दुनिया

ईरान युद्ध की भारी कीमत: 13 सैनिकों की मौत और 200 अरब डॉलर का बिल, क्या ट्रंप के पास है कोई 'एग्जिट प्लान'?

ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच राष्ट्रपति ट्रंप की रणनीति पर अमेरिकी संसद में सवाल उठ रहे हैं। 200 अरब डॉलर की मांग और सैनिकों की बढ़ती मौत ने चिंता बढ़ा दी है। आइए समझते हैं इस पेंच को।

Image

घरेलू बजट और सैन्य रणनीति के बीच फंसी व्हाइट हाउस

Photo : Times Now Digital

ईरान के साथ शुरू हुए युद्ध को तीन हफ्ते बीत चुके हैं और अब इसके जख्म गहरे होने लगे हैं। AP के मुताबिक इस संघर्ष में अब तक कम से कम 13 अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 230 से अधिक घायल हैं। युद्ध की तपिश सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है; पेंटागन ने व्हाइट हाउस से 200 अरब डॉलर के भारी-भरकम 'वॉर फंड' की मांग की है। जैसे-जैसे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती बढ़ रही है, वाशिंगटन के गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है, यह युद्ध खत्म कब और कैसे होगा?

"क्या है असली मकसद?" - सांसदों की बढ़ती बेचैनी

रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर थॉम टिलिस ने एसोसिएटेड प्रेस (AP) से बात करते हुए साफ कहा, "असली सवाल यह है कि हम हासिल क्या करना चाहते हैं? मैं ईरानी शासन के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करता हूं, लेकिन अंत में एक स्पष्ट रणनीति और उद्देश्य होने चाहिए।" वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप के एक बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। जब उनसे पूछा गया कि यह युद्ध कब खत्म होगा, तो उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा "जब मुझे मेरी हड्डियों में ऐसा अहसास होगा (When I feel it in my bones)"। इस गैर-जिम्मेदाराना बयान पर विपक्षी डेमोक्रेट्स ने कड़ी आपत्ति जताई है। सीनेटर मार्क वार्नर ने इसे 'पागलपन' करार दिया।

मिशन पूरा या अभी शुरुआत?

हाउस स्पीकर माइक जॉनसन का मानना है कि मिशन लगभग पूरा हो चुका है। उनके अनुसार, ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और नौसेना को पंगु बनाने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। हालांकि, ईरान की हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों को दी जा रही धमकी ने मामले को उलझा दिया है। दूसरी ओर, आलोचकों का कहना है कि सरकार के लक्ष्य बार-बार बदल रहे हैं। कभी परमाणु हथियारों को रोकना, तो कभी बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करना। सीनेटर वार्नर का तर्क है कि बिना जमीन पर सेना उतारे ईरान के समृद्ध यूरेनियम को खत्म करना मुमकिन नहीं है।

खजाने पर भारी पड़ता युद्ध

युद्ध के लिए मांगी गई 200 अरब डॉलर की राशि ने नई बहस छेड़ दी है। सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने इस मांग को 'हास्यास्पद' बताया है। सीनेटर मेजी हिरोनो ने घरेलू प्राथमिकताओं की याद दिलाते हुए कहा, "हमें हेल्थकेयर (Medicaid) और खाद सहायता (SNAP) जैसे कार्यक्रमों के फंड काटने के बजाय अपने लोगों की जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए।"

कानूनी पेंच: 60 दिनों की समय सीमा

'वॉर पावर्स एक्ट' के तहत राष्ट्रपति बिना संसद की मंजूरी के 60 दिनों तक सैन्य अभियान चला सकते हैं। लेकिन जानकारों का कहना है कि अगर 45 दिनों के भीतर सरकार ने कोई स्पष्ट 'एग्जिट प्लान' या आधिकारिक युद्ध प्रस्ताव पेश नहीं किया, तो कांग्रेस में ट्रंप को कड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

और पढ़ें
End of Article