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Israel-Lebanon War: इजरायली हमले में घायल हुए दो शांति सैनिक, संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी ने दी जानकारी

Israel Hamas War: संयुक्त राष्ट्र अधिकारी ने कहा कि इजरायली हमले में लेबनान में तैनात दो शांति सैनिक जख्मी हो गए हैं। इससे पहले दक्षिणी लेबनान के असैन्य सुरक्षा केंद्र पर इजरायली हवाई हमले में पांच स्वास्थ्यकर्मियों की मौत की खबर सामने आई थी। आपको तफसील से सबकुछ समझाते हैं।

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इजरायल के हमले में लेबनान में दो शांति सैनिक घायल। (फाइल फोटो)

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Israel Attacks on Lebanon: इजरायल ने अपने दुश्मनों को सबक सिखाने के लिए अपनी कमर कस ली है। फिलिस्तीन, बेरूत हो या लेबनान हमले का सिलसिला जारी है। इस बीच ये जानकारी सामने आई कि दो शांति सैनिक इजरायली हमले में लेबनान में घायल हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने कहा कि इजरायल के हमले में लेबनान में दो शांति सैनिक घायल हो गए हैं।

इजरायली हमले में लेबनान में दो शांति सैनिक घायल

अधिकारी ने नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं है। अधिकारी ने बताया कि इजरायली सेना ने बृहस्पतिवार को दक्षिणी लेबनान में शांति सेना यूनिफिल के तीन स्थानों पर गोलीबारी की।

इजरायली हवाई हमले में पांच स्वास्थ्यकर्मियों की मौत

दक्षिणी लेबनान के दरदघया शहर में बुधवार को एक लेबनानी असैन्य सुरक्षा केंद्र पर इजरायली हवाई हमले में वहां कार्यरत पांच स्वास्थ्यकर्मी मारे गए। नागरिक सुरक्षा प्रवक्ता एली खैरल्ला ने यह जानकारी दी। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी एक बयान में इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि इजरायल ने 'अंतरराष्ट्रीय कानूनों, मानदंडों और मानवीय समझौतों की अवहेलना करते हुए बुधवार की रात फिर से बचाव दल और एम्बुलेंस कर्मचारियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।'

खैरल्ला ने बताया कि पीड़ितों में लेबनानी असैन्य सुरक्षा केंद्र में ‘टायर रिजनल सेंटर’ के प्रमुख अब्दुल्ला अल-मौसावी भी शामिल हैं।

लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि टीम तलाश अभियान के तहत मलबे में दबे लोगों की खोज कर रही है।

गाजा पर इजरायली हमले में कम से कम 21 लोग मारे गए

फलस्तीनी चिकित्सा अधिकारियों ने बताया कि बृहस्पतिवार को गाजा में विस्थापित लोगों को आश्रय देने वाले एक स्कूल पर इजरायली हमले में कम से कम 21 लोगों की मौत हो गयी। अधिकारियों ने बताया कि मृतक संख्या बढ़ सकती है। इजरायल ने फलस्तीनी क्षेत्र में उग्रवादी ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं, जबकि उसका ध्यान लेबनान में हिजबुल्ला के खिलाफ युद्ध और ईरान के साथ बढ़ते तनाव पर केंद्रित है। उसने इस सप्ताह की शुरुआत में उत्तरी गाजा में हमास के विरुद्ध बड़े पैमाने पर हवाई और जमीनी अभियान शुरू किया था।

अल-अक्सा शहीदी अस्पताल ने दीर अल-बला के केंद्रीय शहर में हुए हमले में मारे गए लोगों की संख्या की पुष्टि की है। हमले के बाद हताहतों को इसी अस्पताल में लाया गया था। उसने कहा कि हमले में कई अन्य लोग घायल हुए हैं। एसोसिएटेड प्रेस के एक संवाददाता ने अस्पताल में एक के बाद एक कई एंबुलेंस को आते देखा और शवों की गिनती की। अस्पताल में कई शव क्षत-विक्षत अवस्था में पहुंचे थे। इजरायली सेना की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमले का लक्ष्य आश्रय गृह के अंदर हमास द्वारा संचालित पुलिस की अस्थायी चौकी थी।

हमास और इजरायल के बीच लगातार जारी है संघर्ष

पिछले साल सात अक्टूबर को हुए हमले के बाद युद्ध की शुरुआत होने के एक साल से भी अधिक समय बाद हमास ने इजरायली सेना पर हमले जारी रखे हैं तथा इजरायल में कभी कभार रॉकेट दागे हैं। हमास के नेतृत्व वाले उग्रवादियों ने इजरायल में घुसकर सेना के ठिकानों और कृषक समुदायों पर हमला किया, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए, जिनमें अधिकतर आम नागरिक थे। इस हमले के दौरान लगभग 250 अन्य को अगवा कर लिया गया था।

उन्होंने अब भी लगभग 100 लोगों को बंधक बना रखा है, जिनमें से एक तिहाई के मृत होने की आशंका है। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इजरायल के आक्रमण में 42,000 से अधिक फलस्तीनी मारे गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि इनमें कितने लड़ाके थे, लेकिन उनका कहना है कि मरने वालों में आधे से अधिक महिलाएं और बच्चे हैं। युद्ध ने गाजा के बड़े क्षेत्र को बर्बाद कर दिया है और इसकी 23 लाख की आबादी में से लगभग 90 प्रतिशत लोग विस्थापित हो गए हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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