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तो क्या झुंझलाहट में यूक्रेन पर परमाणु हमला कर देगा रूस! जंग खत्म करने के लिए पुतिन कर सकते हैं बड़ा फैसला

  • Authored by: संजीव कुमार दुबे
  • Updated Jan 17, 2023, 02:59 PM IST

Russia Ukraine War : गत 24 फरवरी को रूस ने जब यूक्रेन पर हमला किया तो उसने इसे 'सीमित मिलिट्री ऑपरेशन' कहा था। रूस के हमलों को देखकर लगा कि यूक्रेन उसके सामने टिकेगा नहीं और 10 से 12 दिनों में घुटने टेक देगा और हार जाएगा।

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Russia Ukraine War : रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध थम नहीं रहा है। दोनों देश रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। लड़ाई एक साल पूरे होने जा रही है। अब तक के इस युद्ध में दोनों तरफ जान-माल का भारी नुकसान हुआ है लेकिन कोई भी अपने तेवर नरम करने के लिए तैयार नहीं है। नाटो के सहयोग एवं मदद से यूक्रेन युद्ध को लंबा खींच रहा है तो उसे झुकाने के लिए रूस उस पर बमबारी और मिसाइल से हमले कर रहा है। कुल मिलाकर सूरतेहाल ठीक नहीं है। यह जंग कहां पर जाकर खत्म होगी इसके बारे में अभी स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। अब तक की जंग में कभी रूस का पलड़ा भारी पड़ा है तो कभी यूक्रेन रूसी सैनिकों को पीछे खदेड़ वापसी करता दिखा है।

रूस को नुकसान पहुंचा रहा यूक्रेन

गत 24 फरवरी को रूस ने जब यूक्रेन पर हमला किया तो उसने इसे 'सीमित मिलिट्री ऑपरेशन' कहा था। रूस के हमलों को देखकर लगा कि यूक्रेन उसके सामने टिकेगा नहीं और 10 से 12 दिनों में घुटने टेक देगा और हार जाएगा। ऐसा अनुमान लगाने के पीछे रूस की भारी-भरकम सैन्य क्षमता थी। रूस सुपरपावर है। उसकी सैन्य क्षमता के आगे यूक्रेन को एक कमजोर देश माना जाता है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यूक्रेन ने हार नहीं मानी। पश्चिमी देशों की मदद से वह रूस मिसाइलों, बमों का सामना कर रहा है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बीते दिनों में रूस ने उसके एक और शहर पर कब्जा कर लिया है जबकि यूक्रेन के ताजा हमले में उसके 63 सैनिकों के मारे जाने का दावा किया गया।

कीव और खारकीव पर रूस के हमले

शनिवार को यूक्रेन के कई शहरों पर रूस ने हमले किए। राजधानी कीव और पूर्वोत्तर शहर खारकीव को भी निशाना बनाया गया है, जिससे यूक्रेन के ऊर्जा अवसंरचना एवं शहरी केंद्रों पर दो हफ्तों से बरकरार शांति खत्म हो गई। रूस ने रविवार को मिसाइल दागने की बात तो मानी, लेकिन उसने निप्रो की रिहायशी इमारत का जिक्र नहीं किया। यूक्रेन के सशस्त्र बलों के कमांडर-एन-चीफ जनरल वेलेरी ज़ालुझनी के मुताबिक, रूस ने शनिवार को 33 क्रूज मिसाइलें दागी थीं, जिनमें से 21 को मार गिराया गया था। निप्रो शहर में रिहायशी इमारत की ऊपरी मंजिलों में फंसे लोगों को निकालने के लिए क्रेन का इस्तेमाल किया गया।

परमाणु हमले की चेतावनी दे चुके हैं पुतिन

रूस और यूक्रेन युद्ध पर नजर रखने वाले जानकारों का आशंका है कि युद्ध लंबा खींचने पर रूस परमाणु हमला कर सकता है। जैसा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एवं रूस के अधिकारी समय-समय पर इस बात को जाहिर कर चुके हैं। रूस के पास परमाणु हमला एक विकल्प है। यह सभी को पता है कि रूस से युद्ध लड़ने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी सहित नाटो के देशों ने यूक्रेन को हथियारों एवं रक्षा उपकरणों की आपूर्ति बड़े मात्रा में की है। पश्चिमी देशों से यूक्रेन को आर्थिक मदद के साथ-साथ मिसाइलें, ड्रोन, बख्तरबंद गाड़ियां, टैंक, एंटी-एयरक्राफ्ट गन और एयर डिफेंस मिले हैं। इस मदद को लेकर पुतिन कई बार नाटो देशों को चेतावनी दे चुके हैं।

चाहकर भी युद्ध खत्म नहीं कर पा रहे पुतिन

हालांकि, पुतिन की यह चेतावनी को नाटो के देशों ने गंभीरता से नहीं लिया और वे उसे हथियारों की आपूर्ति करते रहे हैं। रिपोर्टों की मानें तो अमेरिका और पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को और मदद पहुंचाने का फैसला किया है। जाहिर है कि नाटो देशों का यह कदम रूस को और भड़काने का काम करेगा। यूक्रेन युद्ध में रूस को हो रहे नुकसान पर पुतिन पर दबाव है। रूसी राष्ट्रपति चाहकर भी यह युद्ध नहीं खत्म कर पा रहे हैं। ऊपर से नाटो के देश सैन्य मदद देकर उनकी परेशानी और बढ़ा रहे हैं। ऐसे में हो सकता है कि झुंझलाहट और निराशा में आकर युद्ध खत्म करने के लिए यूक्रेन पर रूस परमाणु हमला कर दे। इसलिए परमाणु हमले की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता।

संजीव कुमार दुबे
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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