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ईरान और चीन की संस्थाओं पर अमेरिका ने लगाए प्रतिबंध; बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के बाद लिया एक्शन

ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर अमेरिका ने ईरान और चीन की संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए। बयान में कहा गया है कि अमेरिका उन लोगों को जवाबदेह ठहराना जारी रखेगा जो ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाना चाहते हैं, जिसमें बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रणोदक अवयवों की खरीद भी शामिल है।

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ईरान और चीन की कंपनियों के खिलाफ अमेरिका का बड़ा एक्शन।

US imposes Sanctions on Iran, China Entities: ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के लिए बैलिस्टिक मिसाइल प्रणोदक सामग्री खरीदने में शामिल होने के लिए अमेरिका ने ईरान और चीन में छह संस्थाओं और छह व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। प्रतिबंध एक ऐसे नेटवर्क को लक्षित करते हैं जिसने चीन से ईरान तक सोडियम परक्लोरेट और डायोक्टाइल सेबैकेट सहित प्रमुख सामग्रियों के हस्तांतरण की सुविधा प्रदान की है।

अमेरिका ने ईरान और चीन की संस्थाओं पर लगाया बैन

अमेरिकी विदेश विभाग ने एक प्रेस बयान में कहा कि 'ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की ओर से बैलिस्टिक मिसाइल प्रणोदक सामग्री खरीदने वाले नेटवर्क में उनकी भूमिका के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान और चीन में स्थित छह संस्थाओं और छह व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगा रहा है।'

बयान में आगे कहा गया, 'आज की कार्रवाई, जो चीन से ईरान तक सोडियम परक्लोरेट और डियोक्टाइल सेबैकेट की खरीद को सुगम बनाने वाले इस नेटवर्क को लक्षित करती है, ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को कम करने और IRGC की गतिविधियों को बाधित करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के अधिकतम दबाव अभियान के समर्थन में की गई है, जैसा कि 4 फरवरी, 2025 के राष्ट्रपति के राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति ज्ञापन 2 में उल्लिखित है।'

अमेरिका किन लोगों को जवाबदेह ठहराना रखेगा जारी?

बयान में आगे कहा गया कि अमेरिका उन लोगों को जवाबदेह ठहराना जारी रखेगा जो ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाना चाहते हैं, जिसमें बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रणोदक अवयवों की खरीद भी शामिल है।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, सोडियम परक्लोरेट का उपयोग अमोनियम परक्लोरेट के उत्पादन के लिए किया जाता है, जिसे मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR) द्वारा नियंत्रित किया जाता है, जो राज्यों के बीच एक बहुपक्षीय राजनीतिक समझ है जो मिसाइलों और मिसाइल प्रौद्योगिकी के प्रसार को सीमित करना चाहते हैं। अमोनियम परक्लोरेट और डियोक्टाइल सेबैकेट दोनों ही ठोस प्रणोदक रॉकेट मोटर्स में उपयोग किए जाने वाले रसायन हैं, जिनका आमतौर पर बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए उपयोग किया जाता है।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान द्वारा मिसाइलों का विकास संयुक्त राज्य अमेरिका की सुरक्षा और संरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। बेसेंट ने कहा कि 'ईरान द्वारा मिसाइलों और अन्य हथियार क्षमताओं का आक्रामक विकास संयुक्त राज्य अमेरिका और हमारे भागीदारों की सुरक्षा को खतरे में डालता है। यह मध्य पूर्व को भी अस्थिर करता है, और इन प्रौद्योगिकियों के प्रसार को रोकने के लिए वैश्विक समझौतों का उल्लंघन करता है। शक्ति के माध्यम से शांति प्राप्त करने के लिए, वित्त मंत्रालय ईरान को उसके मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक संसाधनों तक पहुंच से वंचित करने के लिए सभी उपलब्ध उपाय करना जारी रखेगा।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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