US Iran War: ईरान युद्ध की वजह से दुनियाभर में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा है। जिस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है, उसे ईरान ने बंद कर रखा है। फिलहाल, केवल कुछ जहाजों को ही इस जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जा रही है।
तेल और गैस की आवाजाही बाधित होने के कारण फिलीपींस में ‘एनर्जी इमरजेंसी’ लागू कर दी गई है। एक तरफ जहां दुनिया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से पहले ही परेशान थी, वहीं अब ईरान ने एक और बड़ा कदम उठाने की चेतावनी दे दी है।
ईरान की नई धमकी
दरअसल, ईरान ने बाब अल-मंडेब स्ट्रेट (Bab-Al-Mandeb Strait) को बंद करने की धमकी दी है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उस पर जमीनी हमला करता है, तो वह इस अहम जलमार्ग को बंद कर सकता है।ईरान के अनुसार, यमन का एक सशस्त्र समूह इस जलडमरूमध्य पर कब्जा करने के लिए तैयार है।

ईरान ने बाब अल-मंडेब स्ट्रेट बंद करने की धमकी दी है।
क्या है बाब अल-मंडेब?
अरबी भाषा में ‘बाब अल-मंडेब’ का मतलब ‘आंसुओं का रास्ता’ होता है। यह संकरा समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
दरअसल, इस नाम के पीछे की कहानी भी है। बाब-अल-मंडेब को अरबी भाषा में 'दुख का द्वार' कहते हैं। यह स्ट्रेट अपनी चंचल समुद्री धाराओं, छिछली चट्टानों और तेज हवाओं के लिए जाना जाता है। यह यमन और अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र के बीच स्थित है और अपने सबसे संकरे हिस्से में केवल 29 किलोमीटर चौड़ा है। पुराने समय में इस स्ट्रेट को पार करने के दौरान कई जहाजें डूब जाती थी, जिसकी वजह से इसे 'दुख का द्वार'कहते हैं।
कितना महत्वपूर्ण है यह जलमार्ग?
यूरोप, एशिया और मिडिल ईस्ट के बीच होने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। स्वेज नहर से गुजरने वाले जहाजों को भी इसी मार्ग से होकर जाना पड़ता है। यही वजह है कि इसे दुनिया के सबसे अहम “चोक पॉइंट्स” में गिना जाता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक तेल का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। रोजाना यहां से करीब 40 से 50 लाख बैरल तेल का परिवहन होता है।

बाब अल मंडेब स्ट्रेट से वैश्विक तेल का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।
क्या होगा अगर रास्ता हुआ बंद?
अगर इस जलमार्ग को बंद किया जाता है, तो जहाजों को पूरे अफ्रीका का चक्कर लगाकर केप ऑफ गुड होप के रास्ते जाना पड़ेगा। इससे यात्रा में 15 से 20 दिनों की देरी हो सकती है और लागत भी बढ़ेगी।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने कहा है कि भारत समेत कुछ “मित्र देशों” के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। इससे यह उम्मीद है कि तनाव के बावजूद भारत के तेल और गैस आयात पर बड़ा असर नहीं पड़ सकता।
अमेरिका से बातचीत को लेकर क्या रुख है?
ईरान ने अमेरिका के साथ शांति वार्ता की खबरों को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान फिलहाल किसी भी सीधे संवाद के मूड में नहीं है, हालांकि प्रस्तावों की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहा है।
