खनिज संपदा से समृद्ध विवादित पश्चिमी सहारा क्षेत्र को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में दो महाशक्तियों, अमेरिका और रूस के बीच तीखा कूटनीतिक टकराव देखने को मिला है। शुक्रवार को हुई एक नाटकीय वोटिंग के दौरान सुरक्षा परिषद में पेश किए गए अमेरिका और रूस दोनों के ही प्रस्ताव गिर गए। रूस ने अमेरिका द्वारा तैयार किए गए उस प्रस्ताव पर अपना वीटो इस्तेमाल कर दिया, जो पश्चिमी सहारा पर मोरक्को की संप्रभुता के दावे का समर्थन करता था और संयुक्त राष्ट्र के 35 साल पुराने शांति रक्षा मिशन को समाप्त करने का प्रस्ताव रखता था। इसके तुरंत बाद, 1 साल के लिए शांति मिशन का कार्यकाल बढ़ाने वाले रूस के प्रतिद्वंद्वी प्रस्ताव को भी 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में आवश्यक 9 वोट न मिलने के कारण खारिज कर दिया गया। इस कूटनीतिक गतिरोध के बाद यूएन शांति मिशन का जनादेश समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और युद्ध का खतरा गहरा गया है।
अमेरिका का प्रस्ताव: मोरक्को की संप्रभुता को मान्यता देने का प्लान
अमेरिका द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव में पश्चिमी सहारा पर मोरक्को की संप्रभुता के तहत स्वायत्तता देने की योजना को ही एकमात्र व्यावहारिक समाधान बताया गया था। अमेरिकी प्रस्ताव में मांग की गई थी कि 30 अप्रैल 2027 तक संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षा मिशन (MINURSO) को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए और उसकी जगह एक नया राजनीतिक मिशन स्थापित किया जाए, जो जनमत संग्रह की तैयारियों को रोक दे। रूस और चीन लंबे समय से पश्चिमी सहारा के स्वदेशी सहरावी लोगों के लिए जनमत संग्रह का समर्थन करते रहे हैं, जिसमें स्वतंत्रता का विकल्प भी शामिल हो। नतीजतन, रूस ने अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल कर अमेरिकी मसौदे को निरस्त कर दिया।
रूस का प्रस्ताव भी गिरा: वोटिंग में नहीं मिला 9 देशों का साथ
अमेरिकी प्रस्ताव खारिज होने के बाद सुरक्षा परिषद में रूस द्वारा पेश किए गए वैकल्पिक प्रस्ताव पर वोटिंग कराई गई। रूस का प्रस्ताव 31 अक्टूबर 2027 तक मौजूदा यूएन शांति रक्षा मिशन के जनादेश को एक साल के लिए आगे बढ़ाना चाहता था। 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में रूस के प्रस्ताव के पक्ष में केवल 3 वोट पड़े, जबकि 11 सदस्य देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। सुरक्षा परिषद में किसी भी प्रस्ताव को पारित कराने के लिए न्यूनतम 9 'हां' वोटों की जरूरत होती है। चूंकि रूस का प्रस्ताव बहुमत हासिल नहीं कर सका, इसलिए अमेरिका को इस पर वीटो लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ी और प्रस्ताव खुद ही खारिज हो गया।
क्या है पश्चिमी सहारा का इतिहास और विवाद?
पश्चिमी सहारा पूर्व में स्पेन का उपनिवेश था, जहां प्रचुर मात्रा में फॉस्फेट और तटवर्ती क्षेत्रों में काफी मात्रा में तेल भंडार होने का अनुमान है। वर्ष 1975 में स्पेन के जाने के बाद मोरक्को ने पश्चिमी सहारा पर अपना अधिकार कर लिया और इसे अपना हिस्सा घोषित कर दिया। इसके विरोध में स्थानीय सहरावी लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले पोलिसारियो फ्रंट ने हथियार उठा लिए।संयुक्त राष्ट्र ने 1991 में दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम कराया और क्षेत्र में शांति रक्षा मिशन (MINURSO) तैनात किया। इसका मुख्य उद्देश्य युद्धविराम की निगरानी करना और यह तय करने के लिए जनमत संग्रह कराना था कि सहरावी लोग आजादी चाहते हैं या मोरक्को का हिस्सा बनना चाहते हैं।
