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अमेरिकी-इजराइली बंधक को कब रिहा करेगा हमास? युद्ध विराम समझौते से जुड़ा अपडेट जानिए

US-Israeli hostages: हमास ने कहा है कि युद्ध विराम समझौता लागू होने पर ही अमेरिकी-इजराइली बंधक रिहा किया जाएगा। हमास के सात अक्टूबर, 2023 के हमले के दौरान 21 वर्षीय एडन अलेक्जेंडर को अगवा कर लिया गया था। हमास की गिरफ्त में अब भी कुल 59 बंधक हैं, जिनमें से 35 को मार दिये जाने की आशंका है।

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युद्ध विराम समझौते के बीच हमास ने कही ये बड़ी बात।

Photo : AP

Hamas vs Israel: हमास ने शनिवार को कहा कि वह एक अमेरिकी-इजराइली बंधक को तभी रिहा करेगा, जब इजराइल युद्ध विराम समझौते को लागू करेगा। इसने कहा कि यह समझौता लागू होने पर ही चार बंधकों के शव देगा और एक अमेरिकी-इजराइली बंधक को रिहा करेगा। गाजा पट्टी में इजराइली हवाई हमलों में कम से कम आठ लोग मारे गए, जिनमें एक स्थानीय पत्रकार भी शामिल है। फलस्तीनी चिकित्सकों ने यह जानकारी दी।

हमास की गिरफ्त में अब भी कुल 59 बंधक

हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि युद्ध विराम के दूसरे चरण के लिए लंबे समय से विलंबित वार्ता रिहाई के दिन से शुरू होनी चाहिए और 50 दिन से अधिक नहीं चलनी चाहिए। इजराइल को मानवीय सहायता पर रोक लगाना बंद करना होगा तथा मिस्र के साथ गाजा की सीमा पर स्थित रणनीतिक गलियारे से भी हटना होगा। एक अधिकारी ने बताया कि हमास बंधकों के बदले में और अधिक फलस्तीनी कैदियों की रिहाई की भी मांग करेगा।

हमास के सात अक्टूबर, 2023 के हमले के दौरान 21 वर्षीय एडन अलेक्जेंडर को अगवा कर लिया गया था। हमास की गिरफ्त में अब भी कुल 59 बंधक हैं, जिनमें से 35 को मार दिये जाने की आशंका है। इंडोनेशियाई अस्पताल ने बताया कि शनिवार को उत्तरी शहर बेत लाहिया के एक ही क्षेत्र में हुए दो हवाई हमलों में जान गंवाने वाले आठ लोगों के शव लाये गये।

हमास के प्रस्ताव पर इजरायल ने नहीं की कोई टिप्पणी

उत्तरी गाजा में आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख फरेस अवाद ने मृतकों में से एक की पहचान स्थानीय पत्रकार महमूद इस्लाम के रूप में की, जो ड्रोन उड़ा रहा था। इजराइल की ओर से हमास के प्रस्ताव पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने शुक्रवार को हमास पर ‘‘मनोवैज्ञानिक युद्ध’’ छेड़ने का आरोप लगाया।

अमेरिका ने कहा कि उसने बुधवार को युद्ध विराम को कुछ और सप्ताह बढ़ाने का प्रस्ताव पेश किया है, क्योंकि दोनों पक्ष स्थायी युद्धविराम के लिए बातचीत कर रहे हैं। वरिष्ठ हमास नेता खलील अल-हय्या के शुक्रवार को काहिरा पहुंचने के बाद मिस्र में वार्ता जारी रही। मिस्र और कतर ने युद्ध विराम तक पहुंचने में हमास के साथ प्रमुख मध्यस्थ के रूप में काम किया।

कब होगी इजराइल और हमास के बीच दूसरे चरण के लिए बातचीत?

जनवरी में हुए युद्ध विराम समझौते के तहत इजराइल और हमास को दूसरे चरण के लिए बातचीत शुरू करनी थी। इस महीने की शुरुआत में पहला चरण समाप्त होने के बाद, इजराइल ने कहा कि वह अमेरिका के एक नए प्रस्ताव पर सहमत हो गया है, जिसके तहत हमास स्थायी युद्ध विराम पर बातचीत करने की प्रतिबद्धता के बदले में शेष बंधकों में से आधे को रिहा कर देगा।

हमास ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया तथा इजराइल पर हस्ताक्षरित समझौते से पीछे हटने तथा युद्ध विराम को विफल करने का प्रयास करने का आरोप लगाया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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