US Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, इसे लेकर अभी भी औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट्स जरूर सामने आ रही हैं कि स्विट्जरलैंड के जेनेवा में एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर दस्तखत हो सकते हैं। इसी बीच व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित रणनीतिक समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है। अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला यह समझौता मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति की गारंटी देगा। इसके साथ ही इस डील के जरिए ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया जाएगा।
परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने पर जोर
व्हाइट हाउस के अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन का मुख्य उद्देश्य इस समझौते के माध्यम से यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर सके। इस समझौते की शर्तों के तहत ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को कड़े अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण और निगरानी में लाया जाएगा, जिससे उसके सैन्य परमाणु कार्यक्रम की क्षमताएं खत्म हो जाएंगी। अधिकारी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह समझौता केवल परमाणु चिंताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होगा। दशकों से जारी तनाव और अस्थिरता को पीछे छोड़ते हुए, यह डील मध्य पूर्व में एक स्थायी शांति और स्थिरता की नींव रखेगी।
क्या समझौता करेगा ईरान?
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को सरकारी टेलीविजन को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि ईरान और अमेरिका एक शुरुआती समझौते पर हस्ताक्षर करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। विदेश मंत्री ने उम्मीद जताई कि इस शुरुआती समझौते पर अगले कुछ दिनों में हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। इस इंटरव्यू के दौरान विदेश मंत्री ने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर ईरान का रुख स्पष्ट किया:संवर्धित यूरेनियम पर रुख
अब्बास अराघची ने साफ किया कि अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के स्टॉकपाइल (भंडार) को लेकर तेहरान का रुख पहले जैसा ही बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इस भंडार को प्रबंधित करने का एकमात्र तरीका यह है कि इसे देश के भीतर ही पतला किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि शुरुआती समझौता होने के बाद अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।होर्मुज और टोल टैक्स विवाद
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान एक ऐसा समझौता चाहता है जो तेहरान को वहां से गुजरने वाले जहाजों से "दी जाने वाली सेवाओं के बदले" शुल्क (Charge) वसूलने की अनुमति दे। गौरतलब है कि ईरान ने युद्ध के दौरान इस मार्ग पर एक टोल सिस्टम (Toll System) लागू किया था। हालांकि, अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय देश ईरान के इस कदम का विरोध करते रहे हैं और उनका मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
फ्रीज संपत्ति होगी बहाल
अराघची ने संकेत दिया कि इस शुरुआती समझौते के हिस्से के रूप में विदेशों में फ्रीज (जब्त) की गई ईरान की संपत्ति को बहाल कर दिया जाएगा। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के आर्थिक प्रभाव से निपटने के लिए एक व्यापक "आर्थिक योजना" पर भी काम किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में इस समझौते पर हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो यह वैश्विक सुरक्षा और मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
