Proposed Peacekeeping Force : करीब तीन साल से चल रहे युद्ध को खत्म करने की दिशा में रूस और यूक्रेन आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देशों ने अपने बंधक सैनिकों की अदला-बदला की है। इसे युद्ध खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस बीच, यूक्रेन को सैन्य एवं आर्थिक मदद देने वाले यूरोप एवं पश्चिमी देशों के सैन्य कमांडरों की एक बड़ी बैठक ब्रिटेन में हो रही है। इस बैठक में यूक्रेन में एक प्रस्तावित शांति सेना भेजे जाने के आकार एवं स्वरूप के बारे में चर्चा होगी। सैन्य कमांडरों की इस बैठक की मेजबानी ब्रिटेन कर रहा है। समझा जाता है कि इस बैठक में करीब 20 देश शामिल होंगे।
शांति सेना की योजना काफी हद तक तैयार
ब्रिटेन के अलावा यूरोप के अन्य देशों ने भी यूक्रेन में एक शांति सेना भेजने की इच्छा जताई है। रिपोर्टों में कहा गया है कि इस योजना को काफी हद तक तैयार कर लिया गया है। हालांकि, इस प्रस्तावित शांति सेना पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही अपना रुख साफ कर चुके हैं। पुतिन ने कहा है कि वह यूक्रेन में नाटो देशों की सेना बर्दाश्त नहीं करेंगे, सेना का स्वरूप चाहे जैसा हो। ऐसे में यूरोप के देश यदि यूक्रेन में शांति सेना भेजते हैं तो युद्ध रोकने के लिए चल रही बातचीत की प्रक्रिया पटरी से उतर सकती है।
शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
बुधवार को रूस और यूक्रेन ने अपने 175-175 कैदियों की अदला-बदली की। दोनों देशों के बीच तीन वर्ष पहले शुरू हुए युद्ध के बाद यह पहली बार है जब इन देशों ने इतनी बड़ी संख्या में कैदियों की अदला बदली की है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा, ‘हम सशस्त्र बलों, नौसेना, नेशनल गार्ड, प्रादेशिक रक्षा बलों आदि में सेवाएं देते हुए हमारी स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ने वाले सैनिकों, सार्जेंट और अधिकारियों को वापस ला रहे हैं।’ यूक्रेनी नेता ने मंगलवार को कहा था कि सभी युद्धबंदियों और पकड़े गए नागरिकों को रिहा करना शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा और इससे दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली में मदद मिलेगी। उन्होंने कई बार सभी कैदियों की अदला-बदली की मांग की थी।
संघर्ष विराम के बारे में बातचीत जारी
यूक्रेन ने कैदियों की अदला-बदली किए जाने की जानकारी ऐसे वक्त पर दी है जब अस्थायी संघर्ष विराम के बारे में बातचीत जारी है। दोनों युद्धरत देशों की उत्तरी सीमा के निकट यह अदला-बदली होने के कुछ ही देर बाद, कई परिवार यूक्रेन के चेर्नीहीव क्षेत्र के एक अस्पताल में पहुंच गए जहां कैदियों को लाया जाना था। कुछ देर बाद कई बसें अस्पताल परिसर में आईं और उनमें से कमजोर और थके प्रतीत होते सैनिक वाहनों से बाहर निकले। वाहनों से निकलने के दौरान से इनके चेहरे अपने लोगों को परिसर में मौजूद देखकर खिल उठे।
