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जंग के बीच खुद को महान शांतिदूत बता रहे ट्रंप, कहा- मुझे अच्छा लगेगा अगर...

Donald Trump News: ट्रंप ने कहा कि मैं चाहूंगा कि मेरी विरासत एक महान शांतिदूत के रूप में बने क्योंकि मैं सचमुच मानता हूं कि मैं शांतिदूत हूं। अभी ऐसा नहीं लगता लेकिन मेरा मानना है कि मैं शांति स्थापित करने वाला हूं।

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जंग के बीच खुद को महान शांतिदूत बता रहे ट्रंप

Donald Trump as Peace Maker: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल भारत एवं पाकिस्तान समेत आठ युद्ध रुकवाने का एक बार फिर दावा करते हुए कहा है कि वह चाहेंगे कि उनकी विरासत एक महान शांतिदूत के रूप में बने। ट्रंप ने मियामी में सऊदी समर्थित ’फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव (एफआईआई) प्रायोरिटी समिट’ को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान के साथ कोई भी समझौता करने की एक शर्त होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तेल आपूर्ति के लिए समुद्र में पहुंच बहाल की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, 'हम अभी बातचीत कर रहे हैं और अगर हम कुछ कर सकें तो यह बहुत अच्छा होगा लेकिन उन्हें इसे खोलना होगा।' अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपना यह दावा दोहराया कि उन्होंने आर्मेनिया और अजरबैजान, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और रवांडा, कंबोडिया और थाईलैंड, मिस्र और इथियोपिया, सर्बिया और कोसोवो तथा इजराइल और हमास के बीच युद्ध समेत आठ युद्ध रुकवाने में मदद की।

ट्रंप बोले- मैं चाहूंगा कि...

ट्रंप ने कहा, 'मैं चाहूंगा कि मेरी विरासत एक महान शांतिदूत के रूप में बने क्योंकि मैं सचमुच मानता हूं कि मैं शांतिदूत हूं। अभी ऐसा नहीं लगता लेकिन मेरा मानना है कि मैं शांति स्थापित करने वाला हूं।' उन्होंने कहा, 'मैंने भारत और पाकिस्तान के बीच भी युद्ध रुकवाया। वे एक हफ्ते से लड़ रहे थे.. नौ विमान पहले ही मार गिराए गए थे। वे युद्ध कर रहे थे। मैंने उन्हें रोका। मैंने उन्हें कैसे रोका? मैंने कहा, अगर तुम लड़ते रहे, तो मैं तुममें से हर एक पर 250 प्रतिशत शुल्क लगा दूंगा।'

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, '(उन्होंने कहा कि) 'नहीं, नहीं, नहीं, आप ऐसा नहीं कर सकते।' मैंने कहा, 'मैं ऐसा कर रहा हूं।' (उन्होंने कहा) 'ठीक है, अब हम और नहीं लड़ेंगे।' इस तरह मैंने उन्हें रोका।'

ट्रंप ने अपने संबोधन के दौरान मजाक में होर्मुज जलडमरूमध्य को 'ट्रंप जलडमरूमध्य' कहने के बाद स्वयं को सुधारा लेकिन बाद में कहा कि यह टिप्पणी गलती से नहीं की गई थी।

ईरान दबंग माना जाता था, लेकिन अब...

ट्रंप ने ईरान को पश्चिम एशिया में लंबे समय से अस्थिरता पैदा करने वाली ताकत बताया और कहा कि अमेरिकी सैन्य अभियान ’एपिक फ्यूरी’ के कारण उसकी स्थिति कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा, '47 साल से ईरान को पश्चिम एशिया का दबंग माना जाता रहा लेकिन अब वह दबंग नहीं रहा। वह भाग रहा है।'

उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान ईरान के नेतृत्व, सशस्त्र बलों और परमाणु कार्यक्रम को नुकसान पहुंचा है। ट्रंप ने ईरान पर हमलों को 'युद्ध' कहने से इनकार कर दिया और इसे एक सैन्य अभियान कहा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ युद्ध में उनकी 'मदद' नहीं करने के लिए उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की कड़ी आलोचना की।

उन्होंने कहा, 'नाटो एक कागजी शेर है और मैं हमेशा कहता रहा हूं कि हम नाटो की मदद करते हैं, लेकिन वे कभी हमारी मदद नहीं करते।...'

ट्रंप ने दोहराया कि अगर अमेरिका ने ईरान को 'बुरी तरह तबाह' नहीं किया होता तो यह देश दो से चार सप्ताह के भीतर परमाणु हथियार हासिल कर लेता जबकि वह इस बात पर जोर देते रहे हैं कि पिछले साल ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका की बमबारी ने उसके कार्यक्रम को कई साल पीछे धकेल दिया था।

राष्ट्रपति ने क्यूबा के खिलाफ संभावित कार्रवाई का भी संकेत दिया।

उन्होंने कहा, 'और वैसे क्यूबा अगला है, लेकिन ऐसा समझिए कि मैंने यह नहीं कहा। मीडिया, कृपया इस बयान को नजरअंदाज करे। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। क्यूबा अगला है।'

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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