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पहले गायब, फिर मौत... अमेरिका और चीन में वैज्ञानिकों को कौन मार रहा? हर घटना के पीछे एक जैसा पैटर्न

अमेरिका और चीन में वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौतों और लापता होने की घटनाओं ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका में अब तक 11 वैज्ञानिकों के गायब होने या असामान्य परिस्थितियों में मौत की खबरें सामने आई हैं, जबकि चीन में एआई, हाइपरसोनिक और परमाणु तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों की मौत ने सवाल खड़े किए हैं।

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अमेरिका और चीन में एक के बाद एक दिग्गजों वैज्ञानिकों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो रही है। AI IMAGE

अमेरिका और चीन में ऐसी घटनाएं घटी रही हैं, जिसने दुनिया को चिंता में डाल रखा है। दोनों देशों में एक के बाद एक दिग्गजों वैज्ञानिकों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों में मिलाकर करीब 20 वैज्ञानिकों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत या लापता होने के मामले सामने आए हैं।

अमेरिका में अब तक 11 वैज्ञानिकों के लापता होने और असामान्य परिस्थितियों में मृत पाए जाने की खबर सामने आ चुकी है। वहीं, चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाइपरसोनिक हथियार, परमाणु तकनीक और अंतरिक्ष रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रहे 9 वैज्ञानिकों की मौत हो चुकी है।

यह सिर्फ संयोग नहीं: ट्रंप

अमेरिकी नेता एरिक बर्लिसन ने इसे संभावित 'विदेशी ऑपरेशन' बताया है। वहीं डोनल्ड ट्रंप ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि उम्मीद है यह सिर्फ संयोग हो। मामले की जांच एफबीआई कर रही है।

चीन में इन वैज्ञानिकों की हुई मौत

चीन में जिन वैज्ञानिकों की मौत हुई है। उनकी उम्र 26 से 68 साल के बीच थी और अधिकतर मामलों में कारण दुर्घटना, बीमारी या अस्पष्ट बताया गया है। चीन में माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स विशेषज्ञ चेन शूमिंग, केमिस्ट झोउ गुआंगयुआन, स्पेस एक्सपर्ट झांग शियाओक्सिन और हाइपरसोनिक विशेषज्ञ फांग डाइनिंग की मौत हो चुकी है।

एक्सपर्ट्स की मानें तो ज्यादातर मामले हाइपरसोनिक तकनीक, सैन्य एआई और एडवांस हथियारों से जुड़े हैं, जो रणनीतिक रूप से बेहद अहम क्षेत्र हैं। हालांकि कुछ मामलों को सामान्य दुर्घटना भी माना जा रहा है।

ऐसी घटनाएं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा: एक्सपर्ट्स

सीएनएन रिपोर्ट के मुताबिक, मारे गए या लापता हुए वैज्ञानिकों में से अधिकांश ऐसे शोध कार्यों से जुड़े थे, जो या तो राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित थे या फिर बड़े कॉर्पोरेट हितों को चुनौती दे रहे थे। इन घटनाओं में एक समानता देखी गई है। अक्सर जांच एजेंसियां इन्हें 'दुर्घटना' या 'आत्महत्या' बताकर बंद कर देती हैं, लेकिन रिपोर्ट में उठाए गए सवाल कुछ और ही इशारा करते हैं। जांचकर्ताओं ने पाया कि कई वैज्ञानिकों के लापता होने से ठीक पहले उनके डेटा और शोध परिणामों को डिजिटल रूप से मिटाया गया या चुरा लिया गया।

इस मामले को लेकर 'यूएस हाउस कमेटी ऑन ओवरसाइट एंड अकाउंटेबिलिटी' के चेयरमैन जेम्स कोमर ने गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इतनी घटनाओं का एक साथ होना महज संयोग नहीं लगता। उन्होंने आशंका जताई कि इसके पीछे कोई बड़ा और खतरनाक खेल हो सकता है। इसी वजह से अमेरिकी कांग्रेस ने भी इस पूरे मामले को अब गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है।

इन मामलों में क्या है समानता?

जांच एजेंसियों को इन मामलों में एक समानता दिख रही है। जिन वैज्ञानिकों के साथ ये घटनाएं हुई हैं, वे ज्यादातर बेहद संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रहे थे। जैसे, न्यूक्लियर साइंस, एयरोस्पेस और एडवांस टेक्नोलॉजी। इनमें कुछ वैज्ञानिक NASA, MIT और Los Alamos National Laboratory जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े थे।

वो घटनाएं जिसने चौंका कर रख दिया

2022: एंटी-ग्रेविटी रिसर्चर एमी कैथरीन एस्क्रिडेज की मौत अलबामा में हुई। इसे आत्महत्या कहा गया, लेकिन सवाल आज भी बाकी हैं।

2025: कैलिफोर्निया में पूर्व नासा वैज्ञानिक मोनिका रेजा हाइकिंग के दौरान गायब हो गईं। वहीं, बोस्टन में न्यूक्लियर फ्यूजन वैज्ञानिक नूनो लोरेइरो की हत्या कर दी गई।

2026: न्यू मैक्सिको में रिटायर्ड एयरफोर्स मेजर जनरल नील मैककैसलैंड लापता हो गए। फरवरी में खगोल भौतिकीविद कार्ल ग्रिलमेयर की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

मार्च में फार्मास्यूटिकल रिसर्चर जेसन थॉमस का शव एक झील में मिला। वे कैंसर के इलाज पर काम कर रहे थे और महीनों से गायब थे। इसके अलावा, नासा के माइकल डेविड हिक्स और जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के फ्रैंक माइवाल्ड की मौतों ने भी इस रहस्य को और उलझा दिया है।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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