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फ्रांस के मार्सिले शहर पहुंचते ही पीएम मोदी ने वीर सावरकर को क्यों किया याद? आखिर क्या कनेक्शन; जानें वजह

Why PM Modi Remember Vinayak Damodar Savarkar: क्या आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के मार्सिले शहर पहुंचते ही विनायक दामोदर सावरकर की तारीफ क्यों की है? आखिर सावरकर का इस शहर से क्या कनेक्शन है? पीएम मोदी ने पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्शन समिट’ की सह-अध्यक्षता की थी।

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फ्रांस के मार्सिले पहुंचे पीएम मोदी, सावरकर को दी श्रद्धांजलि।

PM Modi in France: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों विदेश यात्रा पर है। फ्रांस के पेरिस में एआई एक्शन समिट में शामिल हुए। जिसके बाद वो फ्रांस के मार्सिले पहुंचे। यहां पहुंचते ही पीएम मोदी ने विनायक दामोदर सावरकर का जिक्र किया और उनकी जमकर तारीफ की। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर प्रधानमंत्री ने इस शहर में पहुंचते ही सावरकर को क्यों याद किया, आखिर सावरकर का इस शहर से क्या कनेक्शन है? ये आपको बताएंगे, लेकिन पहले ये जानिए कि पीएम मोदी ने क्या कुछ कहा है।

फ्रांस के मार्सिले पहुंचे पीएम मोदी, सावरकर को दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिणी फ्रांस के मार्सिले पहुंचे और स्वतंत्रता सेनानी वी डी सावरकर को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने इसी बंदरगाह शहर में ‘‘भाग निकलने का साहसिक प्रयास’’ किया था। मोदी ने वहां पहुंचने के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, 'मार्सिले पहुंचा हूं। भारत के स्वतंत्रता के संघर्ष में यह शहर विशेष महत्व रखता है। यहीं पर महान वीर सावरकर ने भाग निकलने का साहसिक प्रयास किया था।'

उन्होंने कहा, 'मैं मार्सिले के लोगों और उस समय के फ्रांसीसी कार्यकर्ताओं को भी धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने मांग की थी कि उन्हें ब्रिटिश हिरासत में नहीं सौंपा जाए। वीर सावरकर की बहादुरी पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।' मार्सिले पहुंचने पर प्रधानमंत्री का भारतीय प्रवासियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।

देर रात (भारतीय समयानुसार सुबह चार बजकर 18 मिनट) ‘एक्स’ पर लिखे पोस्ट में मोदी ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और मैं कुछ देर पहले मार्सिले पहुंचे हैं। इस यात्रा में भारत और फ्रांस को और करीब लाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण कार्यक्रम होंगे। जिस भारतीय वाणिज्य दूतावास का उद्घाटन किया जा रहा है, उससे लोगों के बीच आपसी संबंध और मजबूत होंगे। मैं प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित करूंगा।’’

सावरकर ने अग्रेजों की कैद से भागने का किया था प्रयास

ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर ने आठ जुलाई, 1910 को अग्रेजों की कैद से भागने का प्रयास किया था, जब उन्हें मुकदमे के लिए ब्रिटिश जहाज मोरिया से भारत लाया जा रहा था। ऐसा माना जाता है कि सावरकर ने जहाज के ‘पोर्टहोल’ से फिसलकर बाहर निकलने का प्रयास किया और तैर कर तट तक पहुंचने में कामयाब हो गए थे, लेकिन फ्रांसीसी अधिकारियों ने उन्हें पकड़ लिया और फिर उन्हें ब्रिटिश जहाज अधिकारियों की हिरासत में वापस सौंप दिया। इससे एक बड़ा कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। सावरकर को अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की सेल्युलर जेल में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

भारत के नए महावाणिज्य दूतावास का उद्घाटन करने का प्लान

प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ भारत के नए महावाणिज्य दूतावास का उद्घाटन करने के लिए मार्सिले में हैं। दोनों नेताओं की बुधवार को कई कार्यक्रमों में शामिल होने की योजना है, जिसमें दोनों विश्व युद्ध के दौरान लड़ते हुए शहीद हुए भारतीय सैनिकों के बलिदान की याद में ‘माजरग्यूज वॉर सीमेट्री’ का दौरा भी शामिल है।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु संलयन सहयोग, अंतरराष्ट्रीय ताप नाभिकीय प्रायोगिक रिएक्टर (आईटीईआर) परियोजना का दौरा भी उनके कार्यक्रम में शामिल है। इससे पहले मंगलवार को उन्होंने ‘एआई एक्शन समिट’ और 14वें भारत-फ्रांस सीईओ फोरम को संबोधित किया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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