दुनिया

आखिर क्या है हमास और इसका मतलब क्या है? जिसने इजराइल पर दागे 20 मिनट में 5000 रॉकेट

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 7, 2023, 04:04 PM IST

What is Hamas: इजराइल की गाजा पट्टी पर हमास ने 20 मिनट के अंदर 5000 से ज्यादा रॉकेट से हमला किया है। इसके बाद से लोग जानना चाहते हैं कि आखिर ये हमास क्या है? इसका मतलब क्या होता है? हमास और इजराइल के बीच लड़ाई की वजह क्या है? आइए जानते हैं...

Image

हमास ने इजराइल पर दागे रॉकेट

Photo : AP

What is Hamas: इजराइल की गाजा पट्टी एक बार फिर से चर्चा में आ गई है। शनिवार को यहां हमास ने 20 मिनट के अंदर 5000 से ज्यादा रॉकेट से हमला किया है। इसके बाद मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से जंग जैसे हालात खड़े हो गए हैं। जाहिर है कि अचानक हुए इतने बड़े हमले के लिए इजराइल तैयार नहीं था, जिस कारण यहां बड़ा नुकसान हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अलग-अलग अस्पतालों में 150 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं और कईयों की हालत गंभीर बताई जा रही है। वहीं कई रिहायशी इमारतों को भी भारी नुकसान हुआ है। इस हमले के बाद देश के कई हिस्सों में इमरजेंसी सायरन की आवाजें सुनने को मिल रही हैं।

हमले के बाद हमास और इजराइल के पीएम नेतन्याहू का बयान भी सामने आया है। हमास ने जहां हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा है कि 'हमने ये ऐलान करना तय किया है कि अब बहुत हो चुका। हम दुश्मन को पहले ही चेतावनी दे चुके हैं। इजराइली कब्जाधारियों ने हमारे नागरिकों के खिलाफ सैकड़ों नरसंहार किए हैं। हम ऑपरेशन अल अक्सा स्टॉर्म की शुरुआत की घोषणा करते हैं।' वहीं इसके जवाब में पीएम नेतन्याहू ने भी जंग का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा, हम युद्ध में हैं। हमास को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।

इस सबके बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर ये हमास क्या है? इसका मतलब क्या होता है? हमास और इजराइल के बीच लड़ाई की वजह क्या है? आइए जानते हैं...

क्या है हमास?

हमास फलस्तीनी चरमपंथी संगठन और एक राजनीतिक पार्टी है, जिसकी स्थापना 1980 के दशक में हुई थी। पहली बार हमास ने अपनी ताकत का परिचय 1987 में कराया था, जब उसने इजराइल के खिलाफ जनआंदोलन छेड़ा। इसके बाद से हमास और इजराइल के बीच संघर्ष जारी है। इसका उद्देश्य इजराइली कब्जे से फलस्तीनी क्षेत्र को छुड़ाकर इस्लामी देश की स्थापना करना है। इजराइल में यह संगठन अपनी जड़ें इस कदर मजबूत कर चुका है कि यहां होने वाले हर एक हमले के पीछे इसी संगठन का हाथ बताया जाता है।

क्या होता है हमास का मतलब?

असल में हमास अरबी भाषा के हरकत अल-मुकावामा अल इस्लामिया (इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन) का संक्षेप है। अरबी भाषा में हमास का मतलब 'उत्साह' होता है। इसकी स्थापना शेख अहमद यासीन ने की थी, वह 12 साल की उम्र से व्हीलचेयर पर ही थे। वह इस गुट के धार्मिक नेता था, 2004 में इजराइली हमले में उनकी मौत हो गई थी। वर्तमान में इसका प्रमुख प्रमुख मोहम्मद दाइफ़ है।

क्या है फलस्तीन और इजराइल के बीच संघर्ष का कारण?

दोनों देशों के बीच युद्ध की मुख्य वजह गाजा पट्टी है। दरअसल, प्रथम विश्व युद्ध के बाद मध्य पूर्व में ऑटोमन साम्राज्य जब खत्म हुआ तो यहां ब्रितानियों ने अपना कब्जा जमा लिया। यहां पहले से बड़ी संख्या में यहूदी और अरब समुदाय के लोग रहा करते थे, जिनके बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा था। इस तनाव को खत्म करने के लिए ब्रितानी शासकों ने यहां यहूदियों के लिए फलस्तीन में अलग जमीन बनाने की बात की। मगर अरब समुदाय के लोग भी इस पर अपना दावा करते थे, जिससे दोनों के बीच तनाव बढ़ने लगा। इस विवाद को हल करने के लिए 1947 में संयुक्त राष्ट्र ने फलस्तीन को दो हिस्सों में बांटने का फैसला किया। एक हिस्सा यहूदियों का दिया गया तो दूसरा अरब समुदाय के लोगों को। 14 मई 1948 को यहूदियों ने अपने हिस्से को एक अलग देश घोषित कर दिया, जिसे इजराइल कहा गया। हालांकि, अरबी समुदाय ने इसके खिलाफ युद्ध छेड़ दिया, जिससे लाखों फलस्तीनी बेघर हो गए। इस युद्ध के बाद फलस्तीन तीन हिस्सों में बंट गया।- इजराइल, बेस्ट बैंक और गाजा पट्टी। अब ये गाजा पट्टी दोनों देशों के बीच संघर्ष का कारण बनी हुई है, जिसकी मुख्य वजह यहां का येरूशलम शहर है, जहां अल-अक्सा मस्जिद है और अरबी और यहूदी दोनों समुदाय के लोग इसे अपना पवित्र स्थान मानते हैं और अपना कब्जा चाहते हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article