US Iran War: पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और ईरान और अमेरिका के बीच शांति स्थापित कराने और समझौता कराने के लिए अब रूस आगे आया है। क्रेमलिन ने अपने आधिकारिक बयान में इस बात की जानकारी दी। क्रेमलिन ने बताया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने ईरानी समकक्ष मसूद पेज़ेश्कियन के साथ फोन पर वार्ता की। इस दौरान उनके बीच मध्य पूर्व में नवीनतम घटनाक्रमों पर चर्चा की।
स्थायी शांति प्राप्त करने के प्रयासों में मध्यस्थता करने का भी प्रस्ताव
इस दौरान पुतिन ने अपने ईरानी समकक्ष से कहा कि रूस इस संघर्ष के राजनीतिक और राजनयिक समाधान में सुविधा प्रदान करना जारी रखेगा। साथ ही उन्होंने मध्य पूर्व में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति प्राप्त करने के प्रयासों में मध्यस्थता करने का भी प्रस्ताव रखा। इस बाबत रूस सभी क्षेत्रीय भागीदारों के साथ सक्रिय संपर्क बनाए रखेगा।
द्विपक्षीय सहयोग पर भी चर्चा
वहीं, फोन पर हुई बातचीत के दौरान पेज़ेश्कियन ने इस्लामाबाद में हुई ईरान-अमेरिका वार्ता पर भी बात की। उन्होंने क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए रूस के सैद्धांतिक रुख और ईरानी लोगों को दी जा रही मानवीय सहायता की सराहना भी की। क्रेमलिन ने आगे बताया कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग पर भी चर्चा की और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
इस्लामाबाद में हुई वार्ता का नहीं निकला कोई परिणाम
इससे पहले, इस्लामाबाद में करीब 21 घंटों तक ईरान और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के बीच चली वार्ता बिना किसी समझौते के ही खत्म हो गई।अमेरिका का पक्ष उपराष्ट्रपति जेडी वेंस तो ईरान की तरफ से मोहम्मद बागेर गालिबाफ इसकी अगुवाई कर रहे थे। वार्ता के बाद जहां जेडी वेंस ने कहा कि बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके हैं। मेरा मानना है कि यह खबर अमेरिका की तुलना में ईरान के लिए कहीं अधिक खराब है। इसलिए हम बिना किसी समझौते के अमेरिका वापस जा रहे हैं। उन्होंने हमारी शर्तों को स्वीकार नहीं करने का निर्णय लिया है। वहीं, ईरान ने इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। ईरान ने कहा है कि वह बिना समझौते के वार्ता से हटने को तैयार है। वार्ता का उद्देश्य ईरान की तनाव कम करने की इच्छा दिखाना था। अधिकारों या सहयोगियों पर कोई समझौता नहीं करेगा। वहीं, अमेरिका और ट्रंप को चेतावनी है कि अधिकारों की अनदेखी करोगे तो युद्ध की तैयारी का सामना करना पड़ेगा।
गौरतलब है कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और अमेरिका-ईरान के बीच वार्ता अनिश्चित स्थिति में है। ऐसे में रूस की भूमिका एक मध्यस्थ के तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
