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ड्रैगन से दोस्ती बढ़ा रहा अमेरिका! विदेश सचिव एंटनी ब्लिंकन फिर जाएंगे चीन, यात्रा का भारत पर कितना असर?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 21, 2024, 08:31 AM IST

Antony Blinken China Visit: एंटनी ब्लिंकन के चीन दौरे के बीच खबर है कि अमेरिका ने ड्रैगन के खिलाफ फिर से एक्शन लिया है। लंबी दूरी की मिसाइल सहित पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए उपकरणों की आपूर्ति करने के लिए अमेरिका ने तीन चीनी कंपनियों और बेलारूस की एक कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया है।

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अमेरिका विदेश सचिव एंटनी ब्लिंकन चीन की करेंगे यात्रा।

Photo : AP

Antony Blinken China Visit: अमेरिका और चीन के तल्ख रिश्तों के बीच फिर से दोस्ती की सुगबुगाहट शुरू हुई है। खबर है कि अमेरिकी विदेश सचिव एंटनी ब्लिंकन फिर से चीन की यात्रा करेंगे। अमेरिका की ओर से कहा गया है कि एंटनी ब्लिंकन अगले सप्ताह दो दिवसीय चीन दौरे पर जाएंगे। वह 24-26 अप्रैल के बीच चीन की यात्रा करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर बातचीत की संभावना है।

खास बात यह है कि एंटनी ब्लिंकन की एक साल से भी कम समय में चीन की यह दूसरी यात्रा होगी। बीते साल जून में भी ब्लिंकन ने चीन की यात्रा की थी, इस दौरान उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात की। रूस-यूक्रेन में छिड़े युद्ध और मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच ब्लिंकन की इस यात्रा को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इन मुद्दों पर होगी बातचीत

अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से कहा गया है कि विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन 24-26 अप्रैल को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) की यात्रा करेंगे। वह शंघाई और बीजिंग में ची के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान मध्य पूर्व में संकट, यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध, क्रॉस-स्ट्रेट मुद्दों और दक्षिण चीन सागर सहित कई द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, एंटनी ब्लिंकन बीजिंग पर रूस के लिए युद्धकालीन समर्थन पर अंकुश लगाने के लिए दबाव भी डाल सकते हैं।

दो महाशक्तियों के बीच नई दोस्ती

एक साल के अंदर एंटनी ब्लिंकन की चीन की दूसरी यात्रा के कई महत्वपूर्ण पहलू हैं। दो महाशक्ति देशों के बीच उभर रही नई दोस्ती पर दुनिया के कई देश नजरें लगाए हुए हैं। दरअसल, बीते कुछ सालों में अमेरिका और चीन के आपसी संबंध सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। दुनिया के कई देशों को आशंका है कि चीन और अमेरिका के बीच संबंध यूं ही खराब होते गए तो वर्ल्ड इकोनॉमी पर तो असर पड़ेगा ही, साथ ही वैश्विक शांति के लिए भी यह खतरा बन सकता है। ऐसे में ब्लिंकन की दूसरी चीन यात्रा को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत पर असर?

गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के संबंध सबसे बेहतर दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिका रक्षा सौदों में रूस की जगह भारत का विकल्प बनना चाहता है। वहीं, उसे यह भी उम्मीद है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते जा रहे चीन के प्रभाव की काट भारत ही है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अमेरिका के रिश्ते चीन के साथ सुधरते हैं तो क्या अमेरिका को भारत की उतनी जरूरत नहीं होगी? विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-चीन की दोस्ती से भारत और चीन के रिश्ते भी बेहतर हो सकते हैं और सीमा विवाद को भुलाकर दोनों देश व्यापारिक और सामरिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ सकते हैं। बता दें, भारत और चीन के खराब संबंधों के बावजूद दोनों देशों के बीच आपसी व्यापर फल-फूल रहा है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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