वीप खरीद लेते हैं और वहां आप कोई अवैध एवं अनुचित काम नहीं करते हैं तो आप अपने हिसाब से नियम और कायदे बना सकते हैं।

'कैलासा' के बारे में कई दावे

नित्यानंद का दावा है कि वह अपने देश 'कैलासा' में 'दो अरब हिंदुओं' का प्रतिनिधित्व करता है। 'कैलासा' का अपना एक ध्वज है जिसे वह ऋषभ ध्वज कहता है। इस ध्वज पर नंदी और नित्यानंद की तस्वीर है। नित्यानंद के अनुयायी इस ध्वज को अपने कार्यालय, कार, आवास एवं धार्मिक स्थलों पर लगाते हैं। दावा है कि कैलासा' का अपना एक राष्ट्रगान, करेंसी और रिजर्व बैंक है।

क्या कहता है मोंटेवीडियो कन्वेंशन

एक देश को खड़ा करने का काम जितना आसान होता है उससे कहीं ज्यादा कठिन काम उसे मान्यता दिलाने में है। 1933 के मोंटेवीडियो कन्वेंशन में एक नए देश को मान्यता देने के लिए कुछ मानक एवं नियम तय किए गए हैं। इसके मुताबिक एक निर्धारित क्षेत्र में एक स्थायी आबादी का होना जरूरी है। वहां पर एक सरकार होनी चाहिए और उस कथित सरकार के पास अन्य देशों के साथ संबंध बनाने की क्षमता होनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र से देश की मान्यता पाने के लिए इन चार मानकों पर खरा उतरना अनिवार्य होता है। गत फरवरी में संयुक्त राष्ट्र में अपना प्रतिनिधिमंडल भेजकर नित्यानंद ने कुछ इसी तरह की कोशिश की है।

जरूरी नहीं कि मान्यता मिल ही जाए

हालांकि, इन चार मानकों को पूरा करने के बाद भी यह जरूरी नहीं कि संयुक्त राष्ट्र से देश की मान्यता मिल जाए। ऐसा ताइवान के साथ देखा जा सकता है। सभी मानकों पर खरा उतरने के बावजूद दुनिया के बहुत सारे देश चीन के दबाव में उसे एक देश के रूप में मान्यता नहीं देते।

मान्यता के लिए जोर लगा रहा नित्यानंद

नित्यानंद अपने 'कैलासा' को मान्यता दिलाने के लिए इन दिनों एड़ी-चोटी का जार लगा रहा है। मान्यता प्राप्त अधिकारियों एवं सरकारों के साथ 'कैलासा' के पदाधिकारियों की मुलाकात की तस्वीरें एवं वीडियो पोस्ट कर वह अपने 'देश की मौजूदगी' का अहसास कराना चाहता है। संयुक्त राष्ट्र में विजयप्रिया नित्यानंद की अगुवाई में 'कैलासा सरकार' की एक टीम भेजकर उसने यही जताने की कोशिश की है कि उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक स्वीकृति मिल रही है। हालांकि, विवाद बढ़ने पर यूएन ने बुधवार को कहा कि 'स्वयं भू' संगठन की ओर से रखी गई बातों पर वह गौर नहीं करेगा। यूएन से किसी देश को मान्यता मिल जाने पर उसके लिए कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के दरवाजे खुल जाते हैं।
आलोक कुमार राव
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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