International Space Station: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए नया मिशन लॉन्च करने के लिए तैयार है। इस मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री आईएसएस में क्रू-11 (Crew-11) की जगह लेंगे, जिन्हें हाल ही में मेडिकल इमरजेंसी की वजह से तय समय से पहले पृथ्वी पर लौटना पड़ा था।
कौन-कौन जा रहे स्पेस स्टेशन
- जेसिका मेयर (अमेरिका)
- जैक हैथवे (अमेरिका)
- सोफी एडेनोट (फ्रांस)
- एंड्रेई फेद्याएव (रूस)
क्रू-12 मिशन के अंतरिक्ष यात्री अगले आठ महीने में कई वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे, जिनमें माइक्रोग्रैविटी का मानव शरीर पर असर भी शामिल है। जेसिका मेयर इस मिशन की कमांडर होंगी, जबकि सोफी एडेनोट अंतरिक्ष में जाने वाली दूसरी फ्रांसीसी महिला बनेंगी।
कब होगी लॉन्चिंग?
क्रू-12 मिशन के तहत चारों अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेसएक्स (SpaceX) के फॉल्कन 9 रॉकेट (Falcon 9 Rocket) की मदद से स्पेस स्टेशन भेजा जाएगा। खराब मौसम और तेज हवाओं की वजह से मिशन को दो दिनों के लिए टाल दिया गया था। ऐसे में अगर सबकुछ ठीक रहा तो 13 फरवरी को क्रू-12 मिशन लॉन्च होगा और अगले दिन दोपहर तक अंतरिक्ष यात्री आईएसएस में दाखिल हो जाएंगे।
Crew 12 Mission
ISS में अभी कितने लोग हैं?
क्रू-11 मिशन की वापसी के बाद से स्पेस स्टेशन पर महज तीन लोगों की एक छोटी टीम काम कर रही है। हालांकि, क्रू-12 मिशन के सदस्यों के जुड़ने के बाद संख्या बढ़कर सात हो जाएगी। हालांकि, आईएसएस ने ऐसा भी समय देखा है जब वहां पर एक समय पर जरूरत से 13 अंतिरक्ष यात्री थे, जो अब तक की अधिकतम संख्या है। आम तौर पर आईएसएस में 6-7 अंतरिक्ष यात्री होते हैं। नासा के मुताबिक, 280 से ज्यादा अंतरिक्ष यात्री आईएसएस की यात्रा कर चुके हैं।
कठिन परिस्थितियों में रहते हैं अंतरिक्ष यात्री
आईएसएस पर अंतरिक्ष यात्रियों का जीवन हमारे और आप लोगों की तरह आसान नहीं होता। बेहद कम जगह पर अंतरिक्ष यात्री क्रमबद्ध तरीके से सोते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरिक्ष यात्रियों को अपना ही पेसाब रिसाइकिल करके पीना पड़ता है और वह रेडिएशन का भी सामना करते हैं। आसान शब्दों में कहें तो अंतरिक्ष में समय गुजारना बेहद मुश्किल काम है।
ब्रिटिश अंतरिक्ष यात्री मेगन क्रिश्चियन ने 'द सन' को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया था। धरती से लगभग 421 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की कक्षा में घूम रहा आईएसएस पिछले 25 सालों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहा है। हालांकि, 2030 में आईएसएस को प्रशांत महासागर में गहरी नींद में सुला दिया जाएगा।
Space Station Universe View
90 मिनट में होता है सूर्योदय
आईएसएस में रहने वाले अंतरिक्ष यात्री 90-90 मिनट के अंतराल में सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा देखते हैं। इसका मतलब साफ है कि स्पेस स्टेशन एक दिन यानी 24 घंटे में 16 बार पृथ्वी की परिक्रमा करता है। आईएसएस नासा, रोस्कोस्मोस, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी, कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के बीच सहकारी कार्यक्रम के रूप में संचालित होने वाला बहुराष्ट्रीय परियोजना है।
स्पेस स्टेशन में क्या-क्या सुविधाएं हैं?
स्पेस स्टेशन में दो बाथरूम और छह स्लीपिंग रूम है, जिनका अंतरिक्ष यात्री क्रमबद्ध तरीके से इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, खाना और पानी का बड़ी सावधानी से इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि धरती से ही इसकी सप्लाई होती है। वहां पर नहाने के लिए शॉवर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अंतरिक्ष यात्री गीले तैलिये से खुद को साफ करते हैं। पीने के लिए रिसाइकिल वॉटर का इस्तेमाल करते हैं।
कपोला से ब्रह्मांडीय दुनिया का करें दीदार
आईएसएस में एक विशेष मॉड्यूल है, जहां से अक्सर अंतरिक्ष यात्री ब्रह्मांडीय दुनिया के मंत्रमुग्ध कर देने वाले नजारों को कैप्चर करते हैं। इस खास मॉड्यूल को कपोला मॉड्यूल कहा जाता है, जिसमें सात खिड़कियां हैं। यह एक छोटा मॉड्यूल है जिसे स्पेस स्टेशन के बाहर रोबोटिक गतिविधियां, व्हीकल्स एप्रोच और स्पेसवॉक जैसे कार्यों के अवलोकन के लिए डिजाइन किया गया है।
