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US Fire: अमेरिका में तबाही की आग से अब तक 16 लोगों की मौत, जानें लॉस एंजिलिस में फिलहाल कैसे हैं हालात

US Fire: अमेरिका में लगी आग और भी भीषण होती जा रही है। एक तरफ लॉस एंजिलिस में तबाही मचाने वाली तेज हवाओं के लौटने से पहले आग पर काबू पाने के प्रयास और तेज कर दिया गया है। मौत के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं। आग की वजह से अब तक कुल 16 लोगों की मौत हो चुकी है।

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आग में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हुई।

Los Angeles Fire Update: अमेरिका के लॉस एंजिलिस शहर के चिकित्सा परीक्षक कार्यालय ने जंगलों में लगी भीषण आग में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 होने की पुष्टि की है। कार्यालय ने शनिवार शाम को एक बयान में कहा कि कुल 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से पांच की मौत पैलिसेड्स जबकि 11 की मौत ईटॉन इलाके में हुई। इससे पहले 11 लोगों की मौत होने की पुष्टि की गई थी, लेकिन अधिकारियों ने कहा था कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। अधिकारियों ने एक केंद्र स्थापित किया है, जहां लोग गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं।

आग में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हुई

अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के लॉस एंजिलिस शहर में दमकल कर्मियों ने फिर से तेज हवाएं चलने की आशंका को देखते हुए जंगल में लगी भीषण आग को काबू करने के प्रयास और तेज कर दिये हैं। दमकल कर्मी प्रयास कर रहे हैं कि आग विश्व प्रसिद्ध जे. पॉल गेटी संग्रहालय और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय तक न फैले। मैन्डेविल कैनयन में आग बुझाने के लिए पुरजोर प्रयास किए जा रहे हैं। पैसिफिक कोस्ट के निकट स्थित मैन्डेविल कैनयन में प्रसिद्ध अभिनेता अर्नोल्ड श्वार्जनेगर समेत कई हस्तियों के घर हैं। ‘कैलफायर ऑपरेशन्स’ के प्रमुख क्रिश्चियन लिट्ज ने एक ब्रीफिंग में कहा कि आग बुझाने के अभियान के दौरान विशेष ध्यान कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के निकट घाटी क्षेत्र पैलिसेड्स में लगी भीषण आग पर रहेगा।

फिलहाल आग प्रभावित इलाकों में हल्की हवाएं चल रही हैं, लेकिन राष्ट्रीय मौसम सेवा ने चेतावनी दी कि अग्निशामकों के लिए मुश्किलें खड़ी करने वालीं तेज सेंटा ऐना हवाएं जल्द ही लौट सकती हैं। बताया जा रहा है कि इन हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही है, जिसने लॉस एंजिलिस तथा आसपास के पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में लेकर नष्ट कर दिया है। लॉस एंजिलिस में आठ महीनों से अधिक समय से कोई खास बारिश नहीं हुई है। आग के कारण अंतरराज्यीय राजमार्ग 405 पर भी खतरा मंडरा रहा है जो इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाला मुख्य यातायात मार्ग है।

आग की चपेट में 145 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र

लॉस एंजिलिस काउंटी के शेरिफ रॉबर्ट लूना ने बताया कि विनाश को रोकने का काम शनिवार को भी जारी रहा और टीमें शवों को खोजने वाले कुत्तों की मदद से खोजी अभियान चला रही हैं। लूना ने बताया कि पासाडेना में एक परिवार सहायता केंद्र भी स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने निवासियों से कर्फ्यू का पालन करने का आग्रह किया। आग ने करीब 145 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। हजारों लोगों को अब भी आग प्रभावित इलाकों को खाली करने के आदेश दिए गए हैं।

शहर के उत्तर में घनी आबादी वाले 40 किलोमीटर के क्षेत्र में लगी आग ने 12,000 से ज्यादा इमारतों को जलाकर राखकर दिया है, जिसमें घर, अपार्टमेंट इमारतें, व्यवसायिक इमारतें आदि शामिल हैं। हालांकि अब तक आग लगने का मुख्य कारण नहीं पता चल पाया है। आग अब भी जल रही है और शुरुआती अनुमानों के अनुसार यह संपत्ति के नुकसान के लिहाज से सबसे बड़ी आग है। एक्यूवेदर के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार अब तक 135 अरब अमेरिकी डॉलर से लेकर 150 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच नुकसान हो चुका है। अल्टाडेना के निवासी जोस लुइस गोडिनेज ने बताया कि उनके परिवार के 10 से ज्यादा सदस्यों के तीन घर नष्ट हो गए। उन्होंने कहा, “सब कुछ खत्म हो गया है। मेरा पूरा परिवार उन तीन घरों में रहता था और अब हमारे पास कुछ भी नहीं है।”

जले हुए घरों में लौट रहे लोगों को अधिकारियों ने आगाह किया है। कुछ निवासी मलबे से अपनी यादगार चीजें ढूंढने के लिए वापस आ रहे हैं। शनिवार को अधिकारियों ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि राख में सीसा, आर्सेनिक, एस्बेस्टस और अन्य हानिकारक पदार्थ हो सकते हैं। थॉमस ने कहा कि क्षतिग्रस्त संपत्तियों के मूल्यांकन के बाद निवासियों को सुरक्षात्मक उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए लौटने की अनुमति दी जाएगी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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