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अमेरिका को लगा 2000 करोड़ का फटका; 'एमक्यू-4सी ट्राइटन' ड्रोन क्रैश, तीन घंटे के मिशन पर गया था होर्मुज

अमेरिका का सबसे उन्नत, महत्वाकांक्षी और अत्याधुनिक खूबियों से लैस ड्रोन फारस की खाड़ी में जलमग्न हो गया। अमेरिकी नौसेना ने आधिकारिक पुष्टि की कि उसका लापता ड्रोन 'एमक्यू-4सी ट्राइटन' खाड़ी क्षेत्र में क्रैश हो गया।

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एमक्यू-4सी ट्राइटन मानवरहित ड्रोन (फोटो: नॉर्थरोप ग्रुम्मन)

फारस की खाड़ी में अमेरिका को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी नौसेना ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उसका सबसे एडवांस निगरानी ड्रोन MQ-4C Triton मिशन के दौरान क्रैश हो गया। यह हादसा 9 अप्रैल 2026 को हुआ, जब ड्रोन होर्मुज के ऊपर इंटरनेशनल एयरस्पेस में उड़ान भर रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (HALE) ड्रोन करीब 3 घंटे के रूटीन मिशन पर था। उड़ान के दौरान अचानक इसका संपर्क टूट गया और फ्लाइट ट्रैकिंग सिस्टम पर इमरजेंसी कोड 7700 दिखने लगा, जो आमतौर पर गंभीर तकनीकी खराबी का संकेत होता है।

दरअसल, अमेरिकी रक्षा विभाग के नियमानुसार, 2.5 मिलियन डॉलर से अधिक नुकसान वाले हादसों को क्लास ए मिसहैप माना जाता है। ये भी इसी श्रेणी में बताया गया है यानी 2000 करोड़ रुपये के करीब होगा। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कहा कि ड्रोन किसी के हमले का शिकार नहीं हुआ, बल्कि 9 अप्रैल को ये “क्रैश” हुआ था।

2000 करोड़ रुपये है कीमत

करीब 2000 करोड़ रुपये की कीमत वाला यह ड्रोन अमेरिकी रक्षा सिस्टम का अहम हिस्सा माना जाता है। इसे Northrop Grumman ने तैयार किया है और यह समुद्री निगरानी के लिए बेहद अहम भूमिका निभाता है। Triton को 50,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ने और 24 घंटे तक लगातार मिशन पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है।

ट्राइटन, एमक्यू-4 ग्लोबल हॉक का ही एक रूप है, और समुद्री निगरानी में विशेषज्ञता हासिल है। इस विमान की रेंज 13,000 किलोमीटर से भी ज्यादा है, जो बड़े इलाके की लगातार निगरानी के लिए जरूरी है। ये खराब मौसम में भी काम करने की कुव्वत रखता है। इसके एयरफ्रेम को समुद्र के खराब मौसम का सामना करने के लिए काफी मजबूती से गढ़ा गया है, जिससे यह हर तरह के हालात में समुद्र के ऊपर अपनी जगह पर डटा रह सकता है।

एएन/जेडपीवाई-3 मल्टी-फंक्शन एक्टिव सेंसर रडार सिस्टम है खासियत

इस ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत इसका 360 डिग्री निगरानी करने वाला एएन/जेडपीवाई-3 मल्टी-फंक्शन एक्टिव सेंसर रडार सिस्टम है, जो हजारों किलोमीटर तक समुद्री गतिविधियों पर नजर रख सकता है। खराब मौसम में भी यह बिना रुके ऑपरेशन जारी रख सकता है। ड्रोन को रीयल टाइम में डेटा दूसरे सैन्य जहाजों और विमानों तक भेजने में महारत हासिल है। इससे अमेरिकी सेना को समुद्री इलाकों में लगातार नजर रखने में मदद मिलती है; अन्य विमानों के मुकाबले इसकी लागत आधी होती है।

मामला यहीं नहीं रुकता। इसी अवधि में अमेरिका ने अपने 24 और MQ-9 Reaper ड्रोन भी गंवाए हैं। कुल मिलाकर 25 ड्रोन के नुकसान ने अमेरिकी सैन्य रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि विदेशी मीडिया इसे ट्रंप प्रशासन के लिए बहुत बड़ा झटका मान रही है। इस संघर्ष में ईरान तबाह कर देने का दावा ट्रंप बार-बार करते हैं लेकिन 25 ड्रोन का नुकसान भी अमेरिका के लिए बड़ा आघात है।

Shiv Shukla
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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