खामेनेई पर ट्रंप का बड़ा वार: ईरानी तेल ढोने वाले नौ टैंकरों पर लगाया प्रतिबंध, इंटरनेट बंदी और दमन को बताया वजह
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 24, 2026, 12:10 AM IST
ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई और इंटरनेट बंदी के बीच ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। अमेरिका ने ईरानी तेल ढोने वाले नौ टैंकरों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का दावा है कि ईरान इस तरह अवैध कमाई का इस्तेमाल अपने ही लोगों को दबाने में करता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई।
अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए उसके अवैध तेल कारोबार से जुड़े नौ टैंकरों और उनके मालिकों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिका का कहना है कि ये जहाज करोड़ों डॉलर का प्रतिबंधित ईरानी तेल विदेशी बाजारों तक पहुंचा रहे थे।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, ये प्रतिबंध इसलिए लगाए गए हैं क्योंकि ईरान ने देशभर में हो रहे प्रदर्शनों के दौरान अपने नागरिकों पर हो रहे अत्याचार छिपाने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कार्रवाई ईरान की उस कमाई को निशाना बनाती है, जिसका इस्तेमाल वह अपने ही लोगों को दबाने में करता है।
ईरान में 8 जनवरी से इंटरनेट लगभग पूरी तरह बंद है। यह इस्लामिक रिपब्लिक के इतिहास की सबसे लंबी इंटरनेट बंदी मानी जा रही है। सरकार ने यह कदम तब उठाया, जब देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए और सूचनाओं के प्रसार को रोकने की कोशिश की गई।
अमेरिकी एजेंसी के अनुसार, जिन नौ जहाजों पर कार्रवाई हुई है, वे पलाऊ, पनामा और अन्य देशों के झंडे के तहत पंजीकृत हैं। ये सभी एक 'शैडो फ्लीट' का हिस्सा हैं, यानी पुराने टैंकरों का ऐसा नेटवर्क, जिसका इस्तेमाल रूस और ईरान जैसे देशों के प्रतिबंधित सामान को ढोने में किया जाता है। इन प्रतिबंधों के तहत अब संबंधित ईरानी व्यक्ति या कंपनियां अमेरिकी नागरिकों से कारोबार नहीं कर पाएंगी और न ही अमेरिका के बैंक खातों तक उनकी पहुंच होगी।
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर समूह मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'आर्माडा' बताया और कहा कि जहाज ईरान की ओर एहतियात के तौर पर भेजे जा रहे हैं।
वहीं ईरान में प्रदर्शनों पर हुई कार्रवाई में अब तक कम से कम 5,032 लोगों की मौत का दावा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने किया है। ईरान के शीर्ष अभियोजक ने ट्रंप के बयानों को पूरी तरह झूठा बताया है। इससे पहले भी अमेरिका ने ईरान में प्रदर्शनों को दबाने में भूमिका निभाने वाले अधिकारियों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में और कड़वाहट आ गई है।