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ट्रंप के साथ कैसे संबंध सुधारेंगे जेलेंस्की? NATO प्रमुख ने दे दी ये हिदायत

Zelenskyy should improve relations with Trump: नाटो प्रमुख मार्क रूटे ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को सख्त हिदायत दे दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि ट्रंप के साथ जेलेंस्की संबंध सुधारें । आपको इस रिपोर्ट बताते हैं कि नाटो चीफ ने इसके अलावा क्या कुछ कहा।

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NATO प्रमुख ने ट्रंप और जेलेंस्की के संबंध पर क्या कहा?

NATO chief on Trump-Zelenskyy Relations:उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के महासचिव मार्क रूटे ने वोलोदिमीर जेलेंस्की और डोनाल्ड ट्रंप के बीच शुक्रवार को हुई तीखी बहस के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति से कहा कि उन्हें 'अमेरिका के राष्ट्रपति के साथ अपने संबंधों को सुधार करने का तरीका खोजना' चाहिए।

नाटो प्रमुख बोले- ट्रंप के साथ संबंध सुधारें जेलेंस्की

रूटे ने शनिवार को ‘बीबीसी’ को बताया कि उन्होंने जेलेंस्की से कहा कि 'उन्हें (अमेरिका के) राष्ट्रपति (डोनाल्ड) ट्रंप द्वारा यूक्रेन के लिए अब तक किए गए कार्यों का वास्तव में सम्मान करना चाहिए।' वह 2019 में राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप के पहले कार्यकाल में किए गए उस फैसले का जिक्र कर रहे थे जिसके तहत यूक्रेन को ‘जैवलिन’ टैंक रोधी मिसाइल की आपूर्ति की गई थी जिनका इस्तेमाल उसने 2022 में रूसी टैंकों के खिलाफ किया था।

बैठक को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कही ये बड़ी बात

रूटे ने ट्रंप और जेलेंस्की के बीच शुक्रवार को हुई बैठक को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा कि वह 'यह जानते हैं कि अमेरिकी प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यूक्रेन रूस के साथ स्थायी शांति स्थापित कर सके।' रूटे ने उम्मीद जताई कि रविवार को लंदन में बैठक करने वाले यूरोपीय नेता यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी प्रदान करके भविष्य में शांति समझौते को संभव बनाने में मदद करेंगे।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शुक्रवार को यूक्रेन में युद्ध को लेकर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की आलोचना की और उन पर अमेरिका का आभार नहीं जताने का भी आरोप लगाया। इससे पहले जेलेंस्की ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ कूटनीति के सवाल पर वेंस को चुनौती दी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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