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Bangladesh Protest: आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौरान बांग्लादेश में हिंसा, 25 की मौत; 2500 से ज्यादा घायल

Bangladesh Protest: बांग्लादेश सरकार ने प्रदर्शनकारियों को विफल करने के लिए मोबाइल इंटरनेट नेटवर्क बंद करने का आदेश दिया। सरकार ने कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए राजधानी सहित देश भर में अर्धसैनिक बल ‘बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश’ के जवानों को तैनात किया है।

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बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौरान झड़प

Photo : AP
KEY HIGHLIGHTS
  • मंगलवार को छह लोगों की मौत हुई थी
  • आंदोलन के कारण ट्रेन और मेट्रो बंद
  • मोबाइल इंटरनेट नेटवर्क बंद करने का आदेश

Bangladesh Protest: बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर बवाल मचा हुआ है। आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौरान बांग्लादेश में भड़की हिंसा में 25 लोगों की मौत हो गई है। साथ ही दो हजार से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं।

आज 18 लोगों की मौत

बांग्लादेश में गुरुवार को सरकारी नौकरियों के लिए आरक्षण प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान राजधानी ढाका और अन्य जगहों पर हिंसा भड़कने से कम से कम 18 और लोगों की मौत हो गई। साथ ही 2,500 से अधिक लोग घायल हो गए। इसके साथ ही विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से मरने वालों की संख्या 25 हो गई है।

क्यों हो रहा है विरोध प्रदर्शन

ढाका और अन्य शहरों में विश्वविद्यालय के छात्र 1971 में पाकिस्तान से देश की आजादी के लिए लड़ने वाले युद्ध नायकों के रिश्तेदारों के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कुछ नौकरियों को आरक्षित करने की प्रणाली के खिलाफ कई दिनों से रैलियां कर रहे हैं। समाचारपत्र ‘द डेली स्टार’ ने कहा- प्रदर्शनकारियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा सत्तारूढ़ पार्टी के लोगों के बीच आज देश भर में हुई झड़पों में कम से कम 18 लोग मारे गए तथा 2,500 से अधिक लोग घायल हो गए।’’

क्या बोले प्रदर्शनकारी

विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के मुख्य समूह ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ ने कहा कि प्रधानमंत्री के शब्द निष्ठाहीन हैं और ‘‘यह उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई हत्याओं एवं तबाही को प्रतिबिंबित नहीं करता है।’’ प्रदर्शनकारियों ने सत्तारूढ़ पार्टी की छात्र शाखा बांग्लादेश छात्र लीग पर आरोप लगाया कि वह पुलिस के समर्थन से उनके ‘‘शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन’’ पर हमला कर रही है।

कितना मिलता है बांग्लादेश में आरक्षण

वर्तमान आरक्षण प्रणाली के तहत 56 प्रतिशत सरकारी नौकरियां आरक्षित हैं, जिनमें से 30 प्रतिशत 1971 के मुक्ति संग्राम के स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों के लिए, 10 प्रतिशत पिछड़े प्रशासनिक जिलों, 10 प्रतिशत महिलाओं, पांच प्रतिशत जातीय अल्पसंख्यक समूहों और एक प्रतिशत नौकरियां दिव्यांगों के लिए आरक्षित हैं।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमार author

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय ... और देखें

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