दुनिया

इन दो अमेरिकी वैज्ञानिकों को किया जाएगा नोबेल पुरस्कार से सम्मानित, जिन्होंने की माइक्रो RNA की खोज

Nobel Prize for Medicine: चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार अमेरिकी वैज्ञानिक विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन को दिया गया। माइक्रो आरएनए की खोज के लिए दोनों अमेरिकी वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इन विजेताओं को नोबेल की पुण्यतिथि 10 दिसंबर को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।

Image

अमेरिकी वैज्ञानिक विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन।

Who is Victor Ambros and Gary Ruvkin: माइक्रो आरएनए की खोज के लिए अमेरिकी वैज्ञानिकों विक्टर एंब्रोस और गैरी रुवकुन को चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार प्रदान किये जाने की घोषणा सोमवार को की गई। नोबेल असेंबली ने कहा कि इन वैज्ञानिकों की खोज “जीवों के विकास और कार्यप्रणाली के लिए मौलिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो रही है”।

कौन हैं विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन?

नोबेल समिति के महासचिव थॉमस पर्लमैन ने कहा कि एंब्रोस ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में वह शोध किया जिसके कारण उन्हें यह पुरस्कार दिया जाएगा। वह वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स मेडिकल स्कूल में प्रकृति विज्ञान के प्रोफेसर हैं। रुवकुन का अनुसंधान मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में किया गया, जहां वह जेनेटिक्स के प्रोफेसर हैं।

पर्लमैन ने बताया कि उन्होंने घोषणा से कुछ समय पहले फोन पर रुवकुन से बातचीत की। उन्होंने कहा, 'उन्होंने काफी देर में फोन उठाया और बहुत थके हुए लग रहे थे, लेकिन जब उन्हें समझ आया कि किस बारे में बात हो रही है तो वह बहुत उत्साहित और प्रसन्न हुए।'

नोबेल पुरस्कार जीतने वाले को क्या मिलता है?

पिछले वर्ष, ‘फिजियोलॉजी’ या चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार हंगरियाई-अमेरिकी नागरिक कैटालिन कारिको और अमेरिकी नागरिक ड्रू वीसमैन को उन खोजों के लिए दिया गया था, जिन्होंने कोविड-19 के खिलाफ एमआरएनए टीके विकसित करने में मदद की।

चिकित्सा क्षेत्र में अब तक कुल 227 विजेताओं को नोबेल पुरस्कार दिया गया है जिनमें से केवल 13 महिलाओं को यह पुरस्कार मिला है। यह पुरस्कार जीतने वाले को एक करोड़ 10 लाख स्वीडिश क्रोना (करीब 10 लाख अमेरिकी डॉलर) दिए जाते हैं। यह पुरस्कार स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल के नाम पर दिया जाता है।

10 दिसंबर को आयोजित समारोह में मिलेगा पुरस्कार

पुरस्कार विजेताओं को नोबेल की पुण्यतिथि 10 दिसंबर को आयोजित समारोह में पुरस्कार प्रदान करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। चिकित्सा क्षेत्र के अलावा मंगलवार को भौतिकी, बुधवार को रसायन विज्ञान और बृहस्पतिवार को साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की जाएगी। शांति के लिए नोबेल पुरस्कार की घोषणा शुक्रवार को और अर्थशास्त्र के लिए यह घोषणा 14 अक्टूबर को की जाएगी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article