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बदहाल पाकिस्तान में कौन लोग कर रहे हैं आतंकवादियों का काम तमाम, क्या है पूरा मामला?

पाकिस्तान में कारी एजाज आबिद नाम के एक शख्स की 30 मार्च को खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय राजधानी पेशावर में 'अज्ञात लोगों' ने गोली मारकर हत्या कर दी गई।

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पाकिस्तान में आतंकियों को मार रहे अज्ञात लोग

Photo : AP

पेशावर: पाकिस्तान में कारी एजाज आबिद नाम के एक शख्स की 30 मार्च को खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय राजधानी पेशावर में 'अज्ञात लोगों' ने गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक आतंकवादी और प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के संस्थापक मौलाना मसूद अजहर का करीबी सहयोगी और रिश्तेदार था।

रिपोर्ट के अनुसार, आबिद की पेशावर के पिश्तखारा इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि उसके सहयोगी कारी शाहिद को अज्ञात बंदूकधारियों ने गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। पाकिस्तानी मीडिया ने बताया कि कारी एजाज आबिद अहले-ए-सुन्नत वल जमात (एएसडब्ल्यूजे) का हिस्सा था और इंटरनेशनल खतम-ए-नबुवत का प्रांतीय प्रमुख था।

ताबड़तोड़ हो रहे टारगेट मर्डर

स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने हत्या की पुष्टि करते हुए कहा कि देश भर में लक्षित हत्याओं की बाढ़ आ गई है, जिसमें विशेष रूप से देवबंदी विचारधारा से जुड़े 'धार्मिक लोगों' को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, खुफिया सूत्रों का कहना है कि मारे गए सभी लोग लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) जैसे प्रमुख आतंकवादी संगठनों से जुड़े थे।

कई आतंकवादी संगठनों के आतंकी मारे गए

ऐसा माना जाता है कि कारी एजाज आबिद अहल-ए-सुन्नत वल जमात के जरिए जेईएम के शीर्ष भर्तीकर्ताओं में से एक थे। पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान में मोटरसाइकिल सवार 'अज्ञात हथियारबंद लोगों' ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष आतंकवादियों को मार गिराया है। पाकिस्तान अपनी धरती पर आतंकवादियों के सुरक्षित पनाहगाह होने की बात से इनकार करता रहा है, लेकिन इन लोगों की हत्या, ने इस्लामाबाद के झूठ को उजागर कर दिया। मरने वालों में से कई भारत में आतंकवादी हमलों में शामिल थे।

मौलाना मसूद अजहर ने 2000 में जैश-ए-मोहम्मद का गठन किया था। इसके बाद से इसने जम्मू-कश्मीर सहित भारत में कई आतंकवादी हमले किए हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव (यूएनएससी) की ओर से जैश-ए-मोहम्मद को 'नामित विदेशी आतंकवादी संगठन' के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। अजहर को 2019 में 'वैश्विक आतंकवादी' के रूप में नामित किया गया। (IANS इनपुट के साथ)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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