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आखिर क्या चाहता है हमास? मुस्लिम ब्रदरहुड से पुराना नाता, जानें इतिहास

Hamas And Muslim Brotherhood: हमास ने पिछले कुछ वर्षों में इजराइल पर कई हमलों का दावा किया है। क्या आप जानते हैं कि इसका मिस्र के सबसे पुराने और सबसे बड़े इस्लामी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से क्या नाता है? हमास गाजा पट्टी को नियंत्रित करता है जो लगभग 20 लाख फिलिस्तीनियों का घर है। आपको मुस्लिम ब्रदरहुड का इतिहास बताते हैं।

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हमास ने पिछले कुछ वर्षों में इजराइल पर कई हमलों का दावा किया।

Photo : AP

Israel War News: मिस्र के सबसे पुराने और सबसे बड़े इस्लामी संगठन के तौर पर पहचान बनाने वाले मुस्लिम ब्रदरहुड से हमास का सीधा कनेक्शन है। इस मुस्लिम ब्रदरहुड संगठन को इख्वान अल- मुस्लमीन के नाम से भी जाना जाता है। जिसकी स्थापना मिस्र में हसन अल-बन्ना ने वर्ष 1928 (1920 के दशक) में की थी। हमास सैन्य शाखा वाला एक इस्लामी संगठन है, जो 1987 में वजूद में आया था।

हमास के चलते ब्रदरहुड के अमेरिका से बिगड़े रिश्ते

हमास इन दिनों इजराइल पर हमले को लेकर सुर्खियों में है, ये मुस्लिम ब्रदरहुड से निकला था, जो एक सुन्नी इस्लामवादी समूह है। दरअसल, मुस्लिम ब्रदरहुड का नाता कट्टरपंथी फिलिस्तीनी संगठन हमास और लेबनान स्थित शिया चरमपंथी संगठन हिज़्बुल्लाह से भी है। कहा जाता है कि यही सबसे बड़ी वजह है कि अमेरिका के साथ ब्रदरहुड के रिश्ते बेहद खराब रहे हैं।

कहां से आया हमास शब्द? जानिए इसका मतलब

"हमास" शब्द "हरकत अल-मुकावामा अल-इस्लामिया" का संक्षिप्त रूप है, जिसका मतलब है - इस्लामी प्रतिरोध के लिए आंदोलन। अधिकांश फिलिस्तीनी गुटों और राजनीतिक दलों की तरह समूह इस बात पर जोर देता है कि इजराइल एक कब्जा करने वाली शक्ति है और वह फिलिस्तीनी क्षेत्रों को आजाद करने की कोशिश कर रहा है। यह इजराइल को एक "अवैध राज्य" मानता है। इजराइल को मान्यता देने से इनकार करना एक कारण है कि उसने अतीत में शांति वार्ता को अस्वीकार कर दिया है।

इजराइल और फिलिस्तीन के बीच समझौते का विरोध

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, 1993 में हमास ने ओस्लो समझौते का विरोध किया, जो इजराइल और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) के बीच एक शांति समझौता था। समूह खुद को फिलिस्तीनी प्राधिकरण (पीए) के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसने इजराइल को मान्यता दी है और उसके साथ कई असफल शांति पहलों में शामिल हुआ है। पीए का नेतृत्व महमूद अब्बास कर रहे हैं और यह इजरायल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में स्थित है।

लगभग 20 लाख फिलिस्तीनियों का घर है गाजा पट्टी

हमास गाजा पट्टी को नियंत्रित करता है, जो एक ऐसा क्षेत्र है जो लगभग 20 लाख फिलिस्तीनियों का घर है और आतंकवादियों और इजरायली बलों के बीच लड़ाई के दौरान अक्सर नागरिक हताहत होते हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, हमास ने पिछले कुछ वर्षों में इजराइल पर कई हमलों का दावा किया है और उसे अमेरिका, यूरोपीय संघ और इजराइल द्वारा एक आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया गया है। इजराइल ने अपने कट्टर दुश्मन ईरान पर हमास का समर्थन करने का आरोप लगाया है।

हमास के 'पापा' मुस्लिम ब्रदरहुड को जानिए

मिस्र के सबसे पुराने और सबसे बड़े इस्लामी संगठन के रूप में मुस्लिम ब्रदरहुड की पहचान है। विश्वभर में इस संगठन ने स्थापना के बाद से कई इस्लामी आंदोलनों को काफी प्रभावित किया। मध्य पूर्व के कई देशों में इसके सदस्य हैं। जब इसकी स्थापना हुई थी तो इसके आंदोलन का मकसद था कि इस्लाम के नैतिक मूल्यों और अच्छे कामों का प्रचार प्रसार किया जाए। हालांकि जल्द ही राजनीति में भी मुस्लिम ब्रदरहुड ने अपने पांव जमा लिए।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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