'अभी कई लक्ष्य बचे हैं, अगर नहीं हुई शांति तो...' Iran की 3 न्यूक्लियर साइट्स पर Airstrike के बाद बोले ट्रंप-Video
- Edited by: रवि वैश्य
- Updated Jun 22, 2025, 08:17 AM IST
ईरान के खिलाफ इजरायल की जंग में अमेरिका भी शामिल हो गया है, ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु स्थलों पर 'बहुत सफल हमला' किया।
अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप
अमेरिका ने ईरान में Fordow समेत तीन न्यूक्लियर साइट्स पर एयर स्ट्राइक कर दी, इस बड़ी कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति ट्रंप का संबोधन सामने आया उसमें उन्होंने कहा कि हमले सैन्य सफलता थे और ईरान की प्रमुख संवर्धन सुविधाएं नष्ट कर दी गईं, ट्रंप बोले कि वो हमारे लोगों को मार रहे हैं ईरान को शांति स्थापित करने की आवश्यकता है अन्यथा आगे के हमले और भी विनाशकारी होंगे।
ट्रम्प ने ईरान को 'आतंकवाद का नंबर-एक प्रायोजक देश' कहा, बताया कि उनके जनरल सुलेमानी ने बहुत से लोगों को मार डाला, हमने नेतन्याहू के साथ मिलकर काम किया और ईरान की परमाणु सुविधाएं पूरी तरह से नष्ट हो चुकी हैं।
ट्रम्प ने आगे कहा कि यह जारी नहीं रह सकता या तो शांति होगी या ईरान के लिए त्रासदी होगी बोले कि अभी कई लक्ष्य बचे हैं, मैंने सबसे कठिन चुना, आज रात सबसे कठिन थी। अगर शांति नहीं आती है तो हम दूसरे लक्ष्यों पर हमला करेंगे ट्रंप बोले कि कोई भी अन्य सैन्य बल वह नहीं कर सकता था जो हमने किया।
ईरान के खिलाफ इजरायल की जंग में अमेरिका भी शामिल
गोरतलब है कि ईरान के खिलाफ इजरायल की जंग में अमेरिका भी शामिल हो गया है और बड़ी कार्रवाई करते हुए ईरान में Fordow समेत तीन न्यूक्लियर साइट्स पर एयर स्ट्राइक कर दी। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु स्थलों पर 'बहुत सफल हमला' किया,रिपोर्ट के मुताबिक कहा जा रहा है कि अमेरिका ने फोर्डो पर हमला करने के लिए बी-2 बमवर्षकों का इस्तेमाल किया है।
अमेरिकी B-2 बमवर्षकों का इस्तेमाल
फोर्डो पर हमला करने के लिए अमेरिकी B-2 बमवर्षकों का इस्तेमाल किया गया, जो कि किलेबंद स्थल में 30,000 पाउंड के 'बंकर-बस्टर' हथियार लेकर गए।
परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने का जोखिम भरा कद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान में तीन स्थलों पर हमला किया, जो सीधे तौर पर इजरायल के उस प्रयास में शामिल हो गया है, जिसमें देश के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने का जोखिम भरा कदम उठाया गया है, ताकि तेहरान की प्रतिशोध की धमकी के बीच एक लंबे समय से चले आ रहे दुश्मन को कमजोर किया जा सके, जिससे व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष छिड़ सकता है।