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समुद्र के नीचे मिला World War II का डूबा जहाज, अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में मारे गए थे 1000 लोग

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 23, 2023, 02:06 PM IST

World War II ship: करीब 1000 युद्धबंदियों को लेकर जा रहे जापान के जहाज पर अमेरिकी पनडुब्बी ने हमला किया था, जिसके बाद यह जहाज 10 मिनट के भीतर समुद्र में समा गया था। इसका मलबा 80 साल बाद मिला है।

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80 साल बाद मिला समुद्र में डूबा जहाज

Photo : ANI

World War II ship: द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के दौरान समुद्र में डूबा जहाज 80 साल बाद दुनिया के सामने आया है। इस जहाज के मलबे को फिलीपींस के दक्षिण चीन सागर में खोजा गया है। वॉइस ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस समय यह जहाज डूबा था, इस पर करीब 1000 से ज्यादा लोग सवार थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, जापानी ट्रांसपोर्ट जहाज मोंटेवीडियो मारू में 850 युद्धबंदी और लगभग 200 नागरिक सवार थे। इन लोगों को जापानियों ने 1942 में पापुआ न्यू गिनी में पकड़ा था। कथित तौर पर जहाज पर अमेरिकी सबमरीन द्वारा हमला किया गया था, जिसके बाद देखते ही देखते पूरा जहाज 10 मिनट के अंदर समुद्र में समा गया था।

दक्षिणी चीन सागर में मिला मलबा

इस जापानी जहाज का मलबा फिलीपींस के दक्षिण चीन सागर में मिला है। जहाज को मिशन ऑस्ट्रेलियाई रक्षा विभाग, ऑस्ट्रेलिया के साइलेंटवर्ल्ड फाउंडेशन के समुद्री पुरातत्वविदों और समुद्र सर्वेक्षण कंपनी फुग्रो के संयुक्त प्रयास में खोजा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलीपींस के तट पर इस महीने की शुरुआत में तलाशी अभियान शुरू किया गया था।

1000 से ज्याद ऑस्ट्रेलियाई मारे गए थे

रिपोर्ट में कहा गया है कि जहाज पर ज्यादातर ऑस्ट्रेलियाई युद्धबंदी थे। इस घटना में लगभग 1000 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक मारे गए थे। यह ऑस्ट्रेलियाई इतिहास की सबसे बड़ी मानव क्षति है। इस घटना ने एक दर्जन से अधिक देशों को प्रभावित किया था, जिसमें डेनमार्क, न्यूजीलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ जापान भी शामिल है। वीओए की रिपोर्ट के अनुसार, मोंटेवीडियो मारू से कोई वस्तु या मानव अवशेष नहीं हटाया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधान मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने ट्वीट किया, "80 से अधिक वर्षों से सैकड़ों ऑस्ट्रेलियाई परिवारों ने मोंटेवीडियो मारू की खबर का इंतजार किया है। इस सप्ताह, एक असाधारण प्रयास के लिए धन्यवाद। जहाज को खोज लिया गया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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