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अमेरिका में फिर लौट रहा कोरोना: अस्पताल में मरीजों के साथ मौत के आंकड़ों में भी इजाफा, WHO की बढ़ी टेंशन

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 17, 2023, 10:20 AM IST

US Covid-19 Cases: अमेरिका में कोरोना संक्रमण एक बार फिर पैर पसार रहा है। 27 अगस्त से 2 सितंबर तक अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या में लगभग 9% की वृद्धि हुई, जबकि 3-9 सितंबर तक कोरोना संक्रमण से मृत्यु दर के आंकड़ों में 5 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

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संयुक्त राज्य अमेरिका में कोरोना के मामलों में इजाफा देखा गया है।

Photo : BCCL

US Covid-19 Cases: अमेरिका में एक बार फिर से कोरोना संक्रमण वापस लौट रहा है। यहां अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या के साथ-साथ कोरोना संक्रमितों की मृत्यु दर में भी इजाफा हुआ है। प्रमुख कोविड मॉडलर जे वेइलैंड के मुताबिक, अमेरिका में प्रतिदिन 650,000 लोग कोरोना का शिकार हो रहे हैं। उनके अनुमान के अनुसार वर्तमान में 51 लोगों में से एक व्यक्ति वायरस का शिकार हो चुका है।

जे वेइलैंड की ओर से जारी किए गए आंकड़े डराने वाले हैं। उन्होंने भविष्यवाणी की है कि आने वाले डेढ़ महीने में अमेरिका की 7% से 10% आबादी कोरोना से संक्रमित हो जाएगी। वेस्टवॉटर सर्विलांस एंड मॉडलिंग के तहत प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में कोरोना संक्रमण 2020 में आई पहली लहर के करीब मंडरा रहा है और 2021 के अंत में डेल्टा वेब के करीब पहुंच रहा है।

मृत्यु दर में 5 प्रतिशत का हुआ इजाफा

आंकड़ों के अनुसार, कोरोना से संक्रमित होने के अलावा अस्पताल में भर्ती होने और मौतों में वृद्धि जारी है। 27 अगस्त से 2 सितंबर तक अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या में लगभग 9% की वृद्धि हुई, जबकि 3-9 सितंबर तक कोरोना संक्रमण से मृत्यु दर के आंकड़ों में 5 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। संयुक्त राज्य अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के आंकड़ों के अनुसार, कोविड-19 अस्पताल से संक्रमित मरीजों की अस्पताल में भर्ती दर में 8.7% और मौतों में 4.5% की वृद्धि हुई है। सीडीसी ने कहा कि सितंबर के पहले सप्ताह में लगभग 18,900 अमेरिकियों को वायरस के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था, यह संख्या मार्च के मध्य के बाद से नहीं देखी गई।

WHO की बढ़ी टेंशन

अमेरिका में कोरोना के बढ़ते आंकड़ों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की टेंशन भी बढ़ गई है। टेक्निकल प्रमुख मारिया वान केरखोव के मुताबिक, कोरोना संक्रमण के कारण अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों और मौतों के आंकड़ों में वृद्धि जारी है। ऐसे में उन्होंने बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को फौरन कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज लगवाने की सलाह दी है। इस बीच अमेरिका में अपडेटेड XBB बूस्टर को मंजूरी दी गई है। यह बूस्टर डोज 6 महीने और उससे अधिक उम्र के सभी अमेरिकियों के लिए उपलब्ध है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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