दुनिया

'इजरायल का मिडिल ईस्ट पर अधिकार', अमेरिकी राजदूत के दावे से मचा हंगामा; अरब देशों का फूटा गुस्सा

अरब लीग, मिस्र और सऊदी अरब ने इज़राइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी के उस बयान की कड़ी निंदा की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इज़राइल को पूरे मध्य पूर्व पर नियंत्रण का अधिकार है। ​​सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने भी हकाबी की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के बयान खतरनाक मिसाल पेश करते हैं और क्षेत्रीय देशों व अमेरिका के बीच संबंधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

Image

इजरायल को लेकर अमेरिकी राजदूत के बयान पर मचा बवाल।

Photo : AP

इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने एक ऐसा बयान दिया, जिससे खाड़ी देश में हंगामा मच गया। दरअसल, उन्होंने कहा कि पूरे मिडिल ईस्ट पर इजरायल का अधिकार है। इस घटना पर अरब लीग, मिस्र और सऊदी अरब ने कड़ी आपत्ति जताई।

अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल घेइत (Ahmed Aboul-Gheit) ने बयान को “तर्कहीन और अव्यवहारिक” बताते हुए कहा कि यह कूटनीति के मूल सिद्धांतों और स्थापित मानकों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान उस समय भावनाएं भड़काते हैं जब गाजा युद्धविराम को लागू करने और शांति प्रक्रिया शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

'इजरायल का अरब की धरती पर अधिकार नहीं'

वहीं, मिस्र के विदेश मंत्री ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का “स्पष्ट उल्लंघन” बताया। मंत्रालय ने दोहराया कि इजरायल का कब्जे वाले फलस्तीनी क्षेत्रों या किसी अन्य अरब धरती पर कोई संप्रभु अधिकार नहीं है और वेस्ट बैंक के विलय या उसे गाजा पट्टी से अलग करने के किसी भी प्रयास को सिरे से खारिज किया।

सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने भी हकाबी की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के बयान खतरनाक मिसाल पेश करते हैं और क्षेत्रीय देशों व अमेरिका के बीच संबंधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी “अतिवादी बयानबाजी” अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

हकाबी ने आखिर कहा क्या?

गौरतलब है कि एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में, जिसे Tucker Carlson ने पोस्ट किया, हकाबी ने कहा था कि इजराइल को “बाइबिल के आधार पर” पूरे मध्य पूर्व या उसके अधिकांश हिस्से पर दावा करने का अधिकार है। उन्होंने यहां तक कहा, “अगर वे सब ले लें तो भी ठीक होगा।”

इजरायल-अमेरिका ने साध रखी है चुप्पी

बता दें कि हकाबी के इस बयान पर इजरायल या अमेरिका की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। वर्ष 1948 में अपनी स्थापना के बाद से इजरायल की कोई पूर्णतः मान्यता प्राप्त सीमाएं नहीं रही हैं। युद्धों, विलयों, युद्धविरामों और शांति समझौतों के परिणामस्वरूप अरब पड़ोसियों के साथ इसकी सीमाएं बदलती रही हैं।

1967 के छह दिवसीय मिडिल ईस्ट युद्ध के दौरान, इजराइल ने जॉर्डन से वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम, मिस्र से गाजा और सिनाई प्रायद्वीप और सीरिया से गोलान हाइट्स पर कब्जा कर लिया था। 1973 के मिडिल ईस्ट युद्ध के बाद मिस्र के साथ शांति समझौते के तहत इजराइल सिनाई प्रायद्वीप से पीछे हट गया. इसने 2005 में गाजा से भी एकतरफा वापसी की।

खाड़ी देशों और इजरायल के बीच हमेशा रहा विवाद

इजरायल और खाड़ी देशों के रिश्ते हमेशा उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। जहां एक ओर कुछ देशों के साथ संबंध सामान्य हुए हैं, वहीं दूसरी ओर फलस्तीन मुद्दे और क्षेत्रीय राजनीति को लेकर तनाव बना रहता है। इजरायल–हमास युद्ध मध्य पूर्व की सबसे गंभीर और लंबी चलने वाली हिंसक टकरावों में से एक है।

7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इज़रायल पर बड़ा हमला किया, जिसके बाद इज़रायल ने गाज़ा में व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया। इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच लगातार हवाई हमले, रॉकेट हमले और जमीनी कार्रवाई होती रही। इस हमले में हजारों लोगों की जान चली गई।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article