Israel Hamas War : इजरायल-हमास के बीच जारी जंग में हुए नुकसान पर संयुक्त राष्ट्र ने बड़ा बयान दिया है। यूएन ने कहा है कि गाजा में इमारतों का जिस तरह से नुकसान पहुंचा है वैसी तबाही द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखी गई। इजरायल यदि आज हमले रोक देता है तो भी उसकी बमबारी और जमीने हमलों में नष्ट हुईं इमारतों को दोबारा खड़ा करने में कम से कम 2040 तक का समय लगेगा।
गाजा में करीब 5 फीसद लोग मारे गए
यूएन ने अपनी आंकलन रिपोर्ट में कहा है कि इस युद्ध का सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव बहुत तेजी से बढ़ रहा है। बता दें कि हमास ने गत सात अक्टूबर को इजरायल पर जमीन, आसमान और समुद्र के जरिए भीषण हमले किए। रिपोर्ट में कहा गया है 23 लाख की आबादी वाली गाजा के करीब पांच प्रतिशत लोग मारे गए हैं। इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का मारा जाना अप्रत्याशित है।
अप्रैल के मध्य तक 33,000 से अधिक फलस्तीनी मारे गए
आकलन के अनुसार, अप्रैल के मध्य तक 33,000 से अधिक फलस्तीनी मारे गए थे और 80,000 से अधिक घायल हुए थे। लगभग 7,000 अन्य लोग लापता हैं, और माना जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर लोग मलबे में दब गए। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के प्रशासक अचिम स्टीनर ने कहा, "युद्ध जारी रहने की वजह से गाजा के लोगों और सभी फलस्तीनियों को हर दिन भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।" यूएनडीपी और पश्चिमी एशिया के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग की रिपोर्ट से पता चलता है कि गाजा में लोगों को किस तरह का भयावह संघर्ष करना पड़ रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद से यहां 2,01,000 लोगों की नौकरियां चली गई हैं। यहां 2023 की आखिरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में 81 प्रतिशत की गिरावट आई है।
18 लाख फलस्तीनी गरीब हुए
अरब देशों के लिए यूएनडीपी के क्षेत्रीय निदेशक अब्दुल्ला अल दरदारी ने संयुक्त राष्ट्र के एक संवाददाता सम्मेलन में रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि अनुमान है कि इस युद्ध में गाजा में लगभग 50 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश नष्ट हो गया है, और 18 लाख फलस्तीनी गरीबी में चले गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में संयुक्त राष्ट्र मानव विकास सूचकांक 20 साल से अधिक पीछे जा चुका है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि 2024 में गाजा की जीडीपी 51 फीसदी तक घट सकती है। नुकसान का दायरा और भी बढ़ने की आशंका जताई गई है क्योंकि अभी युद्ध जारी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गाजा में कम से कम 3,70,000 आवास इकाइयां क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इनमें से 79,000 पूरी तरह से नष्ट हो गईं। व्यावसायिक इमारतें भी इनमें शामिल हैं।
