24 फरवरी से रूस यूक्रेन के बीच जारी महायुद्ध, अब थर्ड वर्ल्ड वॉर का शक्ल अख्तियार करने जा रहा है। एक ओर रूस के खिलाफ अमेरिका की गोलबंदी है। जिसमें यूरोपिए देश भी शामिल हैं, तो दूसरी ओर यूक्रेन को लेकर पुतिन की जिद है। ग्रुप-7 देशों ने अबकी बार पुतिन को दो टूक कह दिया है कि अगर न्यूक्लियर-कैमिकल और बायोलॉजिकल वेपन का इस्तेमाल किया तो अंजाम भुगतना पड़ेगा। लेकिन पुतिन ने इस धमकी का जवाब एक्शन से दिया है और वो भी यूक्रेन पर बम बरसाकर। ये सायरन है वर्ल्ड वॉर 3 के नए चैप्टर के शुरुआत की।
यूक्रेन पर लगातार बमबारी कर पुतिन ने बाइडेन के साथ-साथ नाटो देशों को खुला चैलेंज दे दिया है। एक ओर दुनिया के सात शक्तिशाली देश मिलकर पुतिन के खिलाफ यूक्रेन की मदद के लिए युद्ध की रणनीति तैयार कर रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ रूस ने भी यूक्रेन पर हमला तेज कर दिया। ग्रुप 7 देशों ने यूक्रेन पर रूस के अटैक को लेकर पुतिन को धमकाने वाला मैसेज भेजा। कहा अगर युद्ध में केमिकल, बायोलॉजिकल और न्यूक्लियर वेपन का इस्तेमाल किया तो अंजाम बुरा होगा। लेकिन पुतिन तो पुतिन है। यूक्रेन को लेकर रूस की जनता से एक बार जो कमिटमेंट कर दी तो वो खुद की भी नहीं सुनते।
धमकी का जवाब देने में देर नहीं लगाई और यूक्रेन पर फिर बम बर्षा कर दी। पुतिन का मैसेज लॉड एंड क्लियर था कि अगर धमकी देगो तो जवाब एक्शन से मिलेगा। यूक्रेन के हर उस बड़े शहर को पुतिन तबाह कर रहे हैं जिससे यूक्रेन सिर्फ और सिर्फ कब्रिस्तान दिखे। यूक्रेन के बड़े शहरों पर रूस मिसाइल-ड्रोन से इतने अटैक कर रहा है कि पूरा यूक्रेन में या तो आग का बवंडर दिख रहा है या फिर शहर से धुएं का गुबाह उठता दिख रहा है। रूस ने लेटेस्ट अटैक यूक्रेन के जापोरिज्जिया और लविव शहर पर किया है जहां एक बार फिर बम बरसाए गए हैं।
यूक्रेन पर रूस के इन हमलो को नाटो देश भी चैलेंज के रूप में ले तो रहा है लेकिन कुछ ठोस एक्शन लेने से बच रहा है। रूस के सुखोई -35 एस फाइटर जेट में ऑटो कैनन लगी है यानी दुश्मन की पहचान करके ये गोले बरसा रहा है ऑटो कैनन की वजह से यूक्रेनी एयर डिफेंस सिस्टम को भी इसने तबाह कर दिया है। यूक्रेन से मुकाबले में रूस को इसलिए भी बढ़त मिल रही है क्योंकि हवा से हवा में रूस को टक्कर नहीं मिल रही है। यही वजह है कि कम वजन वाला रूसी लड़ाकू विमान सुखोई 25 आसानी से यूक्रेनी इलाके में घुसकर दुश्मन के सैन्य ठिकानों को ध्वस्त कर दे रहा है। वहीं जारी महायुद्ध के बीच सोशल मीडिया पर ये खबर भी आग की तरह फैल चुकी है कि रूसियों ने यूक्रेन को शिकस्त देने के लिए थर्माइट बम का इस्तेमाल फिर शुरू कर दिया है।
और थर्माइट बम के टारगेट पर रहा यूक्रेन का शहर
क्रीमिया के ब्रिज पर हमले के बाद रूसी राष्ट्रपति पुतिन बौखलाए हुए हैं। रूस ने यूक्रेन को 10 दिन के भीतर सरेंडर करवा देने की ठानी है। इसलिए अब युद्ध में दिख रहा है पुतिन का सबसे क्रूर चेहरा। बीते कुछ घंटों से सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं। जिससे साफ हो गया है कि यूक्रेन के आसमान में रूस ने आग बरसाना शुरू कर दिया है।
दरअसल रूस की तरफ से यूक्रेन पर थर्माइट बम दागा जा रहा है।
थर्माइट बम एक झटके में इंसानी हड्डियों तक को जला देता है।
थर्माइट बम को रूस 9M22S रॉकेट के जरिए फायर कर रहा है।
ये हथियार इतना खतरनाक है कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इसके इस्तेमाल को लेकर पहले भी चेतावनी दी है। इस बम के जरिए भले ही तुरंत मौत न हो लेकिन ये स्किन को जला देता है। बम इतना खतरनाक है कि इसे वारजोन में रखा तक नहीं जाता। लेकिन दुनिया पर महाखतरा तो न्यूक्लियर अटैक को लेकर है। हर तरफ माहौल बना हुआ है। पुतिन न्यूक्लियर अटैक वाली धमकी दे चुके हैं। इसे ना तो नाटो हलके में ले रहा है और ना ही यूक्रेन लेकिन अगर परमाणु जंग छिड़ी तो दुनिया के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े जाएंगे।
आज से 78 साल पहले सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर एटम बम का इस्तेमाल किया था। इसके बाद तबाही ऐसी कि बयां नहीं किया सकता लेकिन जिसतरह से पिछले सत्तर सालों टेक्नॉलॉजी में तेजी से विकास हुआ है। वैसे ही एटम बम की ताकत में भी कई गुना ज्यादा इजाफा हो चुका है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि अगर आज की तारीख में एटमी वॉर छिड़ी तो क्या होगा। स्विट्जरलैंड की एक संस्था है इंटरनेशनल कैंपेन टू अबॉलिश न्यूक्लियर वेपन यानी ICAN इस संस्था को 2017 में नोबेल पीस प्राइज भी मिल चुका है।
